इलाहाबाद हाईकोर्ट के सुनवाई से पहले जाने आरुषि के चाची का क्या कहना है कि इस मर्डर केस के बारे में....
नोएडा. बहुचर्चित आरुषि और हेमराज हत्या कांड में मर्डर केस के लिए आजीवन कारावास की सजा काट रहे डॉ. राजेश व नूपुर तलवार की अपील पर इलाहाबाद हाईकोर्ट गुरुवार को फैसला सुना सकता है। इस केस पर सितंबर 2016 से 11 जनवरी 2017 तक सुनवाई चली थी। गाजियाबाद के विशेष सीबीआई कोर्ट राजेश और नुपुर को 26 नवंबर, 2013 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट के फैसले को लेकर ये मामला फिर से सुर्खियों में बना हुआ। हर तरफ फिर से इस जटिल मर्डर केस की चर्चा तेज हो गई है। 9 साल पहले 15/16 मई 2008 की रात को आरुषि तलवार की उसके घर में ही हत्या कर दी गई थी। इतने साल बीतने के बाद और तलवार दंपति को सजा मिलने के बावजूद आरुषि-हेमराज मर्डर केस के राज से पर्दा नहीं उठ पाया है।
सेक्टर-25 स्थित जलवायु विहार में डेंटिस्ट डॉ. राजेश तलवार और डॉ. नुपूर तलवार अपनी 14 साल की बेटी आरुषि तलवार के साथ रहते थे। आरुषि नौवीं की छात्रा थी। 15/16 मई 2008 की रात को उनके घर में आरुषि का मर्डर हो गया। पहले तो शक उनके नौकर हेमराज पर गया, पर बाद में उसका शव भी छत से मिला। इस मर्डर केस पर किताब लिखी गई, फिल्म बनाई गई लेकिन हत्या की गुत्थी नहीं सुलई पाई। आज जब ये मामला फिर से हाइप हो रहा है, तो ऐसे में हम आपको आरुषि की चाची वंदना तलवार से की गई बातचीत के बारे में बताते हैं, जो इस मिस्ट्री मर्डर केस को समझने में आपकी काफी हद तक मदद करेगा। आपको बतादें कि पत्रिका ने वंदना तलवार से ये इंटरव्यू 2016 में इस केस के 9 साल पूरे होने पर किए थे।
वंदना तलवार ने जो बातें साझा की...
- CBI की दूसरी टीम तलवार दंपति को बिल्कुल पसंद नहीं करती थी। एजीएल कौल नुपूर तलवार को पसंद नहीं करते थे। इसकी वजह नुपूर का निडर होना था। वो बिना किसी दबाव में आए अपनी बात रखती थी। इसी बात को लेकर नुपूर और उनके पिता की कौल के साथ कई बार बहस भी हो चुकी थी।
- तलवार फैमली के इस रवैये की वजह से कौल ने सीबीआई की पहली टीम की सारी थ्योरी को गलत कह पलट कर रख दिया था।
- सीबीआई की दूसरी टीम के जांच अधिकारी एजीएल कौल लगातार सीबीआई की ओडीआई लिस्ट में थे। इनकी ईमानदारी पर संस्था को संदेह रहता था।
- चाची ने बताया था कि हेमराज का फोन किसने उठाया। वह पंजाब कैसे पहुंचा। इस मामले की जांच तो की ही नहीं गई।
- अगर किताब की मानें तो गांधीनगर एफएसएल लैब के उपनिदेशक एमएस दहिया ने ही साबरमति एक्सप्रेस में लगी या लगाई गई आग की जांच की थी। उन्होंने थ्योरी दी थी कि ट्रेन में आग बाहर से नहीं भीतर से किसी ने लगाई थी। यहांं उन्होंने पुरानी थ्योरी को पलट दिया था। ठीक इसी तरह दहिया ने आरुषि केस की पहली थ्योरी भी पलट कर रख दी। दहिया केस में दोबारा से सेक्स एंगल ले आए थे।
- राजेश और नुपूर तलवार का ब्रेन मैपिंग और पॉलीग्राफिक टेस्ट करने वाले डॉ. वाया का कहना था कि इस टेस्ट कोई संकेत नहीं मिला जिससे लगता हो कि राजेश और नुपूर तलवार आरुषि या हेमराज के मर्डर में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संबंध रखते हो। वहीं दूसरी तरफ डॉ. वाया के मुताबिक नौकरों पर किए गए टेस्ट से साफ साबित होता है कि वो इस घटना में शामिल थे। लेकिन फिर भी सीबीआई की दूसरी टीम ने नौकरों से कोई खास पूछताछ नहीं की।
- आरुषि की शव की जांच करने वाले दोनों डॉक्टर डॉ. दोहरे और डॉ. नरेश राज ने पहले कहा कि आरुषि के प्राइवेट पार्ट में कुछ भी असामान्य नहीं मिला था। लेकिन जैसे ही जांच कौल के हाथों में गई दोनों अपने बयान से पलटते दिखें।
- डॉ. दोहरे और डॉ. नरेश ने यह भी कहा था कि हत्या खुखरी से की गई हो लेकिन खुखरी कृष्णा के कमरे से बरामद होने के बावजूद इसकी जांच को आने फॉलो नहीं किया गया।
- सबसे हैरानी वाली जो बात तो ये पता चली कि आरुषि की लाश का पोस्टमॉर्टम करने से पहले डॉ. दोहरे ने कभी किसी महिला या युवती के शरीर का पोस्टमार्टम नहीं किया था। उन्हें किसी भी तरह की पोस्टमार्टम अनुभव नहीं किया था।
- दहिया की मानें तो आरुषि और हेमराज की हत्या एक कमरे में हुई, लेकिन हत्यारा ने हेमराज का खून साफ किया और आरुषि का नहीं। ये एक बड़ा सवाल है।
- इस केस के लिए सीबीआई ने एक अवैध तरीके से जीमेल पर एक आईडी बनाई थी। जो ये है hemraj.jalvayuvihar@gmail.com.