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हमलापुर में पाइप लाइन लीकेज बना नगर पालिका के लिए सिरदर्द, तीन दिन से बंद पेयजल सप्लाई

-दस फीट खुदाई के बाद भी सुधार शुरू नहीं, वॉल्व टूटने से बिगड़ी स्थिति, 4-5 वार्डों के नागरिक परेशान। बैतूल। हमलापुर क्षेत्र में पेयजल पाइप लाइन के लीकेज को सुधारने में जुटा नगरपालिका का अमला बीते तीन दिनों से लगातार प्रयास कर रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस सफलता हाथ नहीं लगी है। पाइप […]

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-दस फीट खुदाई के बाद भी सुधार शुरू नहीं, वॉल्व टूटने से बिगड़ी स्थिति, 4-5 वार्डों के नागरिक परेशान।

बैतूल। हमलापुर क्षेत्र में पेयजल पाइप लाइन के लीकेज को सुधारने में जुटा नगरपालिका का अमला बीते तीन दिनों से लगातार प्रयास कर रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस सफलता हाथ नहीं लगी है। पाइप लाइन लीकेज के कारण हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि सुधार कार्य शुरू करना भी नगरपालिका के लिए चुनौती बन गया है। खुदाई के दौरान गड्ढें में लगातार पानी भरने से मरम्मत का काम बार-बार बाधित हो रहा है।
जानकारी के अनुसार, हमलापुर की पेयजल टंकी से जुड़ी पाइप लाइन काफी गहराई में दबी हुई है। इसी कारण पोकलेन मशीन की मदद से लगभग आठ से दस फीट तक खुदाई कराई गई, इसके बावजूद पाइप लाइन के सुधार के लिए पर्याप्त जगह नहीं बन पाई। खुदाई के दौरान गड्ढें में पानी भर जाने से कर्मचारी वॉल्व लगाने या लीकेज सुधारने का काम नहीं कर पा रहे हैं।
स्थिति तब और गंभीर हो गई, जब प्रारंभिक मरम्मत के दौरान पाइप लाइन का वॉल्व टूट गया। इसके बाद पानी का रिसाव बढ़ गया और पूरा गड्ढा पानी से भर गया। हैरानी की बात यह है कि सप्लाई बंद होने के बावजूद पाइप लाइन में लगातार पानी आ रहा है। यह पानी कहां से आ रहा है, इसका स्पष्ट पता नगरपालिका अमले को भी नहीं चल पा रहा है। बार-बार पानी निकालने के बावजूद कुछ ही देर में गड्ढा फिर भर जा रहा है, जिससे काम जस का तस बना हुआ है। पाइप लाइन का सुधार नहीं होने से हमलापुर की पानी की टंकी पिछले दो दिनों से नहीं भरी जा सकी है। इसका सीधा असर क्षेत्र के चार से पांच वार्डों में रहने वाले नागरिकों पर पड़ रहा है, जहां पूरी तरह से पेयजल सप्लाई ठप हो गई है। लोगों को पानी के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और घरेलू जरूरतें प्रभावित हो रही हैं। नगरपालिका द्वारा रात्रि में भी कार्य कराए जाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि समस्या जस की तस बनी हुई है। यदि अगले एक-दो दिन में भी पाइप लाइन का सुधार नहीं हो पाया, तो प्रभावित वार्डों में टैंकरों के माध्यम से पेयजल वितरण करना मजबूरी बन सकता है। कुल मिलाकर, यह मामला नगरपालिका की तैयारी और वैकल्पिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है, जिसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।