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प्रेम ही ईश्वर है

जिस व्यक्ति के अंदर निरन्तर प्रेम का भाव पल रहा है वह व्यक्ति किसी भी मंदिर में ईश्वर की पूजा करने वाले पुजारी से कम नहीं है।

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Super Admin

Jan 16, 2015

जयपुर। प्रेम ही ईश्वर है। जिस व्यक्ति के अंदर निरन्तर प्रेम का भाव पल रहा है वह व्यक्ति किसी भी मंदिर में ईश्वर की पूजा करने वाले पुजारी से कम नहीं है।

यह बातें गोविन्ददेव मंदिर में चल रही भागवत में कथावाचक पीयूष महाराज ने गुरूवार कही।

उन्होंने कहा कि प्रेम करने वालों को तीन पड़ावों से गुजरना पड़ता है। ये हैं समीक्षा, प्रतीक्षा और परीक्षा। समीक्षा के अन्तर्गत गोपियों ने सांसारिक सम्बन्धों को छोड़कर केवल कृष्ण को ही चुना।

प्रतीक्षा में गोपियों ने कृष्ण मिलन का लम्बा इंतजार किया और अंत में श्रीकृष्ण ने गोपियों के प्रेम की परीक्षा लेते हुए उन्हें घर लौट जाने को कहा। किन्तु गोपियों ने कृष्ण को छोड़कर वापस लौट जाना स्वीकार नहीं किया तो प्रेम के अंतिम पड़ाव में सफल हो गईं और भगवान श्रीकृष्ण को पा लिया।

आयोजक रमेश नारनौली ने बताया कि शुक्रवार को सुदामा चरित्र, दत्तात्रेयोपाख्यान, शुकदेव की कथा के बाद व्यास पूजन होगा।