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वित्त विभाग,जनकार्य सहित अन्य अफसरों की गलत प्लानिंग से निगम में बना वित्तीय संकट

नगर निगम खुद गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहा है, लेकिन अफसरों ने हकीकत से आंखें मूंदकर शहर में सडक़, पार्क, पीएचई और अन्य विकास कार्यों के टेंडर लगाने की होड़ मचा दी है। खजाना खाली है, कर्मचारियों को समय पर वेतन तक नहीं मिल पा रहा, पेंशन अटकी है, ठेकेदारों के भुगतान लटके पड़े […]

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nagar nigam road

ट्रांसपोर्ट नगर की जर्जर रोड, जहां वर्कऑर्डर के बाद भी ठेकेदार ने कार्य शुरू नहीं किया है।

नगर निगम खुद गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहा है, लेकिन अफसरों ने हकीकत से आंखें मूंदकर शहर में सडक़, पार्क, पीएचई और अन्य विकास कार्यों के टेंडर लगाने की होड़ मचा दी है। खजाना खाली है, कर्मचारियों को समय पर वेतन तक नहीं मिल पा रहा, पेंशन अटकी है, ठेकेदारों के भुगतान लटके पड़े हैं फिर भी पब्लिक को विकास दिखाने के लिए करोड़ों की योजना पर कागजी दौड़ जारी है। वित्त विभाग, पीआईयू, जनकार्य विभाग और अन्य शाखाओं की गलत प्लानिंग और गैर-जिम्मेदार फैसलों ने निगम को इस हालात तक पहुंचा दिया है। चारों विधानसभा क्षेत्रों में सडक़े बदहाल हैं, लेकिन प्राथमिकता सुधार की जगह सिर्फ टेंडर जारी करने तक सीमित रह गई है।

ये लगाए गए टेंडर
वार्ड 37 लक्ष्मीगंज मुक्तिधाम-6.76 लाख
वार्ड 48 सीसी रोड-8.63 लाख
वार्ड 50 माधौगंज चौराहा-6.54 लाख
वार्ड 55 सीसी रोड व नाली-11.36 लाख
वार्ड 55 गुडागुड़ी का नाका रोड -12.57 लाख
वार्ड 46 महाडिक की गोठ-14.94 लाख
वार्ड 55 शिव कॉलोनी -12.48 लाख
वार्ड 51 आपागंज-17.72 लाख
वार्ड 48 सीसी रोड-11.95 लाख

नियमों को ठेंगा, मनमाने भुगतान
निगम परिषद,एमआईसी व पार्षद आज निगम में बने वित्तीय संकट के लिए अपर आयुक्त रजनी शुक्ला, वित्त विभाग व अन्य विभाग के अफसरों को जिम्मेदार मानते है। उनका कहना है कि वित्त विभाग ने नियमों को दरकिनार कर मनमाने तरीके से ठेकेदारों का भुगतान कर रही हैं। जबकि वित्तीय नियमों के अनुसार भुगतान प्राथमिकता और उपलब्ध बजट के हिसाब से होना चाहिए, लेकिन यहां नियम सिर्फ फाइलों तक सिमटकर रह गए हैं।

कर्मचारियों की हालत बदतर
निगमकर्मी को बीते एक साल से समय पर सैलरी नहीं मिल पा रही है, कई कर्मचारी को पेंशन भी नहीं मिल रहा है। वहीं जिन कर्मचारियों के 100 रुपए काटा जा रहा था वह भी उन्हें नहीं मिल रहा है। कई विभागों में ठेकेदारों के भुगतान लटके पड़े हुए है।

संपत्तिकर,राजस्व व स्वास्थ्य विभाग में खुला खेल
राजस्व और संपत्तिकर विभाग में पदस्थ टीसी आज भी मनमाने तरीके से वसूली कर रहे हैं। वह जहां से वसूली करना चाहिए वहां ध्यान ही नहीं दे रहे है। यही हाल राजस्व व स्वास्थ्य विभाग का है। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी द्वारा जुर्माना तो लगाया जाता है, रसीदें कट्टे में दबा दी जाती हैं और राशि निगम खाते में जमा भी नहीं हो रही है। ऐसे में निगम लगातार घाटे में जा रहा है। हालांकि आयुक्त ने वसूली नहीं करने पर करीब 15 टीसी व एपीटिओ के वेतन रोक दिए है।

आखिर किस कार्य के है टेंडर
जब कर्मचारियों का पेट खाली, ठेकेदार परेशान और शहर की सडक़े जर्जर हैं तो आखिर ये टेंडर किसके फायदे के लिए लगाए जा रहे हैं। क्या नगर निगम को विकास नहीं, सिर्फ दिखावे की राजनीति करनी है।