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भीलवाड़ा में 300 टन गुलाल से महका बाजार

bhilwara ki holi ke rang.

bhilwara ki holi ke rang.

भीलवाड़ा। फाल्गुन की मदमस्त हवाओं के साथ ही वस्त्रनगरी भीलवाड़ा में रंगों के पर्व होली और शीतला सप्तमी का खुमार चढ़ने लगा है। जैसे-जैसे त्योहार नजदीक आ रहा है, रंगों और गुलाल के बाजार में जबरदस्त 'गरमाहट' देखी जा रही है। होली के साथ ही शीतला सप्तमी से लेकर दशमी तक चलने वाले इस उत्सव के लिए शहर के थोक बाजारों से लेकर गलियों तक में अब सिर्फ अबीर-गुलाल की ही चर्चा है।

कीमतों में नहीं उछाल

व्यापारिक आंकड़ों की मानें तो इस बार भीलवाड़ा जिला और आस-पास के क्षेत्रों के लिए गुलाल की मांग रेकॉर्ड स्तर पर है। रंग विक्रेताओं के अनुसार समूचे जिले में लगभग 300 टन से अधिक गुलाल की बिक्री का अनुमान है। वहीं शहर के प्रमुख थोक व्यापारियों के जरिए करीब 3000 किलो पक्के रंगों का बाजार सज चुका है। राहत की बात यह है कि इस वर्ष रंगों की कीमतों में पिछले साल के मुकाबले कोई बड़ा उछाल नहीं देखा गया है, जिससे खरीदारों में उत्साह है।

हाइटेक पैकिंग और हर्बल का क्रेज

बदलते जमाने और युवाओं की पसंद को देखते हुए इस बार बाजार में 'हाइटेक' और आकर्षक पैकिंग की धूम रहेगी। शहर के विभिन्न हिस्सों में कारीगर दिन-रात गुलाल को सुगंधित और चमकदार बनाने में जुटे हैं।

युवाओं की पहली पसंद हर्बल

कलर व्यवसायी राधेश्याम-महावीर बिंदल ने बताया कि युवाओं की पहली पसंद हर्बल और इको-फ्रेंडली गुलाल है। बाजार में हरा, नीला, आसमानी, पीला, गुलाबी, सफेद और लाल रंगों की लंबी शृंखला उपलब्ध है। विशेष रूप से 'सेंटेड' (सुगंधित) गुलाल लोगों को अपनी ओर खींच रहा है।

हर जेब के हिसाब से रंग-गुलाल मौजूद

बाजार में हर जेब के हिसाब से रंग-गुलाल मौजूद हैं। प्रीमियम रंग 1400 से 1500 रुपये प्रति किलो है। जबकि आम आदमी की पहुंच के अनुरूप छोटी डिब्बी मात्र 5 से 10 रुपए की किफायती पैकिंग में भी उपलब्ध है। सामान्य गुलाल की बाजार कीमत 100 से 150 रुपए प्रति किलो के बीच बनी हुई है। शीतला सप्तमी से दशमी तक चलने वाले इस पर्व को लेकर भीलवाड़ा के व्यापारियों को उम्मीद है कि इस बार होली की रंगत व्यापार के सारे पुराने रेकॉर्ड तोड़ देगी।