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विभागों में छह-छह माह से अधिकारियों की पोस्टिंग नहीं, प्रभारियों के भरोसे काम-काज

एक ओर प्रदेश में डबल इंजन की सरकार के दावे की जा रही है वहीं दूसरी ओर जिले के कई विभागों में पूर्णकालिक अधिकारियों की पोस्टिंग नहीं हो पा रही है। ऐसे में कई महत्वपूर्ण विभाग प्रभारी अधिकारियों के बदौलत संचालित हो रहा है। ऐसे में विभागों का काम जैसे-तैसे संचालित हो रहा है। कई विभागों में तो महत्वपूर्ण काम सालों से पेंडिंग है। जो केवल पूर्णकालिक अधिकारियों के साइन से संभव हो पाता है।

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विडंबना यह है कि सप्ताह के फाइव डे वर्किंग पीरियड में दो दिन तो टीएल सहित अन्य मीटिंग में कलेक्टोरेट में ही बीत जाता है। शेष बचे तीन दिन में खुद के विभाग का काम काज निपटाना होता है। फिर क्षेत्र में लगे शिविर का दौरा भी करना होता है। वहीं अन्य कार्यों की मॉनिटरिंग भी करनी होती है।

एक दो घंटों में निपटानी होती है पेंडेंसी

जिन विभाग प्रमुखों की कुर्सी खाली होती है उनके स्थान पर प्रभार पर चल रहे अधिकारियों का काम काज का दायरा बढ़ जाता है। ऐसे में वे प्रभारी विभाग के दफ्तरों की फाइल के निपटारे के लिए एक दो घंटे ही समय दे पातीं हैं। क्योंकि ऐसे अधिकारियों को अपने मूल पद के दायित्वों का भी निर्वहन करना पड़ता है। इसके चलते अतिरिक्त प्रभार वाले आफिसों के लिए एक दो घंटे ही समय दे पाते हैं। बड़ी बात यह है कि ऐसे अधिकारियों के मत्थे दर्जनों काम होता है। इसके चलते प्रभार वाले काम को दूसरे क्रम में प्रियारिटी देते हैं। वहीं सप्ताह में एक दो दिन ही समय दे पाते हैं। ऐसे में उक्त विभाग की फाइल पेंडिंग रहती है।

एसडीएम आफिस

जांजगीर का एसडीएम आफिस बीते एक साल से प्रभारी के भरोसे संचालित हो रहा है। साल भर पहले ज्ञानेंद्र सिंह ठाकुर एसडीएम थे। उन्हें कलेक्टोरेट में डिप्टी कलेक्टर बनाकर पदस्थ किया गया है। उनके स्थान पर लवीना पांडेय को प्रभारी एसडीएम बनाया गया था। अब उनका भी स्थानांतरण अन्यत्र हो चुका है। उनके स्थान पर अब ममता यादव को जांजगीर एसडीएम बनाया गया है। सप्ताह भर बाद मंगलवार को जब वे एसडीएम आफिस के चेंबर में बैठे तो अधिवक्ताओं की भीड़ लग गई। इतना ही नहीं फाइल को देखते देखते घंटों लग गया।

आदिम जाति कल्याण विभाग

आदिम जाति कल्याण विभाग में बीते नवंबर से कुर्सी खाली है। यहां नवंबर दिसंबर माह से सीएसके उईके के रायपुर स्थानांतरण होने के बाद यहां का भी प्रभारी अपर कलेक्टर लवीना पांडेय के पास था। वे भी यहां सप्ताह में एक दो घंटे टाइम दे पातीं थीं। इसलिए यहां भी फाइलों की अंबार लगी हुई है। मंगलवार को यहां फिर से प्रभारी अधिकारी बतौर नीशा नेताम मड़ावी को प्रभार दिया गया है। वे भी यहां एक दो घंटे ही टाइम दे पा रहीं है। इसके चलते यहां का भी रुटिन का काम प्रभावित होता है।

डीईओ आफिस में 10 दिन का प्रभार

डीईओ आफिस भी इन दिनों 10 दिन के दिन के लिए प्रभारी अधिकारी के भरोसे संचालित हो रहा है। यहां डीईओ एके भारद्वाज 10 दिन की छुट्टी पर हैं। इसके चलते यहां का प्रभारी प्रशिक्षु आईएएस दुर्गा प्रसाद अधिकारी को दिया गया है। जबकि दुर्गा प्रसाद अधिकारी वर्तमान में नगरपालिका चांपा के सीएमओ पद पर काबिज हैं।

डीएमसी का प्रभार एपीसी को

डीएमसी भी हाल में 10 से 15 दिनों की छुट्टी पर हैं। उनके स्थान पर एसपीसी हरीराम जायसवाल का प्रभार दिया गया है। यहां भी प्रभारी के भरोसे काम चल रहा है। हालांकि यहां काम अधिक नहीं होता क्योंकि समग्र शिक्षा में प्राथमिक व मिडिल स्तर के स्कूलों के अलावा कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों के काम काज की मॉनिटरिंग होना रहता है। इससे यहां का काम उतना प्रभावित नहीं होता।

जांजगीर एसडीएम में नियमित एसडीएम पदस्थ हैं। यहां कोई प्रभार में नहीं रहा है। रही बात आदिम जाति कल्याण विभाग में यहां भी प्रभारी अधिकारी की नियुक्ति कर दी गई है।
-एसपी वैद्य, अपर कलेक्टर