
नोएडा। एक तरफ देश में प्राइवेट स्कूलों द्वारा फीस बढ़ौतरी को लेकर अभिभावक आए दिन प्रदर्शन करते रहते हैं। लेकिन अब बसपा प्रमुख व यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल नोएडा के स्थित महामाया बालिका इंटर कॉलेज में फीस बढ़ौतरी होने पर अभिभावकों ने जमकर हंगामा किया। दरअसल, अभी तक स्कूल का संचालन प्राधिकरण द्वारा किया जाता था। लेकिन अब प्राधिकरण ने स्कूल को वित्तीय सहायता देने से हाथ खींच लिए हैं और स्कूल को अपने संसाधन जुटाने के लिए कहा है।
इस बाबत बोर्ड बैठक में स्कूल में फीस बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। जिसके बाद स्कूल प्रबंधन ने फीस मे तीन गुना वृद्धि कर दी। वहीं स्कूल के इस फैसले से अभिभावक गुस्से में हैं और इसे लेकर वह सड़क पर प्रदर्शन करने उतर पड़े। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि फीस कि वृद्धि से उनके घर का बजट गड़बड़ा गया है। ऐसे मे वह बच्चों को कैसे पढ़ा पाएंगे।
सेक्टर-44 स्थित महामाया बालिका इंटर कॉलेज के बाहर प्रदर्शन करने वाले अभिभावकों का कहना है कि उन्हें यह समझ में नहीं आ रहा कि वह अपने बच्चों की पढ़ाई आगे कैसे जारी रख पाएंगे। प्रदर्शन करने वाली नीतू चौहान ने बताया कि इस स्कूल मे उनकी बेटी पांचवी कक्षा मे पढ़ती है और हमने उसका एडमिशन इसलिए कराया कि यह लड़कियों का स्कूल है। अब फीस तीन गुना बढ़ा दी गई है। 10 से 15 हजार रुपये कमाने वाले लोग इसे कैसे भरेंगे। हमें अपने दूसरे बच्चे को भी पढ़ना है। इस बारे में हमसे कोई बात नहीं की गई और बस एक नोटिस चिपका दिया गया है कि फीस अब 11 हजार रुपये कर दी गई है।
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वहीं स्कूल की फीस वृद्धी होने के बाद इस मामले में अब सियासत भी शुरू हो गई है। चूंकि यह प्रोजेक्ट मायावती का ड्रीम प्रोजेक्ट था, इसलिए बसपा के टिकट पर नोएडा से विधानसभा चुनाव लड़ने वाले रवि मिश्रा भी मौके पर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने केंद्र और प्रदेश सरकार को नसीहत दे डाली और कहा कि सरकार या तो बेटी बचाव बेटी पढ़ाओ के नारे को बंद कर दे, या फिर बेटियों को मुफ्त में शिक्षा दे।
इस मामले में अभिभावकों का गुस्सा झेल रही स्कूल की प्रिन्सिपल प्रतिभा चौधरी का कहना है कि 6 फरवरी को हुई बोर्ड बैठक मे फीस वृद्धि का फैसला किया गया। मेरठ के कमिश्नर की अध्यक्षता मे हुई बैठक में दूसरे स्कूलों की फीस का अध्ययन किया गया और 30 फीसदी तक की वृद्धि की गई है। उन्होंने बताया कि यह स्कूल सीधे तौर पर यूपी सरकार का नहीं है। इसकी फंडिंग नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण करता है। उन्होंने साफ कहा कि जो फीस देने कि स्थिति में नहीं है, उसे दूसरा ऑप्शन तलाशना होगा ।
Updated on:
28 Feb 2018 04:50 pm
Published on:
28 Feb 2018 04:48 pm

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