
तमिलनाडु में रजतपट और राजनीतिक कुर्सी के बीच दशकों पुराना संबंध रहा है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के अभिनेता पुत्र उदयनिधि स्टालिन के पहली बार विधायक और बाद में मंत्री पद की शपथ लेने के साथ यह रिश्ता फिर ताजा हुआ।
अब इस संबंध को अभिनेता विजय फिर आसमान देने की कोशिश में जुट गए हैं, जिनकी नजर 2026 के विधानसभा चुनाव पर है। हालांकि राजनीतिक सफर की उनकी शुरुआत ही विवाद भरी रही है, जो तमिलग वेट्री कझगम (टीवीके) के पताका में उकेरे हाथी के चिन्ह की वजह से हैं।
विजय से पहले एमजी रामचंद्रन, जे. जयललिता, शरथ कुमार और ‘कैप्टन’ विजयकांत जैसे सितारों ने राजनीतिक क्षेत्र में अपनी धाक कायम की। इस कड़ी में कमल हासन पिछड़ गए, जो अब डीएमके के सहारे हाथ-पैर मार रहे हैं।
इन लोगों की सफलता से ही विजय को बल मिला है और वे अपनी किस्मत आजमाने के लिए कमर कस चुके हैं। उनका फैन बेस बहुत बड़ा है। अभिनेता के विजय मक्कल इयक्कम ने 2021 में 169 स्थानीय निकाय सीटों पर चुनाव लड़कर 115 सीटें जीतकर उनका हौसला बढ़ा दिया था। इसी हौसले से विजय ने टीवीके लॉन्च कर दी।
प्रशंसकों की इच्छाओं के अनुरूप अभिनेता विजय ने फरवरी 2024 में टीवीके लॉन्च की, लेकिन लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा। 22 अगस्त को पनयूर में पार्टी के मुख्यालय में झंडे और गान का अनावरण किया। यह झंडा उनके लिए पहली चुनौती बन गया, जिस पर बहुजन समाज पार्टी ने आपत्ति जताते हुए भारत निर्वाचन आयोग से शिकायत तक कर दी है। खैर, अब ओखली में सिर दे ही दिया तो मूसल से क्या घबराना? यहां डीएमडीके संस्थापक विजयकांत का हवाला देना जरूरी है, जिनको राजनीति में प्रवेश के साथ ही कोयम्बेडु स्थित पार्टी मुख्यालय का एक हिस्सा ‘विकास परियोजना’ के नाम पर गंवाना पड़ा था। विजय उर्फ जोसफ विजय को संभवत: आने वाले दिनों में ऐसी कई अग्निपरीक्षा देनी पड़ सकती है।
राजनीतिक एंट्री के साथ ही ‘थलपति’ विजय ने फिल्मों से संन्यास की घोषणा कर दी है, जबकि उनकी बहुप्रतीक्षित साइंस-फिक्शन थ्रिलर, ग्रेटेस्ट ऑफ ऑल टाइम्स (गॉट) 5 सितंबर को वैश्विक रिलीज के लिए तैयार है। राजनीतिक प्रेक्षकों को संदेह है कि विजय, एमजीआर जैसा जलवा बिखेर पाएंगे। वे कहते हैं कि विजय प्रशंसकों की वजह से राजनीति में आए हैं, लेकिन क्या वे वोट तोड़कर अपने लिए बहुमत जुटा सकेंगे, इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। बड़ा प्रश्न यह भी है कि उनका जो फैन बेस है और जो न्यूट्रल वोटर्स हैं, क्या उनके लिए वोटों में तब्दील होंगे? दूसरा यह कि एमजीआर और विजयकांत से उनकी तुलना नहीं की जा सकती, वह दौर अलग था। देखा जाए तो विजयकांत भी आंशिक रूप से ही सफल रहे। उनके समकालीन सुपरस्टार रजनीकांत ने तो उम्मीद जगाकर, स्वास्थ्य कारणों से यू टर्न ले लिया।
सिद्धांतों की सीढ़ी
अन्नाद्रमुक, भाजपा व एनटीके ने विजय का स्वागत तो किया है कि लेकिन प्रश्न भी पूछे हैं कि टीवीके की क्या नीति रहेगी, इसे जाने बिना कुछ भी टिप्पणी करना ठीक नहीं होगा। माना जा रहा है कि कमर्शियल इंटरेस्ट की वजह से विजय फिलहाल चुप हैं और गॉट की रिलीज के बाद बात रखेंगे। वे नीट का विरोध दर्ज करा चुके हैं तो बसपा नेता के. आर्मस्ट्रांग की विधवा पोरकोड़ी को निजी रूप से हिम्मत भी बंधाई। पार्टी की ओर से सामाजिक सेवा और कल्याण के कार्य भी कर रहे हैं।
Published on:
29 Aug 2024 04:00 pm
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