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नसबंदी कराने पीछे हट रहे पुरुष, यह है मुख्य कारण

-जिले में २०२३-२४ में में लक्ष्य के अनुसार सिर्फ ३५ पुरुषों ने कराई नसबंदी, जबकि ७३०१ महिलाओं की रही भागीदारी। -स्वास्थ्य विभाग के पुरुषों को परिवार नियोजन कार्यक्रम में शामिल करने के प्रयास हो रहे फेल

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दमोह

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Aakash Tiwari

Jul 02, 2024

-जिले में २०२३-२४ में में लक्ष्य के अनुसार सिर्फ ३५ पुरुषों ने कराई नसबंदी, जबकि ७३०१ महिलाओं की रही भागीदारी।
-स्वास्थ्य विभाग के पुरुषों को परिवार नियोजन कार्यक्रम में शामिल करने के प्रयास हो रहे फेल
दमोह. केंद्र सरकार के परिवार नियोजन के अंतर्गत नसबंदी कार्यक्रम में पुरुषों की भागीदारी न के बराबर है। पुरुष आसान और सुरक्षित नसबंदी कराने से पीछे हट रहे हैं। जागरुकता के अभाव में उनके कदम नसबंदी कराने के लिए आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। जबकि महिलाएं पुरुषों से बहुत आगे हो चुकी हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों को देखें तो पिछले साल मिले ७३९२ के लक्ष्य को ९४ फीसदी महिलाओं ने नसबंदी कराकर पूरा किया है। जबकि इसमें पुरुषों की भागीदारी प्वाइंट १ प्रतिशत भी नहीं है। महज ३५ पुरुष ही नसबंदी कराने के लिए आगे आए हैं।
यह स्थिति तब है जबकि स्वास्थ्य विभाग परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत नसबंदी कराने पर पुरुषों के लिए ३ हजार रुपए प्रोत्साहन राशि दे रही है। बावजूद इसके पुरुष सुरक्षित व असान तरीके से की जाने वाली नसबंदी को नहीं करा रहे हैं। नसबंदी कराने वाली महिलाओं को 2000 रुपए दिए जाते हैं। इसके अलावा प्रसव के तुरंत बाद नसबंदी पर महिलाओं को 2500 रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
-३ साल में दो सौ से ज्यादा नसबंदी ऑपरेशन फेल
इधर, नसबंदी कराने के बाद भी महिलाएं गर्भवती हो रही है। फरवरी २०२१ से अब तक के आंकड़ों पर नजर डाले तो जिले भर की २०५ ऐसी महिलाएं हैं, जिन्होंने नसबंदी कराई, लेकिन उसके बाद भी वह गर्भवती हो गई। इस साल १६ नए केस सामने आए हैं। पुराने मामलों में करीब ७० फीसदी पीडि़तों को शासन की ओर से मुआवजा राशि दी जा चुकी है। अन्य के सबंध मे प्रकिया जारी है।
-गर्भवती की भी कर रहे नसबंदी?
नसबंदी फेल के कुछ प्रकरण ऐसे भी हैं, जिनमें जांच के दौरान मालूम चला है कि महिला गर्भवती थी और उसी दौरान उसकी नसबंदी की गई है। सूत्रों के अनुसार इस तरह के प्रकरणों की जांच की जा रही है। इधर, चिकित्सकों का कहना है कि एक-दो महीने के गर्भ होने की बात कई बार यूरिन टेस्ट में सामने नहीं आ पाती है। इस स्थिति में नसबंदी करने पर नसबंदी के फेल के केस सामने आते हैं।
-३ साल से नहीं हुई जनगणना
हर दस साल में होने वाली जनगणना पिछले तीन साल से नहीं हुई है। वर्ष २०११ में हुई जनगणना के आंकड़ों के हिसाब से अभी सभी सरकारी योजनाएं संचालित हो रही है। जबकि २०२१ में पुन: जनगणना होना थी। लगभग तीन साल का वक्त और हो गया है। देखा जाए तो बीते १४ वर्षों में जिले की आबादी १५ लाख के पार पहुंच चुकी है, जबकि २०११ में जिले की आबादी १३ लाख के आसपास थी।

नसबंदी फेल के दो मामलों पर एक नजर
केस-१
हटा के आजाद वाड निवासी वर्षा पत्नी राम प्रसाद पटेल २६ ने ३१ जनवरी २०२२ को नसबंदी कराई थी। २० फरवरी २०२४ को वह गर्भवती हो गई। नसबंदी फेल के लिए आवेदन किया है।

केस-२
हटा की ही राधा पत्नी हीरालाल अठ्या ३५ ने ४ दिसम्बर २०२१ को शिविर में नसबंदी कराई थी। २६ फरवरी २०२४ को वह गर्भवती हो गई। इस मामले में भी पीडि़त ने मुआवजे की मांग की है।

-२०२३-२४ में मिले नसबंदी लक्ष्य पर एक नजर
केंद्र नसबंदी
डीएच १०७२
तेंदूखेड़ा १०७३
बटियागढ़ ९१७
जबेरा ९३५
पथरिया ९४५
हटा ८०७
पटेरा ९५९
हिंडोरिया १०२२

-नसबंदी कराने पर यह मिलती है प्रोत्साहन राशि
पुरुष ३०००
महिला २०००

-नसबंदी फेल होने पर ३०,००० रुपए का मुआवजा।

-जनसंख्या के आंकड़े
२०११ की जनगणना में जिले की १२ लाख ७०० थी आबादी
२०२१ में अनुमानित आबादी पहुंची १५ लाख के पार।

फैक्ट फाइल
७३०१ महिला नसबंदी
३५ पुरुष नसबंदी
७९२१ लक्ष्य
९४ प्रतिशत

वर्शन
यह बात सही है कि पुरुषों की भागीदारी न के बराबर है। मेरे ख्याल से शासन को नीति में बदलाव करना चाहिए। लोगों को भी जागरुक होने की जरूरत है।

डॉ. उमेश तंतुवाय, सर्जन जिला अस्पताल