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ओएलएक्स से व्हीकल, न बाबा न

इन जैसी और भी कई साइट हैं जो गाड़ी के फर्जी पेपर बना कर बड़े ही कम पैसों इन्हें बैच ग्राहकों की आंखों में धूल झोकने का काम करती है।

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Archana Sahu

Apr 01, 2016

olx

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नोएडा
। ओएलएक्स की टैगलाइन है कि यहां पर सब कुछ बिकता है। लेकिन खरीदने वाले को ये सावधानी बरतनी चाहिए कि जो बिक रहा है वो चोरी का माल तो नहीं है। ओएलएक्स पर चोरी का सामान जमकर बेचा जा रहा है। खासकर कार और बाइक्स।


खरीदने से पहले करें जांच

अगर आप ओएलएक्स पर कोई भी वाहन खरीद रहे हैं तो उसकी पहले अच्छे से जांच कर लें। क्योंकि ओएलएक्स पर पोस्ट किए जाने वाले ऐड की जिम्मेदारी कंपनी नहीं लेती हैं। जबकि अन्य कुछ साइट ऐसी सुविधा देती हैं जिनमें वह सेकेंड हैंड व्हीकल की पहले जांच करती हैं। अगर आप ओएलएक्स पर ऐड देखकर बाइक या कार खरीद रहे हैं तो बहुत संभव है कि वह चोरी की हो।


जरूर करें शक


अगर इस साइट पर आपको नई कार या बाइक बेहद कम कीमत पर मिल रही है तो आपका शक करना जायज है। साइबर एक्सपर्ट गौरव चौधरी का कहना है कि, आजकल इस तरह के फ्रॉड बहुत बढ़ गए हैं। पुरानी बाइक्स को तो चोर चोर बाजार में कटवा देते हैं लेकिन नई बाइक की उन्हें वहां पर उनकी कीमत नहीं मिलती है इसलिए वह कई बार नंबर प्लेट बदलकर या फर्जी कागज बनाकर व्हीकल बेचते हैं। ऐसे में व्हीकल खरीदने से पहले संबंधित थाने से वेरीफिकेशन जरूर कराना चाहिए।


पकड़े गए तीन शातिर


हापुड देहात पुलिस ने चेकिंग के दौरान तीन चोरों को हिरासत में लिया। उनके पास से चोरी की बाइक, कई एक्टिवेट सिम, कंप्‍यूटर, प्रिंटर, आरटीओ की फर्जी मोहरें, फर्जी डीएल बरामद किए गए। पुलिस के अनुसार बाइक चोरी करने के बाद इंटरनेट (OLX) पर उससे मिलती-जुलती मोटर साइकिल सर्च की जाती थी। उस बाइक के फर्जी कागज तैयार किए जाते थे। फर्जी कागजात और वाहन स्वामी की फर्जी आईडी बनाया जाता था। इसके बाद चोरी की बाइक पर वहीं नंबर लगाकर उसे बेचा जाता। वह पहले भी कई बाइक इस तरह से बेच चुके हैं। इससे पहले भी वेस्ट यूपी में कई गैंग पकड़े गए हैं जोकि ओएलएक्स पर फर्जी कागजों को आधार बनाकर चोरी की बाइक बेचते थे।


कुछ अन्य साइट


ओएलएक्स की बजाए कुछ अन्य आॅनलाइन शॉपिंग साइट हैं जो सेकेंड हैंड व्हीकल में डील करती हैं। यहां आपको सामान थोड़ा महंगा जरूर मिलेगा लेकिन वह चोरी का नहीं होगा। क्योंकि ये साइट बेचे जा रही व्हीकल की पूरी वेरीफिकेशन खुद करती हैं। वेरीफिकेशन होने के बाद ही कस्टमर को व्हीकल बेचा जाता है।

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