
धौलपुर. शहर में लगा प्लास्टिक कचरे का ढेर।
धौलपुर. घर से लेकर बाजार और सार्वजनिक स्थलों पर प्लास्टिक कचरा अब आम हो चला है। प्लास्टिक कचरे को कम करने को लगातार जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं लेकिन इसके बावजूद प्लास्टिक कचरा जरा सा भी कम होना तो दूर यह उल्टा तेजी से बढ़ रहा है। रविवार सुबह शहरवासी नींद से जागे तो शहर की सडक़ें प्लास्टिक कचरे से अटी पड़ी दिखी। हनुमान शोभायात्रा में लगे भण्डारों में जो खाद्य सामग्री श्रद्धालुओं को परोसी वह घटिया प्लास्टिक से बने दौना, कप, प्लेट समेत अन्य सामग्री थी, जो शहर की सडक़ों जगह-जगह फैली दिखी। हालांकि, सुबह के समय नगर परिषद सफाई कर्मी कचरे को साफ करने में लगे थे लेकिन यह प्लास्टिक कचरा उठकर डंपिंग एरिया में पहुंच रहा था, जहां पर इसको लेकर कोई ठोस निस्तारण नहीं है। यह कचरा पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है और डंपिंग एरिया का हिस्सा चंबल घडिय़ाल अभयारण्य से जुड़ा है, जिसको लेकर पूर्व में अभयारण्य और नगर परिषद प्रशासन में टकराव हो चुका है। जिससे कई दिन डंपिंग एरिया में कचरा फेंकने से रोक दिया गया था। बता दें कि शहर से प्रतिदिन करीब 35 टन से अधिक कचरा उठाया जाता है। इस कार्य में करीब 325 से अधिक सफाई कर्मी, ऑटो टिपर और अन्य संसाधन लगते हैं।
सिंगल यूज प्लास्टिक बैन, फिर भी बिक रही
देश में सिंगल यूज प्लास्टिक प्रतिबंधित है लेकिन इसके बाद इसका खुलकर उपयोग हो रहा है। शहर सहित पूरे जिले में इसका धड़ल्ले से उपयोग हो रहा है। छोटे दुकानदार हो या बड़े व्यापारी सभी ग्राहकों को पॉलिथीन में ही सामग्री थमा रहे हैं। इस घटिया पॉलिथिन थैलियों का सबसे अधिक उपयोग फल, सब्जी, किराना सामान इत्यादि खरीद में है। नगर परिषद बीच-बीच में खानापूर्ति कार्रवाई करती है। अतिक्रमण के दौरान गुलाब बाग पर एक मिष्ठान भण्डार की दुकान से प्लास्टिक पॉलिथिन जब्त किया लेकिन परिषद की ओर से मुख्य सप्लाईकर्ताओं को छोड़ रखा है। जिससे समझा जा सकता है कि नगर परिषद प्रशासन कितना गंभीर है।
शहर में नाले-नालियां हो रहीं चौक
प्लास्टिक कचरे से शहर में ज्यादातर नाले व नालियां चौक हो रही हैं। वहीं, सीवरेज में घुसने से कई स्थानों पर लाइन अवरुद्ध हो रही है। सफाई कार्य के दौरान सबसे अधिक कचरा प्लास्टिक का ही निकलता है, जो बड़े नालों को बुरी तरह अवरुद्ध कर देते हैं और जलनिकासी नहीं होने से गंदा पानी सडक़ों पर बहता है। उधर, दूसरी तरफ पॉलिथिन को लावारिस जानवर खा रहे हैं, जिससे वह आकस्मिक मौत का शिकार हो रहे हैं।
देश में हर दिन 26 हजार टन प्लास्टिक कचरा
बता दें कि देश में प्लास्टिक कचरा तेजी से फैल रहा है। देश की आबादी 1.4 अरब से अधिक है और हर दिन करीब 26 हजार टन प्लास्टिक कचरा पैदा होता है। भारत में प्लास्टिक कचरे का एक बड़ा हिस्सा लैंडफिल में चला जाता है या पर्यावरण को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचा रहा है। देश में हर साल में करीब 34 लाख टन प्लास्टिक कचरा पैदा होता है। इसमें से केवल 30 प्रतिशत का ही पुनर्चक्रण किया जाता है। शेष का समाधान नहीं हो पा रहा है। हाल में दिल्ली में प्लास्टिक कचरे में आग लगने से जहरीली धुएं ने स्थानीय लोगों को जीना मुहाल कर दिया।
ये प्लास्टिक है खतरनाक
देश में 120 माइक्रोन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक बैग पर प्रतिबंध है। जबकि 75 माइक्रोन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक बैग पर पहले से ही बैन लगा हुआ है। बता दें कि 50 माइक्रोन से ज्यादा के प्लास्टिक को री-साइकिल किया जा सकता है लेकिन 50 माइक्रोन से पतले प्लास्टिक के साथ ऐसा मुमकिन नहीं है। इस वजह से पर्यावरण को नुकसान होता है।
इन बातों पर ध्यान देने की जरूरत
Published on:
29 Apr 2024 12:16 pm
बड़ी खबरें
View Allसमाचार
ट्रेंडिंग
