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यमुना के किनारे बसे इन गांवों पर मंडराया बाढ़ का खतरा, अधिकारियों ने डाला डेरा

हरियाणा के हथिनी कुंड बैराज से छोड़े गए 6 लाख क्यूसेक पानी ने बढ़ाया बाढ़ का खतरा।

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यमुना के किनारे बसे इन गांवों पर मंडराया बाढ़ का खतरा, अधिकारियों ने डाला डेरा

नोएडा। गौतमबुद्ध नगर में यमुना नदी के तट पर बसे गांवों और ग्रामीणों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। पिछले दिनों हुई भारी बारिश से यमुना उफान पर है, जिसकी वजह से हरियाणा सरकार को हथिनी कुंड बैराज के दरवाजों को खोलना पड़ा, जिससे हथनी कुंड बैराज से छोड़ा गया 6 लाख क्यूसेक पानी सोमवार की शाम गौतमबुद्ध नगर पहुंचने लगा है। इससे गौतमबुद्ध नगर में यमुना नदी के तट पर बसे गांवों और ग्रामीणों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। स्थिति को देखते हुए डीएम बीएन सिंह ने अधिकारीयों और ग्रामीणों को सचेत कर दिया है। सिंचाई विभाग के अधिकारी और कर्मचारी यमुना के बांधे को बचाने के लिए रात-दिन जुटे हुए हैं।

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यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा जिसके कारण नदी के तट पर बसे गांवों के खेत लगातार यमुना की बाढ़ के चपेट में आते जा रहे हैं, जिसके कारण खेतों में लगी फसल को भारी नुकसान हुआ है। बाढ़ की चपेट में जिले के कामबक्सपुर, याकूबपुर, मोमनाथन एवं सफीपुर गांव है। जहां खेतों में लगी फसल को भारी नुकसान हुआ है कहीं-कहीं पूरी तरह से नष्ट हो गई है।

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सिंचाई विभाग के अधिसाशी अभियंता एवं बाढ़ के नोडल अधिकारी एनके लांबा ने बताया कि दो दिन पहले हरियाणा के हथिनी कुंड बैराज से यमुना में 6 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। वह सोमवार शाम से गौतमबुद्ध नगर में पहुंचने लगा है। जिससे जिले के कामबक्सपुर, याकूबपुर, मोमनाथन एवं सफीपुर गांव में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। वहीं कामबक्सपुर गांव के पास यमुना की धारा का रुख गांव की ओर हो गया है। सिंचाई विभाग के अधिकारी गांव को बचाने के लिए बांध पर पर दिन-रात काम कर रहे हैं, ताकि कहीं पर बांध क्षतिग्रस्त ना होने पाए। जिला प्रशासन भी इस बात की कोशिश कर रहा है कि किसी भी ग्रामीण को बाढ़ के कारण नुकसान न होने पाए।

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मामले पर जिलाधिकारी बीएन सिंह का कहना है कि समस्त अधिकारियों को बाढ़ के संबंध में सचेत कर दिया गया है। सभी बाढ़ चौकियों पर जिन अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है, वे अपनी ड्यूटी पर मुस्तैदी के साथ तैनात हैं। उप जिला अधिकारी तथा अन्य अधिकारी खतरे वाले क्षेत्रों में निरंतर भ्रमण कर रहे हैं, जिससे किसी ग्रामीण को बाढ़ से नुकसान न होने पाए।

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