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गुरूवार को श्री हरि विष्णु के साथ करें भगवान बृहस्पति की पूजा, शत्रु पर मिलेगी विजय, लेकिन भूल कर भी न करें ये काम,इन बातों का खास ध्यान

गुरूवार को श्री हरि विष्णु के साथ करें भगवान बृहस्पति की पूजा, मुश्किल होगी आसान, पूरे होंगे रुके काम

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noida

गुरूवार को श्री हरि विष्णु के साथ करें भगवान बृहस्पति की पूजा, शत्रु पर मिलेगी विजय, लेकिन भूल कर भी न करें ये काम,इन बातों का खास ध्यान

Guruvar Vrat puja vidhi in hindi

नोएडा। गुरूवार को बृहस्पति भगवान की पूजा की जाती है। प्राचीन काल से ही पुराणों और शास्त्रों में बृहस्पति देव (Brihaspati) का विशेष उल्लेख किया गया है। घर में सुख-शांति, शादी-विवाह में हो रही देरी, विजय प्राप्त करने के लिए भगवान बृहस्पति की पूजा की जाती है। कैसे की जाती है भगवान बृहस्पति (Brihaspati) की पूजा, व्रत में क्या करना चाहिए क्या नहीं, लेकिन उससे पहले जानेंगे कौन थे भगवान बृहस्पति(Brihaspati)।

पौराणिक कथाओं के अनुसार-

भगवान बृहस्पति एक तपस्वी ऋषि थे। इन्हें तीक्ष्णशृंग भी कहा गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार बृहस्पति को अत्यंत पराक्रमी भी बताया जाता है। कहते हैं कि इन्द्र को पराजित कर इन्होंने उनसे गायों को छुड़ाया था। इसीलिए युद्ध में विजय के अभिलाषी योद्धा इनकी पूजा करते हैं। गुरू बृहस्पति को अत्यंत परोपकारी भी कहते हैं और ये शुद्ध आचारण वाले व्यक्तियों की हमेशा संकट में सहायता करते हैं। बृहस्पति के बिना यज्ञ सफल नहीं माने जाते क्योंकि इन्हें गृहपुरोहित माना गया है। इनको देवताओं का पुरोहित भी माना गया है।

एक कथा के अनुसार ये अंगिरा ऋषि की सुरूपा नाम की पत्नी से पैदा हुए थे। इनकी पत्नियों के नाम तारा और शुभा हैं। कहते हैं एक बार सोम यानि चंद्रमा इनकी पत्नी तारा से प्रेम करने लगा और उसको उठा ले गया। इस पर बृहस्पति और चंद्रमा में युद्ध होने लगा। जब ये युद्घ भयंकर होने लगा तो अंत में ब्रह्मा जी ने इसमें हस्तक्षेप किया और चंद्रमा से बृहस्पति की पत्नी को लौटाने के लिए कहा। चंद्रमा से तारा को बुध नाम के पुत्र की प्राप्ति हुई जो एक ग्रह है। बुद्ध ही चंद्रवंशी राजाओं के पूर्वज कहलाते हैं। वहीं महाभारत के अनुसार बृहस्पति के संवर्त और उतथ्य नाम के दो भाई भी थे। इनमें से संवर्त के साथ बृहस्पति का हमेशा झगड़ा रहता था।

कैसे करें व्रत पूजा-पाठ-

प्रात काल उठ कर बृहस्पतिदेव का ध्यान करना चाहिए।

गुरुवार के दिन सुबह स्नान करें। पीले वस्त्र पहनें।

गुरुवार को पीले फल, पीले फूल, पीले वस्त्रों से भगवान बृहस्पतिदेव की पूजा करनी चाहिए।

गुरु बृहस्पति की प्रतिमा को रखकर देवगुरु चार भुजाधारी मूर्ति का पंचामृत स्नान यानि दही, दुध, शहद, घी, शक्कर कराएं।

पीली वस्तुओं जैसे चने की दाल से बने पकवान, चने, गुड़, हल्दी या पीले फलों का भोग लगाएं।

प्रसाद के रूप में केले चढ़ाना शुभ माना जाता है।

बृहस्पति मंत्र ऊँ बृं बृहस्पते नम: का जप करें।

उसके बाद बृहस्पति आरती करें।

क्या नहीं करें-

कहते है पुरे श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ गुरु के व्रत करने से गुरु ग्रह दोष से भी मुक्ति मिलती है और गुरु कृपा भी होती है। माना जाता है इस व्रत को करने से सारे सुखो को प्राप्ती होती है। मान्यता ये भी है की जो कन्या इस व्रत को पुरे श्रद्धाभाव के साथ करती है उसका शीघ्र-अति-शीघ्र विवाह हो जाता है।

लेकिन व्रत धारी को व्रत वाले दिन साबुन का प्रयोग नहीं करना चाहिए। जबकि पुरुष को बाल और दाढ़ी आदि नहीं बनवानी चाहिए। इसके गुरुवार के दिन घर के किसी भी व्यक्ति को बाल नहीं कटवाने चाहिए। ऐसा करने से देव गुरु का प्रकोप झेलना पड़ता है।