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कोतवाली पत्थरकांड मामला: अदालत ने सभी आरोपियों को एससी-एसटी एक्ट से मुक्त किया

पुलिस ने 46 नामजद और 100-150 अन्य लोगों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की थी। हालांकि, एडवोकेट जीसी चौरसिया और हिमांशु चौरसिया ने कोर्ट में दलील दी कि एससी-एसटी एक्ट का मामला नहीं बनता है।

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kotwali chhatarpur

थाना सिटी कोतवाली

छतरपुर. थाना सिटी कोतवाली में 6 महीने पहले पुलिस पर हमला करने का मामला सामने आया था, जिसे लेकर विशेष न्यायालय ने सभी आरोपियों को एससी-एसटी एक्ट के आरोपों से मुक्त कर दिया है।

21 अगस्त 2024 को दर्ज किया गया

यह मामला 21 अगस्त 2024 को दर्ज किया गया था, जब करीब 150-200 मुस्लिम समुदाय के लोग थाना में ज्ञापन देने के नाम पर पहुंचे थे और नारेबाजी करने लगे थे। आरोप है कि इस दौरान सीएसपी अमन मिश्रा, थाना प्रभारी अरविंद कुजूर और अन्य पुलिसकर्मियों से गाली-गलौज की गई और डंडा, पत्थर, लोहे की रोड तथा धारदार हथियारों से पुलिस पर जानलेवा हमला किया गया। इस हमले में कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे और थाना परिसर में रखे वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया था।

46 नामजद और 100-150 अन्य लोगों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट

पुलिस ने 46 नामजद और 100-150 अन्य लोगों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की थी। हालांकि, एडवोकेट जीसी चौरसिया और हिमांशु चौरसिया ने कोर्ट में दलील दी कि एससी-एसटी एक्ट का मामला नहीं बनता है। विशेष न्यायाधीश उपेन्द्र प्रताप सिंह बघेल की अदालत ने पुलिस बयानों और एफआईआर में एससी-एसटी एक्ट का कोई आधार नहीं पाया और सभी आरोपियों को इस एक्ट से मुक्त करते हुए चालान वापस करने का आदेश दिया। अदालत ने मामले को सीजेएम की अदालत में भेजने का निर्देश भी दिया है।