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Review meeting: तामिया में जनजातीय संस्कृति संरक्षण केंद्र की होगी स्थापना

- पिछड़ी जनजातियों को योजनाओं से वंचित करने पर होगी कार्रवाई : डॉ. विजय शाह

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Review meeting

जनजातीय कार्य एवं भोपाल गैस त्रासदी राहत मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान की समीक्षा की। इस दौरान छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, बालाघाट और सिवनी के अधिकारियों को योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए।
मंत्री डॉ. शाह ने कहा कि किसी भी विशेष पिछड़ी जनजातीय समूह के हितग्राही को चिन्हांकित नौ विभागों की योजनाओं से वंचित न रखा जाए। उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ प्रत्येक जनजातीय किसान तक पहुंचाने की बात कही। पात्र हितग्राहियों को छूटने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। डॉ. शाह ने विशेष पिछड़ी जनजातियों के योग्य युवाओं और ग्रामीणों को शासकीय नौकरी में सीधी भर्ती का लाभ देने के प्रयास तेज करने के निर्देश दिए। मंत्री ने जनजातीय संस्कृति के संरक्षण के लिए तामिया में एक संस्कृति संरक्षण केंद्र खोलने की मंशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में सडक़ों का निर्माण प्राथमिकता से किया जाए। सडक़ों की गुणवत्ता और गति सुनिश्चित की जाए।

छात्रावासों में रात रुककर जांच करेंगे अधिकारी

जनजातीय कार्य मंत्री ने जिले के छात्रावासों में लगातार छात्र-छात्राओं के आत्महत्या करने के मामले सामने आने पर कहा कि ऐसे मामलों के लिए पूरे प्रदेश में जल्द महिला और पुरुष अधिकारी छात्रावासों में रुककर जांच करेंगे। इसके बाद रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को देंगे। उन सुझावों को लागू करेंगे। जनजातीय कार्य मंत्री ने बादल भोई आदिवासी संग्रहालय के दौरे के दौरान ऑडिटोरियम का भी निरीक्षण किया। इसे सर्व सुविधायुक्त और बहुपयोगी बनाने के लिए 20 लाख रुपए की राशि स्वीकृत करने की घोषणा की।

वर्ष 2007 में आया था तो 14 छात्रावास दिए

वर्ष 2007 में आया था तो 14 छात्रावास दिएजनजातीय कार्य मंत्री ने कहा कि पहले आम ग्रामीणों के आवास की लागत 1.20 लाख रुपए थी। पीएम जन गण मन योजना में आदिवासियों को हर मकान की लागत दो लाख रुपए तय की गई है। अब सरकार आदिवासियों की सीधी नौकरी का इंतजाम कर रहे हैं। वे हर शुक्रवार को विभागीय टीम संभाग स्तर पर बैठक करेंगे। उन्होंने बताया कि वर्ष 2007-08 में पातालकोट के स्कूलों के निरीक्षण में भारिया आदिवासियों ने खान-पान की समस्या बताई थी। उस समय 14 छात्रावास मंजूर किए थे।