
बीकानेर. जीवन में सफलता प्राप्ति के लिए लक्ष्य का निर्धारण और लक्ष्य की प्राप्ति के लिए जोश व जुनून का होना जरूरी होता है। कठोर मेहनत, परिश्रम और जुनून के साथ किए जाने वाले कार्य का परिणाम भी सकारात्मक रहता है। ऐसा ही कर दिखाया है बीकानेर के कई पर्यावरण और प्रकृति प्रेमियों ने।
धरती को हरा-भरा बनाना और भविष्य को सुरक्षित बनाना ही इनके जीवन का ध्येय बना हुआ है। परिवार, समाज, कार्यक्षेत्र और जीवन की अनेक मुश्किलों और संघर्षों के बावजूद ये न डिगे हैं और न ही लक्ष्य से विचलित हुए हैं। ये न केवल वर्षों से पौधरोपण कर रहे हैं, बल्कि पौधों की देखभाल बच्चों की तरह कर उनको बढ़ाने में भी जुटे हैं। इनकी ओर से लगाए गए पौधे अब घने वृक्ष व सघन वन का रूप ले चुके हैं। वर्षों से पौधरोपण व उनकी देखभाल इनके जीवन का अभिन्न अंग बना हुआ है। लोग इनके प्रकृति प्रेम से प्रेरणा भी ले रहे हैं।
पारिवारिक वानिकी को पहुंचाया घर-घर, 18 हजार गांवों तक पहुंचाया विचार, लगे 40 लाख पौधे
कॉलेज में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत व पर्यावरण प्रेमी श्याम सुंदर ज्याणी। प्राकृतिक रूप से पनपने वाली वनस्पति और पेड़-पौधे लगें। भूमि सुरक्षित रहे, इसी उद्देश्य में पिछले 20 वर्षों से जुटे हैं। डूंगर कॉलेज में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत पर्यावरण प्रेमी श्याम सुंदर ज्याणी कहते हैं...पेड़ को परिवार के सदस्य के रूप में माना जाए, उसकी देखभाल की जाए। इसके लिए पारिवारिक वानिकी के विचार को घर-घर और गांव-गांव तक पहुंचाने की कोशिश की। गांधी वन की शुरुआत की। यह विचार 18 हजार गांवों तक पहुंचाया। 40 लाख पेड़ लगे। करीब 20 लाख परिवार इससे जुड़े। भूमि संरक्षण के लिए श्याम सुंदर ज्याणी संयुक्त राष्ट्र संघ के लैण्ड फॉर लाइफ अवार्ड से भी सम्मानित हो चुके हैं। ज्याणी के प्रयासों से अब सैकड़ों स्थानों पर हजारों पेड़ लग चुके हैं। ज्याणी अपने वेतन की राशि भी इस कार्य के लिए समर्पित कर रहे हैं। जन पौधशालाएं तैयार की हैं। पौधों का वितरण कर रहे हैं। मूल रूप से रायसिंहनगर निवासी श्याम सुंदर ज्याणी किसान परिवार से हैं। ज्याणी ने पौधरोपण को व्यक्ति, घर, परिवार, समाज, पर्व, त्योहारो, सार्वजनिक स्थलों, शहर व गांवों से जोड़ा।
लक्ष्य - आमजन में प्रकृति और पर्यावरण के प्रति समझ उत्पन्न करना। मैं भी भगत सिंह अभियान के तहत युवा पीढ़ी को जागरूक करना। वर्ष 2031 तक देश में 10 करोड़ पेड़ लगाना। पारिवारिक वानिकी की सोच को बढ़ाना।
गोचर को हरा-भरा बनाना जीवन का लक्ष्य
सुजानदेसर-गंगाशहर व भीनासर क्षेत्र में गोचर की हजारों बीघा भूमि है। रेतीली मिट्टी से सराबोर यह भूमि पशुओं के लिए काम आए व पौधों, घास और हरियाली से आच्छादित रहे, इसके लिए पर्यावरण प्रेमी मिलन गहलोत वर्षों से लगे हुए हैं।गत 20 बरस में गोचर सहित मंदिरों, श्मसान परिसरों आदि में हजारों पौधे लगा चुके हैं। माता-पिता और संत-महात्माओं से मिली परोपकार की शिक्षा को जीवन में अंगीकार किए मिलन गहलोत सुबह से शाम तक पौधरोपण व उनकी देखभाल में जुटे रहते हैं। गोचर में पशुओं के लिए पर्याप्त घास हो व क्षेत्र हरा भरा हो, इसके लिए सतत प्रयासरत हैं। एसटीपी से निकला शोधित पानी, जो खुले में पड़ा रहता है, उसका उपयोग घास, पौधों के लिए कर गोचर का स्वरूप बदलने में जुटे हैं।
लक्ष्य - गोचर भूमि में पशुओं के लिए पर्याप्त घास हो। पशुओं के रहने के लिए पर्याप्त स्थान और घने पेड़ हो, पीने के लिए पानी हो। गोचर पशु,पक्षियों के लिए प्राकृतिक रूप से उपलब्ध रहे। सुरक्षित रहे, इसके लिए अधिकाधिक पौधरोपण हो, इसके लिए हर व्यक्ति गोचर से जुड़े।
बचा रहे आगोर, बनाया ऑक्सीजन हब
करमीसर रोड स्थित संसोलाव तालाब रियासतकाल से प्राचीन पारम्परिक जल स्त्रोत है। तालाब की आगोर भूमि अतिक्रमणों से मुक्त रहे और आगोर पेड़-पौधों और हरियाली से हरा भरा रहे, इसके लिए बीते दो दशकों से मदन मोहन छंगाणी जुटे हैं। मदन मोहन संसोलाव तालाब की आगोर भूमि पर आमजन और भामाशाहों के सहयोग से सैकड़ों पौधे भी लगा चुके हैं। पर्यावरण प्रेमी नत्थूजी और अपने पिता दाऊ लाल छंगाणी की प्रेरणा से मदन मोहन आगोर भूमि पर एक ऑक्सीजन हब भी बना चुके हैं। इसमें 170 से अधिक पीपल के वृक्ष हैं। संसोलाव आगोर एवं पर्यावरण संरक्षण समिति के बैनर तले मदन मोहन वर्ष 2001 से अब तक आगोर भूमि पर जन सहयोग से सघन पौधारोपण कार्य में जुटे हैं। सुबह से शाम तक पौधे लगाने व उनकी देखभाल के बाद रात्रि में परिसर की सुरक्षा का जिम्मा भी स्वयं संभाले हैं।
लक्ष्य - आगोर को अतिक्रमणों से मुक्त रखना। सघन पौधारोपण।आगोर व तालाब बचे, यही जीवन का लक्ष्य।
Published on:
09 Jul 2024 11:40 pm
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