
छतरपुर. प्रदेश में सबसे ज्यादा अवैध उत्खनन और परिवहन के केस छतरपुर में बनाए जाते हैं। यहां सबसे ज्यादा खनिज संपदा की चोरी होती है। बेशकीमती ग्रेनाइट की खदानें भी हैं। गिट्टी और रेत में सबसे ज्यादा रॉयल्टी चोरी और अवैध रेत का कारोबार होता है। उत्तर प्रदेश से सटे होने के कारण यहां माफिया ज्यादा सक्रिय हैं। ऐसे में खनिज विभाग ने सागर संभाग के छतरपुर जिले की तीन चैकपोस्ट रामपुरघाट पुल, प्रकाशबम्होरी और बांसपहाडी पर एआई आधारित चेक पोस्ट बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। खनिज विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में पहले नंबर पर छतरपुर, दूसरे पर ग्वालियर, तीसरे पर सीहोर, चौथे पर राजगढ़ और पांचवें पर खरगोन जिला आता है। जहां सबसे ज्यादा अवैध उत्खनन और परिवहन के केस बनाए जाते हैं।
प्रदेश में 40 चेकपोस्ट बनेंगी एआई आधारित
जिन जिलों में सबसे ज्यादा खनिज संपदा की चोरी होती है उनमें एआई बेस्ड आधारित चेक पोस्ट बनाई जा रही हैं। इसमें ऐसा सिस्टम फीड किया जाएगा जो बिना रॉयल्टी के और ओवरलोड खनिज को पकड़ सकेगा। इन सभी स्थलों पर आगामी 10 माह के भीतर चेक गेट व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। राज्य स्तर पर स्टेट कमांड सेंटर और जिला स्तर पर जिला कमांड सेंटर इसकी निगरानी करेगा।
खदानों की जियो टैगिंग की जाएगी
रेत सहित समस्त खदानों की जियो टैगिंग की जा रही है। समस्त खनिज परिवहन करने वाले वाहनों को जीपीएस युक्त किया जा रहा है। चेक गेट के सॉफ्टवेयर को ईटीपी जारी करने वाले पोर्टल के साथ इंटीग्रेटेड कर बिना रॉयल्टी के परिवहन करने वाले वाहन मालिकों के खिलाफ अवैध परिवहन का प्रकरण पंजीबद्ध किया जाएगा। साथ ही खनिज परिवहन करने वाले वाहनों में आरएफ टैग लगाया जाएगा, जिसकी सहायता से वाहन की वैधता की जांच की जा सकेगी।
पुलिस सीधे नहीं कर सकेगी कार्रवाई
नए निर्देश के अनुसार खनिज के अवैध उत्खनन, भंडारण परिवहन और ओवरलोड परिवहन पाए जाने पर पुलिस अब सीधे कार्रवाई नहीं करेगी। खनिज के अवैध उत्खनन, भंडारण परिवहन और निश्चित मात्रा से अधिक परिवहन पाए जाने पर पुलिस द्धारा इसकी सूचना अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को दी जाएगी। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) पुलिस द्धारा दी गई जानकारी के आधार पर कार्रवाई करेगा।
कार्रवाई के लिए नियमों में संशोधन
नए नियमों के तहत खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन तथा भंडारण पर रोकथाम के लिए नियम 23 में प्राधिकृत अधिकारियों द्धारा ही अधिकारिता के भीतर कार्रवाई की जा सकेगी। साथ ही उनके द्धारा आवश्यक होने पर संबंधित पुलिस थाने से पुलिस सहायता की मांग की जाएगी और पुलिस अधिकारी द्धारा सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही जो अधिकारी और कर्मचारी जैसे पटवारी, सहायक उपनिरीक्षक प्राधिकृत नहीं है, उनकी सुरक्षा को देखते हुए उन्हें कार्रवाई करने का कोई अधिकार नहीं रहेगा।
इनका कहना है
जिले में दो एआई चेक पोस्ट स्वीकृति हुए हैं। बांसपहाड़ी में तीसरा चेक पोस्ट बनाने के लिए प्रस्ताव भेजा है। जिले में ज्यादा ट्रैफिक वाले तीनों स्थलों पर एआई चेक पोस्ट बनाए जाएंगे।
अमित मिश्रा, उप संचालक, खनिज
Published on:
08 Jun 2024 08:32 pm

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