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‘प्लीज आइए और देखिए कि भारतीय सेना आपके बेहतर कल के लिए किन दुर्गम स्थानों पर दुश्मनों से लड़ाई लड़ रही है’

कारगिल विजय दिवस स्पेशल स्टोरी:  कारगिल युद्ध पर जाने से पहले कैप्टन विजयंत थापर ने लिखी थी ऐसी भावुक चिट्ठी, पढ़ आप भी रो पड़ेंगे

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pallavi kumari

Jul 26, 2017

vijyant thapar

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नोएडा. कारगिल दिवस के इस 18वीं वर्षगांठ के अवसर पर हम उन सभी शहीदों को याद कर रहे हैं। जिन्होंने देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। कारगिल युद्ध के दौरान 500 से भी ज्यादा सैनिकों ने अपनी जान गंवाईं थी। इन्हीं शहीदों में से एक थे कैप्टन विजयंत थापर। 2 राजपूताना राइफल्स के कैप्टन विजयंत थापर की शहादत पर देश को नाज है।

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1999 में कारगिल युद्ध के दौरान विजयंत थापर ने बहादुरी की मिसाल कायम की थी। जून 1999 को 22 वर्षीय साहस से लबरेज विजयंत ने कारगिल के द्रास क्षेत्र में युद्ध करते करते जान की बाजी लगा दी थी।



कैपटन विजयंत थापर को मरणोपरांत 26 जनवरी, 2000 को भारत के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया। उनकी माता तृप्ता थापर ने विजयंत की यादों को हमारे साथ सांझा किया।

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शहीद विजयंत थापर के घर मे प्रवेश करते ही उनकी यादें तस्वीरों से झांकती नजर आती है। विजयंत थापर का वीर चक्र भी नजर आता है और वो उल्लेख भी जिसमें लिखा है कि 'साहसी, शांत और अनुकरणीय वीरता प्रदर्शित करते हुए कैप्टन विजयंत थापर ने दुश्मनों से लड़ते हुए देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। बेटे की स्मृतों के खोई विजयंत थापर की मां तृप्ता थापर कहती हैं कि लगता है जैसी कल की ही बात हो।

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कारगिल पर दुश्मनों के हमले के बाद, शायद अपनी आने वाली मौत को भांपते हुए कैप्टन विजयंत ने अपने परिवारवालों के नाम एक चिट्ठी लिखी थी। इसका जिक्र करते तृप्ता थापर भावुक हो जाती हैं, फिर वो कहती हैं बेटे से किए वादों को पूरा परिवार बड़ी संजीदगी से निभाता आ रहा है।

यह खत कुछ इस तरह था...

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प्रिय पापा, ममी और ग्रैनी,

'जब तक आपको यह खत मिलेगा तब तक मैं आप लोगों को आसमान से देख रहा होउंगा। और अप्सराओं की मेहमाननवाजी का लुत्फ उठा रहा होउंगा। मुझे कोई पछतावा नहीं है। यहां तक की अगर मैं कभी दोबारा इंसान बना, तो मैं सेना में भर्ती होउंगा और देश के लिए लडूंगा। अगर आप आ सकते हैं तो प्लीज आइए और देखिए कि भारतीय सेना आपके बेहतर कल के लिए किन दुर्गम जगहों पर दुश्मनों से लड़ाई लड़ रही है। जहां तक यूनिट का संबंध है तो इस बलिदान को सेना में भर्ती हुए नए जवानों को जरूर बताया जाना चाहिए। मेरे शरीर का जो भी हिस्सा निकालकर इस्तेमाल किया जा सकता है उसे निकाल लिया जाना चाहिए। अनाथालयों में दान करते रहिएगा और रुखसाना को हर महीने 50 रुपए जरूर भेज दीजिएगा। इस बंदे की कुर्बानी को कभी मत भूलना। पापा आप गर्व करना। मामाजी मैंने जो भी गलत किया हो उसे माफ करना। ओके अब समय है अपनी असाल्ट पार्टी को ज्वाइन करने का।'

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