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गाय को ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा दिलाने युवाओं ने खून से किए हस्ताक्षर

थांदला से झाबुआ तक 33 किमी का कठिन सफर, 13 फरवरी से शुरू की थी यात्रा

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गाय को ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा दिलाने युवाओं ने खून से किए हस्ताक्षर

गाय को ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा दिलाने युवाओं ने खून से किए हस्ताक्षर

झाबुआ. गोमाता को ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा देने की मांग को लेकर जिले में रविवार को आस्था और आक्रोश का अनोखा संगम देखने को मिला। थांदला के युवा गोभक्त यश राठौड़ ने 13 फरवरी से शुरू की अपनी 10 दिवसीय दंडवत यात्रा का समापन झाबुआ में किया। करीब 33 किलोमीटर की दूरी उन्होंने दंडवत लेटकर तय की। यात्रा के समापन पर जेल बगीचे में गोभक्तों ने उनका स्वागत किया और आंदोलन को समर्थन दिया। आंदोलन के दौरान युवाओं का उत्साह चरम पर रहा। प्रदर्शनकारी अपने साथ सफेद कपड़ा और सिरिंज लेकर पहुंचे। कई गोभक्तों ने अपना रक्त निकालकर कपड़े पर अपनी भावनाएं लिखीं और हस्ताक्षर के रूप में खून से सने पंजों के निशान बनाए। युवाओं का स्पष्ट संदेश था कि गोमाता के सम्मान और गोरक्षा के लिए वे अपना रक्त देने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

कांग्रेस का समर्थन, सरकार पर साधा निशाना

आंदोलन को जिला कांग्रेस का भी समर्थन मिला। वीरसिंह भूरिया, प्रकाश रांका और वालसिंह मेड़ा सहित अन्य नेता मौके पर पहुंचे। कांग्रेस नेताओं ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि गोमाता के सम्मान की बात की जाती है तो उसे धरातल पर भी दिखना चाहिए। उनका आरोप था कि युवाओं को अपनी मांगों के लिए इस तरह कठोर तपस्या करनी पड़ रही है, लेकिन सरकार संवेदनशील नहीं है। युवक कांग्रेस विधानसभा उपाध्यक्ष आयुष ओहरी ने भी खून से हस्ताक्षर कर आंदोलन को समर्थन दिया।

कलेक्ट्रेट गेट पर तकरार, एसपी ने स्वीकारा ज्ञापन

जब यश राठौड़ और अन्य गोभक्त कलेक्ट्रेट पहुंचे तो प्रशासन और पुलिस बल पहले से मौजूद था। तहसीलदार सुनील डावर ने ज्ञापन लेने की बात कही, लेकिन युवाओं ने कलेक्टर को ही ज्ञापन सौंपने पर जोर दिया। संयुक्त कलेक्टर विजय कुमार मंडलोई और एसडीओपी रूपरेखा यादव ने भी समझाइश दी, परंतु युवा अपनी मांग पर अड़े रहे। इस दौरान गोभक्तों ने नारेबाजी करते हुए हनुमान चालीसा का पाठ किया। स्थिति को संभालने के लिए एसपी डॉ. शिवदयाल सिंह स्वयं मौके पर पहुंचे। उन्होंने युवाओं से चर्चा कर उनका 7 सूत्रीय ज्ञापन स्वीकार किया और आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को उचित स्तर तक पहुंचाया जाएगा।

10 दिन की तपस्या, 33 किमी का संकल्प

युवा यश राठौड़ ने गोमाता की रक्षा का संकल्प लेकर 13 फरवरी को थांदला से दंडवत यात्रा प्रारंभ की थी। तेज धूप और शारीरिक कष्ट के बावजूद उन्होंने 10 दिनों में 33 किलोमीटर की दूरी पूरी की। यात्रा का समापन झाबुआ में हुआ, जहां बड़ी संख्या में युवाओं और गोभक्तों ने आंदोलन में भागीदारी निभाई।