
Saurav Ganguly
कोलकाता। भारतीय क्रिकेट में जंबो के नाम से मशहूर अनिल कुंबले को गुरुवार को टीम इंडिया को नया कोच बना दिया गया है। उन्हें यह पद एक साल के लिए सौंपा गया है। लेकिन आप जरा सोचिए कुछ समय पहले जो नाम कोच की पद की रेस में चर्चा में भी नहीं था वो अचानक शास्त्री जैसे दिग्गज को पछाड़ते हुए यह बाजी कैसे मार गया।
एक अखबार की रिर्पोट के अनुसार कुंबले को कोच बनाने में बंगाल क्रिकेट एसोशियसन के अध्यक्ष और पूर्व कप्तान सौरव गांगुली और पूर्व चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा ने अहम भूमिका निभाई है। बता दें कि एक साल पहले गांगुली कोच पद की दौड़ में रवि शास्त्री से पिछड़ गए थे। इसके बाद गांगुली ने पूरी कोशिश की शास्त्री को दूसरा मौका न मिले क्योंक गांगुली और शास्त्री के संबंध भी ज्यादा बेहतर नहीं है। दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट द्वारा बीसीसीआई में सुधार के गठित कमेटी के अध्यक्ष जस्टिस लोढ़ा ने भी कुंबले को यह पद दिलाने में परोक्ष भूमिका निभाई है।
जस्टिस लोढ़ा कमेटी ने भारतीय क्रिकेट में सुधार के लिए कई सुझाव दिए थे उनमें से एक सुझाव खिलाडिय़ों की असोसिएशन बनाने का था। कुंबले को भी इस असोसिएशन का सदस्य चुना जाना था। बीसीसीआई ने कुंबले को कोच बनाकर एक तीर से कई निशाना साधे है। पहला, कोच बनने के बाद कुंबले इस असोसिएशन के सदस्य नहीं बन सकते और दूसरा वह अब पूरी तरह स्वतंत्र होकर फैसला नहीं कर पाएंगे। एक तरह से यह कहना भ्भी गलत नहीं होगा कि अगर गांगुली कुंबले के कोच बनने के लिए इतनी भ्भागदौड़ नहीं करते तो शास्त्री का कोच बनना लगभ्भग तय था।
शास्त्री को दूसरा मौका दिए जाने की सबसे बड़ी वजह यह भ्भी थी कि उनके पहले के कार्यकाल में टीम इंडिया का परफोमेंस शानदार रहा था। बता दें शास्त्री को 18 माह के लिए टीम इंडिया का डाइरेक्टर बनाया गया था। इस दौरान भारतीय टीम टेस्ट में नंबर वन बनी, वनडे और टी20 में दूसरे पायदान तक पहुंची। भारतीय टीम वर्ल्ड कप 2015 और वर्ल्ड टी20 के सेमीफाइनल में पहुंची। इसके साथ ही भारतीय टीम ने एशिया कप जीता, साउथ अफ्रीका के खिलाफ घरेलू सीरीज पर कब्जा किया, श्रीलंका को उसके घर में हराया। लेकिन एक चीज जो शास्त्री हक में नहीं थी वो ये कि गांगुली का विश्वास।
सौरभ गांगुली और रवि शास्त्री के संबंध कभी अच्छे नहीं रहे। दो दिन पहले जब रवि शास्त्री ने क्रिकेट अडवाइजरी कमिटी (सीएसी) के सामने अपना प्रजेंटेशन दिया तब गांगुली वहां मौजूद भी नहीं थे। और वह भी तब सीएसी ने गांगुली के कहने पर ही इस इंटरव्यू का स्थान मुंबई से बदलकर कोलकाता किया था। जब रवि शास्त्री, जो इन दिनों बैंकॉक में छुट्टियां मना रहे हैं, विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सीएसी से जुड़े तब गांगुली वहां मौजूद नहीं थे। बीसीसीआई के सदस्यों का कहना है कि गांगुली को अपनी किताब के लोकापर्ण के कार्यक्रम में जाना था। शास्त्री का इंटरव्यू सचिन तेंडुलकर, वीवीएल लक्ष्मण और संजय जगदाले ने लिया।
सीएसी में कुंबले और शास्त्री को लेकर गहरा मतभेद था। लेकिन गांगुली पूरी तरह से पूर्व लेग स्पिनर के पक्ष में थे। जहां एक ओर अन्य सदस्यों का कहना था कि शास्त्री ने अपना पक्ष मजबूती से रखा है। उनके कार्यकाल में टीम ने कई सफलताएं हासिल की हैं। ऐसे में उन्हें हटाने के लिए ठोस कारण होना चाहिए। वहीं दूसरी ओर गांगुली शास्त्री के पक्ष में नहीं थे। कुंबले चूंकि आवश्यक शर्तों (जिनमें से एक, किसी राज्य या देश की टीम की कोचिंग का अनुभव) को पूरा नहीं करते थे इसलिए उन्हें 21 लोगों की शॉर्टलिस्ट में शामिल नहीं किया गया था। लेकिन गांगुली के दबाव में ही उन्हें इस सूची में जगह मिली।
Published on:
24 Jun 2016 07:18 pm
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