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दोस्ती पर खूब बनी है फिल्में, जानें, कुछ फेमस डायलॉग्स

बॉलीवुड फिल्मों में भी दोस्ती के कई रंग दिखे

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Friendship day 2018

दोस्ती पर खूब बनी है फिल्म, जानें, कुछ फेसम डायलॉग्स

नोएडा। अक्सर ये कहते सुना जाता है कि एक शाम दोस्ती के नाम और अब वो शाम आने में बस दो दिन बचे हैं जब 5 अगस्त को इंटरनेशनल फ्रेंडशिप डे मनाया जाएगा। वैसे भले ही दोस्ती को एक दिन के रुप में नाम देने की शुरुआत अमेरिका से की गई हो, लेकिन हमारे देश में भी दोस्ती के नाम पर कई कहानियां प्रचलित हैं। जिसका वर्णन हमारे धर्म ग्रंथ तक में वर्णन है। भगवान कृष्ण और सुदामा की दोस्ती इसका उदाहरण है। कर्ण और दुर्धोधन की भी दोस्ती जगजाहिर है। ऐसे ही कई और कहानियां हमारे सामने हैं। समय-समय पर कवि की कविताओं में, लेखक के साहित्य में और तो और फिल्मों में भी दोस्ती के कई रंग दिखाए जाते रहे हैं। आज हम कुछ उन्हीं फिल्मों और उनके डायलॉग्स के बारे में जानेंगे।

1-ब्लैक एंड व्हाइट के समय से ही फिल्मों मे दोस्ती के रस घोले जाते रहे हैं। शारीरिक अक्षमता पर बनी फिल्म 'दोस्ती' में दोस्ती के उपर गाया गया गाना मेरी दोस्ती मेरा प्यार काफी फेसम हुआ था।
2-इसी तरह 1989 में आई फिल्म 'मैंने प्यार किया' में सलमान और भाग्यश्री की केमिस्ट्री को पहले दोस्ती का नाम दिया गया। जिसमें कई डायलॉग्स काफी फेमस हुए थे। फिल्म का एक डायलॉग 'दोस्ती का एक उसूल है मैडम...नो सॉरी नो थैंक्यू' आज भी लोगों के जुबान पर सुनने को मिल जाता है।
3-इसी फिल्म का एक और डायलॉग'दोस्ती की है तो निभानी तो पड़ेगी' अकसर कहते-सुनते दिखाई दे जाते हैं।
4-1994 में फिल्म 'अंदाज अपना अपना का है' फिल्म में सलमान खान और आमि‍र खान की दोस्ती पर फिल्माया ये डायलॉग 'दो दोस्त एक कप में चाय पियेंगे, इससे दोस्ती बढ़ती है' खूब पसंद की गई थी।
5-कल हो न हो फिल्म में 'प्यार का पहला कदम दोस्ती है और आख‍िरी भी' ये डायलॉग लोगों ने बहुत पसंद किया था।
6-स्टूडेंट लाइफ और तीन दोस्तों की कहानी बताती फिल्म थ्री इडियट का 'दोस्त फेल हो जाए तो दुख होता है, लेकिन दोस्त फर्स्ट आ जाए तो ज्यादा दुख होता है'। दरअसल लाइफ का एक फैक्ट है और शायद ये डॉयलॉग पढ़ते ही आपको यह सीन याद भी आ जाए। आपको इस फिल्म में शरमन जोशी, आमिर खान और आर माधवन की दोस्ती ने खूब रुलाया भी होगा और हंसाया भी। असल जिंदगी में भी दोस्ती कुछ ऐसी ही होती है। लड़ाई-झगड़े के बाद भी एक-दूसरे के साथ रहना पक्की दोस्ती का सबूत है।
7-धर्म, जाती, मजहब से उपर दोस्ती होती है इसे फिल्म 'शूटआउट एट वडाला' में एक डायलॉग के जरिए बातने की कोशिश की गई है कि दोस्ती का कोई मजहब नहीं होता, दोस्त और मौके बार-बार नहीं आते'।

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