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न भीषण गर्मी का खौफ, ना लू के थपेड़ों की परवाह, सिर्फ प्यासे हलक तर करने का मकसद

जंगल में नैसर्गिक व कृत्रिम वॉटर हॉल्स को तरबतर रखने का सिर पर सवार जुनून सिरोही जिले में पशु-पक्षियों की सेवा में जुटे युवाओं के कई संगठन, भीषण गर्मी में टैंकरों से जंगल में सूखे जलाशयों में डाल रहे पानी

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सिरोही. वाडा खेड़ा वन क्षेत्र में कृत्रिम जलाशय को पानी के टैंकर से भरते जिंदगी एक मिशन संस्था के युवा।

महेन्द्र वाघेला

सिरोही. चिलचिलाती धूप और आसमान से बरसती आग में इंसानों के साथ ही वन्यजीवों व आसमां में उन्मुक्त विचरण करने वाले परिंदों के भी हाल बेहाल हैं। सिरोही से सटे वाडाखेडा वन क्षेत्र, मांडवा जोड़, अरावली पर्वत शृंखला की पहाडियों, माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य आदि में अधिकतर प्राकृतिक वॉटर हॉल्स सूख चुके हैं। वन विभाग व भामाशाहों ने कृत्रिम वॉटर हॉल्स तो खूब बनवाए हैं, पर वे भी सूखे पड़े हैं। ऐसे में पशु-पक्षियों की सेवा में जुटे कई युवाओं ने प्राकृतिक व कृत्रिम वॉटर हॉल्स को पानी से सरसब्ज करने का बीड़ा उठाया है। समूचे सिरोही जिले में युवाओं के कई संगठन इस नेक कार्य में जुटे हुए हैं, जो कई बार स्वयं के पैसों से, तो कई बार भामाशाहों के सहयोग से इन प्राकृतिक व कृत्रिम वॉटर हॉल्स, जलाशयों व नाडियों आदि में नियमित रूप से टैंकरों से पानी डलवा रहे हैं, ताकि भीषण गर्मी में पशु-पक्षी अपने कंठ तक कर सकें। उनका मकसद वन्य जीवों को बचाना हैं। इनसे प्रेरित होकर अन्य लोग भी आगे आने लगे हैं। पेश है एक रिपोर्ट-

घरों के आगे लगा रहे परिंडे और जलकुंडियां

शहरों व गांवों में कई लोग पक्षियों के लिए जगह-जगह परिंडे और मवेशी व श्वानों के लिए कुंडियां भी लगवा रहे हैं। इनमें रोजाना पानी भरने के लिए आसपास के लोगों को जागरूक कर जिमेदारी सौंप रहे हैं। ताकि, बेसहारा पशु-पक्षी अपनी प्यास बुझा सकें। गांवों व शहरों में कई लोगों ने अपने घरों के आगे ही परिंडे और जलकुंडियां लगा रखी है। जिन लोगों के पास कुंडियों की व्यवस्था नहीं है, वे घरों के आगे छांव में तगारियों में पानी भरकर रख रहे है, जिससे पशु-पक्षियों को खासी राहत मिल रही हैं।

अलग-अलग तरीके से कर रहे सेवा

युवाओं व भामाशाहों के साथ पर्यावरण प्रेमी व वन्यजीव प्रेमी भी अपने ढंग से इस पुनीत कार्य में सहभागी बन रहे हैं। उनका मानना है कि पर्यावरण और वन्यजीव एक ही सिक्के के दो पहलू है। अत: दोनों की सुरक्षा आवश्यक है। पेशेवर लोग भी इसमें सहभागी बन रहे हैं। वे भी चाहते हैं कि जंगलों के साथ वन्यजीव व पशु-पक्षी भी आबाद रहे।

सोशल मीडिया से कर रहे जागरूक

युवा पशु-पक्षियों को बचाने के लिए जो कवायद कर रहे हैं, उसे सोशल मीडिया पर भी शेयर कर रहे हैं। ताकि अन्य लोग भी जागरूक हों। इससे खास तौर पर महिलाएं भी जागरूक होकर अपने घरों के आगे पानी की तगारियां रख रही हैं।

टैंकरों से भर रहे कृत्रिम नाड़ी

सिरोही के निकट वाडा खेड़ा वन क्षेत्र में हजारों की संया में पशु-पक्षी निवास करते हैं। इस भीषण गर्मी में वहां के जलाशय सूख गए हैं। ऐसे में जिंदगी एक मिशन संस्था से जुड़े शहर के युवा नियमित रूप से टैंकरों से जलाशयों में पानी डाल रहे हैं। ताकि वन्य जीव व पक्षी अपना हलक तर कर सकें। संस्था अध्यक्ष रिक्षित सिंह ने बताया कि वर्तमान में पड रही भीषण गर्मी में वन क्षेत्र में पशु-पक्षियों के लिए वाडाखेडा में बनाई कृत्रिम नाडी को प्रतिदिन सुबह व शाम को एक-एक टैंकर से भरा जा रहा है। यह कार्य मानसून की बारिश आने तक निरंतर जारी रहेगा। यह कार्य संस्था से जुडे सदस्य व भामाशाहों के सहयोग से कर रहे हैं।

2000 जल कुंडियों का वितरण

मानव आकांक्षा अधिकार अभियान, मां चेरिटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन जगदीश पुरोहित नून ने धूप में बेसहारा गौवंश, पशु-पक्षी, श्वान, बिल्ली सहित अन्य जीवों को सहजता से जल उपलब्ध कराने के लिए सिरोही व आस-पास के 50 से 60 गांवों में 2000 जल-कुंडी उपलब्ध कराई हैं। जल कुंडी का वितरण सिरोही शहर सहित नून, फुंगनी, निबोडा, जैल, तंवरी, फासरीया, चडुआल, मेर-मांडवाड़ा सहित करीब 60 गांवों में किया जा रहा है।

वन क्षेत्र में नाड़ियों को भरने का लिया संकल्प

शहर के कुछ युवाओं ने मिलकर पहल ग्रुप बनाया। जिसके तहत भीषण गर्मी में पशु-पक्षियों को राहत देने के लिए शहर के निकट वन क्षेत्र में सूखे जलाशयों को प्रतिदिन पानी के टैंकरों से भरने का नेक कार्य कर रहे हैं। ग्रुप के संस्थापक सचेन्द्र रत्नु ने बताया कि ग्रुप के सभी सदस्य मिलकर इसमें सहयोग कर रहे हैं। शहर में आमजन व राहगीरों के लिए नींबू पानी व छाछ की भी समय-समय पर व्यवस्था करते हैं।

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