
छिंदवाड़ा.खरीफ सीजन में अगले 15 जून को मानसून के आगमन के साथ ही जिले की प्रमुख फसल मक्का की बोवाई शुरू हो जाएगी। इस साल मल्टी नेशनल कंपनियों ने बीजों में दाम में 20 से 40 फीसदी की वृद्धि कर दी है। सरकारी अनुदान के अभाव में देशी बीजों की आपूर्ति बंद हो गई है। ऐसे में बीज खरीदी करने बाजार पहुंच रहे किसानों के माथे पर चिंता झलक रही है।
पूरे जिले में मक्का का रकबा 3.50 लाख हैक्टेयर है। मानसून करीब आते ही किसान अपने खेतों की तैयारी के साथ खाद-बीज के इंतजाम में जुट गए हैं। ऐसे में किसानों को खाद-बीज की दुकानों में देखा जा रहा है।
किसानों के मुताबिक पिछले साल 2023 में मक्का के ब्रांडेड बीज के चार किलो का पैकेट 1250-1300 रुपए तक उपलब्ध था। इस वर्ष 2024 में यहीं बीज 400 रुपए पैकेट महंगा होकर 1700-1800 रुपए में मिल रहा है। बाजार के ये दाम सुनकर किसानों के होश उड़ रहे हैं। इससे उनकी प्रति एकड़ लागत बढ़ रही है। ग्राम झिरलिंगा के किसान नरेश ठाकुर तथा ग्राम चारगांव के रामराव चरपे ने कहा कि बीज महंगे होने से किसानों पर आर्थिक बोझ और कृषि लागत बढ़ गई है।
किसान की मांग ज्यादा, नए क्षेत्रों में भी वृद्धि
खाद-बीज दुकानदारों के अनुसार किसान इस समय मल्टी नेशनल कंपनियों के ब्रांडेड हाइब्रिड बीज मांग रहे हैं। इसके साथ ही सिवनी, बालाघाट, बैतूल, सागर के अलावा मालवा क्षेत्र के जिले तथा ग्वालियर में मक्का के रकबे में वृद्धि हुई है। इससे इन इलाकों में भी मक्का बीज की डिमांड है। इसे देखते हुए इन कंपनियों ने 400 रुपए प्रति पैकेट बीज के दाम बढ़ा दिए हैं। मक्का बीज का बाजार शत प्रतिशत निजी हाथों में हैं। सरकारी देशी बीज नहीं मिल पा रहे हैं।
अन्नपूर्णा, सूरजधारा योजना बंद से देशी बीज नहीं
कृषि अधिकारियों का कहना है कि पहले सरकार की अन्नपूर्णा और सूरजधारा योजना चलती थी। वर्ष 2019 से ये बंद पड़ी है। पहले इस योजना में सरकारी स्तर पर देशी बीज मंगाकर दे दिया जाता था। अब ऐसा नहीं हो पा रहा है। केवल निर्धारित दाम पर निजी बीज की उपलब्धता की निगरानी की जा रही है। इधर, किसान सरकार से मांग कर रहे हंै कि उन्हें कृषि विभाग की ओर से देशी बीज बुलवाकर दिए जाए।
खाद-बीज के दामों से प्रति हैक्टेयर लागत दस हजार
किसानों की दृष्टि से मक्का की प्रति हैक्टेयर लागत देखी जा जाए तो मक्का के दो पैकेट बीज 3500-3600 रुपए के लगेंगे। फिर डीएपी और यूरिया की प्रति बोरी का खर्च 2 हजार रुपए है। इसके अलावा कीटनाशक दवाइयां और मजदूरी की लागत मिला ली जाए तो दस हजार रुपए हो जाती है।
इनका कहना है…
मक्का के बीजों में 400 रुपए की मूल्यवृद्धि किसानों के लिए असहनीय है। मल्टी नेशनल कंपनियां इसका कारण दक्षिण भारत के साइक्लोन से बीज उत्पादन में कमी बता रही है। फिलहाल खेती की लागत में वृद्धि हो रही है। सरकार को इस पर चिंतन कर न्याय संगत हल निकालना चाहिए।
-मेरसिंह चौधरी, जिलाध्यक्ष भारतीय किसान संघ।
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इस समय बाजार में उपलब्ध सारे बीज मल्टी नेशनल कंपनियों के हैं। उनके निर्धारित दामों पर किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है। पिछले साल की तुलना में हर पैकेज पर मूल्य अधिक है।
-श्यामराव कपाले, सचिव खाद-बीज दुकानदार संघ।
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हमने बीज कंपनियों के प्रतिनिधियों की बैठक लेकर उन्हें निर्धारित दाम पर ही बीज किसानों को देने निर्देशित किया है। अगर कोई दुकानदार बिना पक्के बिल के अधिक दामों पर बीज बेचते पाया जाता है तो उस पर सख्त कार्यवाही की जाएगी। इसकी जांच के लिए विभागीय टीम गठित है। किसानों को भी पक्के बिल लेकर खरीदी की सलाह दी गई है।
-जितेन्द्र कुमार सिंह, उपसंचालक कृषि।
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Published on:
01 Jun 2024 04:52 pm

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