
भोपाल में मुख्यमंत्री व प्रदेश अध्यक्ष के समक्ष मौजूद छिंदवाड़ा सांसद व अन्य।
नगर निगम अध्यक्ष सोनू मागो के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर भाजपा के सात पार्षदों की क्रॉस वोटिंग से सियासत फिर गरमा गई है। संगठन के बुलावे पर भाजपा पार्षदों का एक दल सोमवार को सांसद बंटी साहू के नेतृत्व में भोपाल पहुंचा और प्रभारी मंत्री राकेश सिंह, सीएम डॉ.मोहन यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा समेत संगठन के पदाधिकारियों से भेंट की। इस दौरान हुई बातचीत में संगठन के नेता छिंदवाड़ा में हुई भाजपा पार्षदों की फूट पर नाराज दिखाई दिए। हर कोई ये जानना चाह रहा था कि आखिर कैसे सात पार्षद कांग्रेस के खेेमे में वोट करने चले गए।
उल्लेखनीय है कि आठ अक्टूबर को निगम अध्यक्ष के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव भाजपा पार्षदों की आपसी फूट के चलते औंधे मुंह गिर गया। प्रदेश संगठन मंत्री भगवान दास सबनानी की उपस्थिति में हुए इस घटनाक्रम से संगठन की प्रतिष्ठा को धक्का लगा। इसकी रिपोर्ट सबनानी तुरंत तो भोपाल ले गए। फिर भी कहीं न कहीं ये मामला अंदरूनी रूप से पकता रहा। आखिर भाजपा पार्षदों को बातचीत के लिए भोपाल बुलाया गया। तब सांसद बंटी साहू के साथ भाजपा पार्षद विजय पाण्डेय, बंटी उइके समेत अन्य पार्षदों का दल पहुंचा। दिन भर लोग और पार्टी कार्यकर्ता इसकी टोह लेते रहे।
पता चला है कि कुछ पार्षदों ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा को इस घटनाक्रम के जिम्मेदार नेताओं के नाम बताए। इस दौरान कुछ पार्षदों को विश्वासघात करने वाला बता दिया। ये पार्षद कौन हैं, इस बारे में सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है। यह जरूर है कि इसकी शिकायत की गई है। इधर, कुछ पार्षद भोपाल के मीडिया को ये बताते रहे कि सीएम से मिलने विकास कार्य की राशि लेने आए हैं। जबकि मूल मुद्दा अविश्वास प्रस्ताव का दर्द ही था, जिसे बताने ये पार्षद बेताब थे। सांसद बंटी विवेक साहू से पत्रिका ने सवाल पूछा कि मुलाकात में क्या-क्या हुआ तो उन्होंने कहा कि सामान्य मुलाकात रही। कोई खास बात नहीं। बस बहुत दिनों से प्रदेश अध्यक्ष से मिला नहीं था तो मिलने चला आया।
नगर निगम में इस समय भाजपा के पास 34 भाजपा पार्षदों का दल हैं। इनमें से केवल आठ-दस पार्षद और महापौर विक्रम अहके सीएम डॉ.मोहन यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा के साथ मिलते दिख रहे हैं। जबकि बहुत से पार्षद छिंदवाड़ा में ही दिखाई दिए। उनका कहना था कि उन्हें भोपाल जाने की सूचना नहीं दी गई। कुछ चहेते पार्षदों को ही बुलाया गया।
संगठन के नेताओं की नाराजगी यह दिखी कि लोकसभा चुनाव में उन्होंने स्थानीय गुटों में समन्वय बैठाया और मेहनत कर भाजपा का सांसद निर्वाचित कराया। फिर निगम अध्यक्ष के अविश्वास प्रस्ताव जैसे छोटी वोटिंग में उनके संगठन के पार्षद निजी स्वार्थ के चलते आपस में बिखर गए। कमलनाथ के गृह जिले में कांग्रेस पुनर्जीवित होती दिखी।
बताते हैं कि जिस दिन अविश्वास प्रस्ताव गिरा था, उस समय कुछ भाजपा पार्षदों को भाजपा कार्यालय में संगठन मंत्री सबनानी के सामने बुलाया गया था। इस दौरान भी एक-दूसरे की शिकवा शिकायतें हुई थीं। तब कुछ महिला पार्षदों ने पति समेत अपने परिवार की कसम खा ली थी कि उन्होंने भाजपा के पक्ष में ही वोट किया है। इस दौरान भी काफी गरमागरमी हुई थी। ये सभी रिपोर्ट सबनानी भोपाल ले गए थे।
इनका कहना है
मैं भोपाल नहीं गया। छिंदवाड़ा में सदस्यता अभियान देखता रहा। अविश्वास प्रस्ताव के मामले में संगठन से जितने दिशा-निर्देश आएंगे, उनका पालन कराया जाएगा।
-शेषराव यादव, जिलाध्यक्ष भाजपा
Published on:
15 Oct 2024 05:37 pm
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