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मरीजों के लिए अच्छी खबर: बीएमसी को मिला ब्लड बैंक का लाइसेंस, 10 हजार यूनिट हो जाएगी क्षमता

सागर. बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज पहुंचने वाले संभाग के मरीजों के लिए अच्छी खबर है कि स्टेट अर्थोटी ने बीएमसी को ब्लड बैंक का लाइसेंस दे दिया है। लाइसेंस मिलने के बाद अब ब्लड बैंक की क्षमता 10 हजार यूनिट तक बढ़ाई जाएगी। मरीजों के लिए एडवांस मशीनें भी आएंगी। मरीजों के अलावा बीएमसी में यूजी-पीजी […]

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सागर

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Murari Soni

Jun 01, 2024

सागर. बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज पहुंचने वाले संभाग के मरीजों के लिए अच्छी खबर है कि स्टेट अर्थोटी ने बीएमसी को ब्लड बैंक का लाइसेंस दे दिया है। लाइसेंस मिलने के बाद अब ब्लड बैंक की क्षमता 10 हजार यूनिट तक बढ़ाई जाएगी। मरीजों के लिए एडवांस मशीनें भी आएंगी। मरीजों के अलावा बीएमसी में यूजी-पीजी सीटों की मान्यता में भी ब्लड बैंक का लाइसेंस फायदेमंद होगा।बीएमसी को शुरू हुए 14 साल चुके हैं लेकिन अभी भी ब्लड बैंक नहीं था। ब्लड बैंक न होने से मरीजों की परेशानी के साथ बीएमसी के विभिन्न कोर्स की मान्यता भी खतरे में थी।

इस संबंध में प्रबंधन ने करीब 4 साल पहले 3.50 करोड़ रुपए से ब्लड बैंक का प्रस्ताव बनाया था जो कि डीएमई कार्यालय और चिकित्सा शिक्षा मंत्री कार्यालय के चक्कर लगाता रहा। नए डीन डॉ. पीएस ठाकुर के आने के बाद ब्लड बैंक को लेकर गतिविधियां तेज हुईं और बीएमसी के अधिकारियों-कर्मचारियों का प्रयास रंग लाया और अब स्टेट अर्थोटी ने डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल के नाम से बीएमसी के लिए ब्लड बैंक का लाइसेंस जारी कर दिया।

ब्लड की क्षमता बढऩे के साथ एडवांस मशीनें भी आएंगी-

बीएमसी के ब्लड बैंक की मान्यता 2026 तक के लिए जारी की गई है। मर्जर के बाद जिला अस्पताल व बीएमसी अब एक हो रहे हैं, लिहाजा जिला अस्पताल की ब्लड बैंक में जरूरी व्यवस्थाएं की जाएंगी। ब्लड बैंक की क्षमता सालाना 5 हजार यूनिट से बढकऱ 10 हजार हो जाएगी। ऑथराइज्ड लाइसेंसी ब्लड बैंक का फायदा ये होगा कि एफेरेसिस जैसी एडवांस मशीनों के लाइसेंस भी मिल जाएंगे। जिससे डेंगू, एक्सीडेंटल केस में मरीजों की प्लेटलेट्सएकाएक बढ़ाई जा सकेंगी। इसके अलावा एमबीबीएस व एमएस-एमडी कोर्स की मान्यता में फायदा होगा।

सागर छोडकऱ नए-पुराने सभी मेडिकल कॉलेज में था ब्लड बैंक-

एनएमसी की टीम जब भी निरीक्षण के लिए आती थी तो ब्लड बैंक के विषय पर जरूर पूछती थी। क्योंकि प्रदेश के सभी पुराने मेडिकल कॉलेज में खुद की ब्लड बैंक हैं, लेकिन बीएमसी में नहीं थी। नए मेडिकल कॉलेज जैसे विदीशा, रतलाम और खंडवा में भी ब्लड बैंक की मंजूरी दी जा चुकी थी लेकिन सागर का बीएमसी ही ऐसा कॉलेज बचा था जहां ब्लड बैंक नही था।

लाइसेंसी ब्लड बैंक में दानदाताओं की संख्या बढ़ेगी-

पैथालॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमर गंगवानी ने बताया कि लाइसेंसी ब्लड बैंक में दानदाताओं के रक्तदान शिविर की संख्या भी बढ़ेगी। क्षेत्र में अभी आर्मी, निरंकारी व जैन समाज व पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह के जन्मदिन पर बड़े रक्तदान शिविर आयोजित होते हैं। स्टोरेज क्षमता कम होने के कारण ब्लड बाहर भेजना पड़ता था और बाद में जिला अस्पताल की ब्लड बैंक में ब्लड का अभाव हो जाता था।

मरीजों को राहत की उम्मीद-

बीएमसी के विभागों में हर दिन 25-30 यूनिट तो माह में करीब 500-600 यूनिट ब्लड की आवश्यकता होती है। अधिकांश ब्लड जिला अस्पताल की ब्लड बैंक से उपलब्ध होता था, लेकिन यहां हमेशा ब्लड की कमी बनी रहती है। मरीजों को निजी ब्लड बैंकों से रक्त खरीदना पड़ता था। सबसे ज्यादा ब्लड गायनी में गर्भवती महिलाओं और एक्सीडेंटल केसों में लगता है। तत्काल ब्लड न मिलने से मरीजों की जान पर बन आती है। स्टोरेज क्षमता के कारण उम्मीद है कि मरीजों को राहत रहेगी।

-ब्लड बैंक का लाइसेंस मिलने से क्षेत्र के मरीजों का फायदा होगा, इसके अलावा बीएमसी में यूपी-पीजी सीटों की मान्यता के लिए एनएमसी की गाइडलाइन पर भी हम खरे उतरेंगे। मरीजों-मेडिकल छात्रों की सुविधाओं के लिए जरूरी संसाधन जुटाने के प्रयास के तहत यह पहल हुई है। कुछ वर्षों से यह मामला लंबित था। हमारी टीम के प्रयास के बाद स्टेट अर्थोटी ने बीएमसी को लाइसेंस जारी किया है।

डॉ. पीएस ठाकुर, डीन बीएमसी।