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हजारों सालों से यहां नहीं मनाया जाता है Dussehra, रावण की पूजा की जाती है

Dussehra 2018: रावण की जन्मस्थली ग्रेटर नॉएडा के बिसरख गाँव में दशहरा के दिन नहीं जलाया जाता है रावण, न होती है रामलीला

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हजारों सालों से यहां नहीं मनाया जाता है दशहरा, रावण की पूजा की जाती है

नोएडा।Dussehra 2018: बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर हर साल Dussehra का त्योहार मनाया जाता है। इस त्योहार को विजयादशमी भी कहा जाता है। इस बार दशहरा 19 अक्टूबर को है जब देश में जय श्री राम के नारे लगते हैं और प्रतिकात्मक रावण का वध किया जाता है। जहां एक ओर देश में धूम-धाम से दशहरा मनाया जाता है। वहीं भारत में एक ऐसा भी शहर है जहां रावण को मंदिर में रख कर उसकी पूजा भी की जाती है। Ravan का पुतला तो जलाने का सवाल ही नहीं। आप हैरान हो रहे होंगे लेकिन ये सच है।

दरअसल उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में बिसरख गांव हैं जिसे रावण की जन्मस्थली के तौर पर माना जाता है। प्राचीन बताया जाता है कि बिसरख गांव में Ravan के पिता विश्रवा ऋषि ने अष्टभुजी शिवलिंग स्थापित कर शिव की पूजा की थी। वर्षों पुरानी इस शिवलिंग की गहराई आज तक कोई नहीं जान सका है। शिवलिंग की गहराई का पता करने के लिए कई बार खुदाई की गई लेकिन, पता नहीं चल सका। फिलहाल, यहां शिव का मंदिर बना हुआ है। बताया जाता है कि रावण का जन्म भी यहीं हुआ और उन्हें शिव की पूजा भी बिसरख गांव में ही की थी।

कुछ लोगों का ये भी मानना है कि बिसरख रावण के नाना का घर रहा है। अर्थात रावण की मां यहीं की थी। रावण की जन्मस्थली होने की वजह से गांव के लिए उसके प्रति आदर भाव रखते हैं। इसलिए यहां Dussehra नहीं मनाया जाता। इसके साथ ही गांव वाले बताते हैं कि जब भी कभी यहां के युवाआें Ramleela का आयोेजन किया तभी किसी न किसी की मौत हो गर्इ आैर रामलीला को बीच में ही बंद करना पड़ा। इसलिए अब रामलीला का मंचन ही नहीं होता है।

उन्होंने बताया कि रावण ने इस मंदिर के अलावा गाजियाबाद के दूधेश्वर नाथ महादेव आैर हिरण्यगर्भ मंदिर में भी तपस्या की थी। इसके बाद रावण ने मेरठ की रहने वाली मंदोदरी के साथ विवाह किया। विवाह के बाद रावण परिवार सहित यहां से लंका के लिए पलायन कर गया था। रावण मंदिर के ट्रस्टी रामवीर शर्मा ने बताया कि रावण एक बहुत बड़ा विद्धवान था। उनके पिता ऋषि प्रकांड पंडित थे। उनके मुताबिक यह बिसरख गांव के लोगों के लिए सौभाग्य की बात है कि यहां रावण के पिता विश्रवा ने अष्टभुजी शिवलिंग स्थापित कर शिव की पूजा की थी। इसी मंदिर में शिव भगवान ने रावण को वरदान दिया था।