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धान की नई किस्मों से किसानों को ज्यादा कमाई की उम्मीद

नाळी बेल्ट में धान की पांच नई किस्मों का परीक्षण, बेहतर बीज से अधिक पैदावार की संभावना

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  • श्रीगंगानगर.श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिले के नाळी बेल्ट क्षेत्र में किसानों की आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य से धान की पांच नई किस्मों का परीक्षण किया जा रहा है। यह कार्य कृषि अनुसंधान केंद्र, श्रीगंगानगर की पहल पर किसानों की भागीदारी से किया जा रहा है। परीक्षण के तहत पंजाब कृषि विश्वविद्यालय की नई वैरायटीज़ को खेतों में उतारा गया है, ताकि बेहतर बीजों के जरिये अधिक उत्पादन और मुनाफे की संभावना का आकलन किया जा सके।
  • यह अनुसंधान विशेष रूप से उन क्षेत्रों में किया जा रहा है जहां नहरों से पानी की नियमित आपूर्ति रहती है और धान की खेती परंपरागत रूप से अधिक सफल रही है। कृषि अनुसंधान केंद्र के अधिकारियों का कहना है कि यदि किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज प्राप्त होते हैं, तो पैदावार में बढ़ोतरी संभव है और इससे उनकी आय में भी वृद्धि होगी।

यहां पर चल रहा अनुसंधान

  • कृषि अनुसंधान केंद्र ने सूरतगढ़ के नाळी बेल्ट क्षेत्र माणकसर, श्रीगंगानगर के फतूही शिवपुर हैड, हनुमानगढ़, टिब्बी और पीलीबंगा जैसे क्षेत्रों में किसानों की भागीदारी से इन नई वैरायटी का परीक्षण किया है। इन क्षेत्रों में बीज की बुवाई किसानों की भागीदारी से करवाई गई है और विशेषज्ञ इनकी गुणवत्ता, उत्पादन क्षमता और खेती के अनुकूलता का निरीक्षण कर रहे हैं।

उत्पादन में सुधार होने की उम्मीद

  • कृषि विभाग के अनुसार, इन नई धान की किस्मों को पंजाब से लाकर यहां के किसानों को उपलब्ध कराया गया है, ताकि वे नई तकनीक और वैरायटी का परीक्षण कर सकें। किसानों को इन वैरायटी के बीज की उपलब्धता से उनके उत्पादन में सुधार होने की उम्मीद है। श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिले की नाळी बेल्ट में इन दिनों करीब ८० हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में धान की खेती हो रही है। यदि इन नई किस्मों का प्रदर्शन सफल रहता है, तो निश्चित ही किसानों को अधिक पैदावार होने और मुनाफे में इजाफा होने की संभावना है।

बेहतर बीज और नई खेती तकनीकों का उपयोग

  • श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ जिले की नाळी बेल्ट में धान की पांच नई वैरायटी का परीक्षण किया जा रहा है, जो किसानों के लिए नई उम्मीद जगा रही है। बेहतर बीज और नई खेती तकनीकों का उपयोग कर किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। इस पहल से क्षेत्र के किसान नई तकनीकों से जुड़कर अपनी खेती को अधिक लाभकारी बना सकेंगे। यह नई वैरायटी किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
  • डॉ. एन.के. शर्मा, क्षेत्रीय निदेशक, कृषि अनुसंधान केंद्र, श्रीगंगानगर।
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