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103 मिनट का सबसे लंबा चंद्रग्रहण, गर्भवती महिलाएं बचने के लिए कमरे में रखें ये चीज़

103 मिनट का सबसे लंबा चंद्रग्रहण, गर्भवती महिलाएं बचने के लिए कमरे में रखें ये चीज़

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Tanvi Sharma

Jul 18, 2018

chandra grahan 2018

103 मिनट का सबसे लंबा चंद्रग्रहण, गर्भवती महिलाएं बचने के लिए कमरे में रखें ये चीज़

इस वर्ष का दूसरा व अंतिम चंद्रग्रहण 27 और व 28 जुलाई 2018 की रात में 23:56:26 से 03:48:59 बजे तक दिखाई देगा। इसकी दृश्यता भारत समेत कई देशों में होगी। इस दौरान पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार यह चंद्रग्रहण उत्तराषाढ़ा नक्षत्र तथा मकर राशि में लग रहा है। उत्तराषाढ़ा सूर्य का नक्षत्र होता है। वैसे ग्रहण चाहे आंशिक हो या पूर्ण, यह कई लोगों के लिए शुभ नहीं माना जाता। यूं तो पूर्ण चंद्र ग्रहण का असर हर राशि पर पड़ता है लेकिन गर्भवती स्त्री और उसके होने वाले बच्‍चे के लिए इसे शुभ नहीं माना जाता है और साथ ही कहा जाता है की चंद्र ग्रहण का प्रभाव 108 दिनों तक रहता है। इसलिए चंद्रग्रहण के दौरान गर्भवती महिला को कुछ सावधानियां बरतनी पड़ती है। आइए बताते हैं इससे बचने के कुछ उपाय

1. चंद्रग्रहण के दौरान गर्भवती स्त्री को घर के बाहर नहीं निलना चाहिए। उन्हें घर की दहलीज कदापि पार नहीं करनी चाहिए। घर के बाहर निकलने से इसका प्रभाव अधिक पड़ता है।

2. परिवारवालों द्वारा गर्भवती स्त्री के कमरे में गोबर से ही स्वास्तिक का निशान बना देना चाहिए। यह उन्हें किसी भी तरह की नकारात्मक ऊर्जा से दूर व बचाकर रखता है।

3. ग्रहणकाल के दौरान गर्भवती स्त्री को कोई भी चीज नहीं काटनी चाहिए और सुई धागे का प्रयोग भी नहीं करना चाहिए। ये चीजें होने वाले बच्‍चे के लिए सही नहीं मानी जातीं।

4. ग्रहण के दौरान गर्भवती स्त्री को ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चंद्रमसे नम: या ॐ सों सोमाय नम: जैसे मंत्रों का जाप करना चाहिए। ऐसा करने से ग्रहण का दुष्प्रभाव कम होता है। ये वैदिक मंत्र हैं और इनका का जाप जितनी श्रद्धा से किया जाएगा, यह उतना ही फलदायक होगा।

5. गर्भवती महिला को चंद्र ग्रहण को सीधे तौर पर नहीं देखना चाह‍िए। माना जाता है कि इससे निकलने वाली तरंगें बच्‍चे को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

वहीं चंद्र ग्रहण के दौरान कुछ बातों का अवश्य ध्यान रखना चाहिए। इस पूरे काल के दौरान जाप, मंत्रोच्चारण, पूजा-पाठ और दान तो फलदायी होता ही है लेकिन धर्म सिंधु के अनुसार ग्रहण मोक्ष के उपरांत हवन करना, स्नान, स्वर्ण दान, तुला दान, गौ दान भी श्रेयस्कर है। इस दौरान अर्जित किया गया पुण्य अक्षय होता है।

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