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मानसून के आने से राज्य में घटी बिजली की मांग

20,000 मेगावाट के पार पहुंच गई थी मांग

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EB

चेन्नई. दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन के कारण तमिलनाडु में बिजली की मांग में गिरावट आई है। तमिलनाडु जनरेशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन (टैंजेडको) को इसके जून तक जारी रहने की उम्मीद है। टैंजेडको के राज्य लोड डिस्पैच सेंटर से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक 5 जून को सुबह 7.40 बजे सुबह की अधिकतम बिजली की मांग 15671 मेगावाट थी। 2 मई को यह मांग 20830 मेगावाट थी। गौरतलब है कि मात्र 33 दिनों में 5149 मेगावाट की कमी आई है।

चेन्नई में नहीं पड़ा कोई विशेष अंतर
उत्तरी तमिलनाडु में बिजली की मांग पर प्रकाश डालते हुए एक अन्य अधिकारी ने कहा कि तापमान में विशेष गिरावट नहीं आने से चेन्नई में बिजली की उच्च मांग बनी हुई है। वर्तमान में शहर की बिजली की खपत इसकी बड़ी आबादी और बढ़ते वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के कारण 90 से 100 मिलियन यूनिट (एमयू) के बीच है।

टैंजेडको के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बिजली उपयोगिता के पास घरेलू, वाणिज्यिक, कृषि और औद्योगिक उपयोगकर्ताओं सहित 3.5 करोड़ उपभोक्ता हैं। मार्च से मई के गर्मियों के महीनों के दौरान, बिजली की मांग और खपत चरम पर पहुंच गई थी। दरअसल तमिलनाडु की बिजली की मांग इस गर्मी में पहली बार 20,000 मेगावाट के आंकड़े को पार कर गई। प्रमुख बांधों में पानी की कमी की वजह से सूखे की संभावना को देखते हुए कई किसानों के खेती नहीं करने से वर्तमान में डेल्टा जिलों में कृषि के लिए बिजली की मांग में कमी आई है। आमतौर पर मानसून के दौरान बिजली का भार 50 प्रतिशत कम हो जाता है।

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