नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम वेस्टइंडीज दौरे के लिए पूरी तरह तैयरा हो चुकी है। नए कोच की अगुआई में टीम ने जमकर प्रैक्टिस की है। छह दिन चले इस सेशन में अनिल कुंबले ने टीम को हर तरह से मजबूक करने की कोशिश की है। आपको बता दें कि इस दौरे पर भारतीय टीम को चार टेस्ट मैच खेलने हैं। भारतीय क्रिकेट टीम के टेस्ट कप्तान विराट कोहली ने दौरे से पहले कहा कि इन चार टेस्ट मैच के बाद हमें पता चलेगा कि टीम इंडिया एक टेस्ट टीम के लिए कितनी बन पाई है।
बता दें कि भारत को इस सीजन में कुल 17 टेस्ट मैच खेलने हैं। जिसकी शुरूआत वेस्टइंडीज के साथ चार मैचों की सिरीज से होगी। इस दौरे से पता चल पाएगा की भारत की नई टेस्ट टीम कितनी तैयार है। इस टीम में बहुत ही कम ऐसे खिलाड़ी है जिनका जगह टेस्ट टीम में पक्का है। ऐसे में कई खिलाड़ी कोशिश में रहेंगे की अच्छा प्रदर्शन करके टीम में अपना स्थान पक्का कर सके।
इशांत शर्माः टीम के सबसे अनुभवी तेज गेंदबाज को वेस्टइंडीज के तेज मैदानों पर अपना बेहतर प्रदर्शन करने का मौका मिलेगा। इससे पहले के वेस्टइंडीज दौरे में इशांत सबसे सफल गेंदबाज रहे थे औऱ मैन ऑफ दी सिरीज अपने नाम किया था। टीम को उम्मीद है कि इशांत अपने पिछले दौरे के कारनामे को इस बार फिर दोहरा सकें। इस दौरे पर उनपर दारोमदार होगा कि अपने अनुभव से नए खिलाड़ियों में जान भर अपने फॉर्म में वापस आएं। अपने आखिरी टेस्ट मैच में साउथ अफ्रीका के खिलाफ इशांत ने सिर्फ एक विकेट ही लिया था। उनका फॉर्म में लौटना टीम और उनके लिए काफी फायदेमंद होगा।
शिखर धवनः ऑफ स्टंप से बाहर जाती गेंद पर बल्ला लगाने की आदत से मजबूर धवन अगर इस टूर में अपनी गलती से सबक नहीं लेते तो उनके लिए आने वाला समय काफी दिक्कत भरा हो सकता है। धवन के लिए लोकेश राहुल भी एक परेशानी हैं। राहुल हर फॉर्मेट में बेहतरीन रहे हैं। उनके फ़ॉर्म में आने का मतलब है कि धवन पर अपनी जगह बचाने का दबाव है। दूसरी तरफ राहुल कप्तान कोहली के नेतृत्व में आरसीबी से खेलते हैं और उन्हें भी राहुल की बल्लेबाजी भाती है। ऐसे में धवन के लिए पहला टेस्ट काफी महत्वपूर्ण होगा।
ऋद्दिमान साहाः महेन्द्र सिंह धोनी के संन्यास के बाद से ही टीम इंडिया को एक बेहतरीन विकेटकीपर बल्लेबाज की तलाश है। टेस्ट कप्तान कोहली ने साफ शब्दों में कहा है कि साहा उनकी पहली पसंद हैं लेकिन खुद साहा इस बात से वाकिफ रखते हैं कि उन्हें अपनी बल्लेबाजी पर और अधिक काम करने की जरूरत है। टीम के साथ के एल राहुल एक विक्लप के चौर पर हैं लेकिन उन्हें टेस्ट मैच का विकेट के पीछे से इतना लंबा अनुभव नहीं है। ऐसे में साहा पूरी सीरीज में विकेट के पीछे रहेंगे। लेकिन इस पूरी सीरीज में अगर वो बल्लेबाजी में असफल हुए तो फिर उनके प्रदर्शन को लेकर सवाल उठने लगेंगे।
रविन्द्र जडेजाः जडेजा लंबे समय से अब टीम के साथ हैं। बहुत कम मौका पर उन्हें अपने से जौहर दिखाने का मौका मिलता है। टेस्ट क्रिकेट में वो काफी नीचे बल्लेबाजी करने आते हैं। नए कोच कुंबले ने भी उन्हें अपने बल्ले से योगदान देने को कहा है। दूसरी तरफ गेंदबाजी में भी उन्हें अश्विन और मिश्रा के साथ विकेट निकालने होंगे। लेकिन गेंदबाजी से ज्यादा उनपर बल्लेबाजी का प्रेशर होगा।
मोहम्मद शमीः इंज्री के बाद शमी लंबे समय के लिए मैदान से बाहर थे। वेस्टइंडीज दौरे में नाम आने से पहले शमी ने मैदान पर ज्यादा मैच नहीं खेला। हालांकि उनकी गेंदबाजी पर कोई सवाल नहीं उठा सकता। खुद कप्तान कोहली उन्हें वेस्टइंडीज के लिए अपनी नंबर वन पसंद बता चुके हैं। लंबे अर्से बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक बार फिर से खुद को साबित करने का उनके ऊपर मनोवैज्ञानिक प्रेशर होगा। न सिर्फ उन्हें वेस्टइंडीज में विकेट निकालने होंगे बल्कि अपनी चोट पर भी ध्यान देना होगा। पूरी सिरीज में सबसे अधिक नजर उन पर ही होगी।