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आकस्मिक मृत्यु से बचाने से लेकर जीवन में सफलता और समृद्धि भी दिलाता है ये रूद्राक्ष, भोलेनाथ का भी है बेहद प्रिय

यहां हम बात करेंगे पांच मुखी रुद्राक्ष के बारे में। जिसे भगवान शिव का भी सबसे ज्यादा प्रिय माना जाता है। जानिए 5 मुखी रुद्राक्ष को धारण करने की विधि और इससे मिलने वाले फायदे।

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आकस्मिक मृत्यु से बचाने से लेकर जीवन में सफलता और समृद्धि भी दिलाता है ये रूद्राक्ष, भोलेनाथ का भी है बेहद प्रिय

Rudraksha Ki Mala: रुद्राक्ष कुल कितने प्रकार के होते हैं इस बारे में विशेषज्ञों की अलग-अलग राय है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि रुद्राक्ष 14 मुखी होते हैं तो वहीं शिव महापुराण के अनुसार रुद्राक्ष 38 मुखी तक होते हैं। हालांकि आमतौर पर रुद्राक्ष 21 मुखी तक देखने को मिलते हैं। कहते हैं हर रुद्राक्ष का अपना अलग महत्व होता है। यहां हम बात करेंगे पांच मुखी रुद्राक्ष के बारे में। जिसे भगवान शिव का भी सबसे ज्यादा प्रिय माना जाता है। जानिए 5 मुखी रुद्राक्ष को धारण करने की विधि और इससे मिलने वाले फायदे।

5 मुखी रुद्राक्ष: ये रुद्राक्ष जीवन में समृद्धि और सफलता का प्रतीक माना जाता है। ये भगवान शिव के काल अग्नि रुप द्वारा शासित होता है। इसे धारण करने से आस-पास की नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है। इस रुद्राक्ष का अधिपति ग्रह बृहस्पति माना जाता है। ज्योतिष में ये ग्रह सबसे शुभ माना जाता है। कुंडली में इस ग्रह की मजबूत स्थिति जीवन के सभी क्षेत्रों में अनगिनत लाभ दिलाने का काम करती है। 5 मुखी रुद्राक्ष को बृहस्पति के बुरे प्रभाव को ठीक करने के लिए भी उत्तम माना जाता है।

-ये रुद्राक्ष व्यक्ति को असमय मृत्यु से बचाता है।
-इसे धारण करने से व्यक्ति निडर और साहसी बनता है।
-बृहस्पति के क्रूप प्रभाव को कम करता है।
-स्वास्थ्य अच्छा करता है।
-मन को शांत रखता है।
-नींद की समस्या से मुक्ति दिलाता है।
-व्यक्ति को बुद्धिमान बनाता है।
-बच्चों का मन पढ़ाई में लगाने में मदद करता है।
-पांच मुखी रुद्राक्ष पहनने से एकाग्रता और याददाश्त अच्छी होती है।

-पांच मुखी रुद्राक्ष को सोने या चाँदी की माला में मढ़वा कर या फिर आप चाहें तो इसे बिना
मढ़वाएं भी धारण कर सकते हैं।
-इसे काले या लाल धागे में भी पहना जा सकता है।
-इसे धारण करने से पहले इसे गंगाजल या कच्चे दूध में शुद्ध करने के लिए जरूर डाल दें।
-ऐसा करने के बाद धूप, दीप जलाकर भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करें।
-फिर ‘ॐ ह्रीं नम:’ मंत्र का 108 बार जाप करें।
-इसे गुरुवार के दिन पुनर्वसु, विशाखा, पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में धारण करें।
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