
ग्रामीण के साथ शहरी इलाके में भी चपेट में आ रहे बच्चे
ग्रामीण के साथ शहरी इलाके में भी चपेट में आ रहे बच्चे
सतना. ग्रामीण इलाकों के साथ ही कुपोषण का दंश शहरी क्षेत्रों में भी गहराता जा रहा है। मैहर नगर पालिका के वार्ड 14 निवासी साधना ङ्क्षसह का 1 साल का बेटा रेयांश इसका जीवंत उदाहरण है। रेयांश गंभीर रूप से कुपोषण का शिकार है। उसका वजन मात्र 4 किलोग्राम है, जो सामान्य से काफी कम है। इसके अलावा वह हार्निया की बीमारी से भी पीडि़त है। इससे उसकी तकलीफें और अधिक बढ़ गई हैं। ङ्क्षचताजनक पहलू यह है कि परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण रेयांश का समुचित इलाज नहीं हो पा रहा है।
सामने आई हकीकत
रेयांश की मां साधना ने बताया कि जन्म के समय उसका वजन 3.500 किलोग्राम था। एक साल के भीतर यह केवल 500 ग्राम ही बढ़ा। हमने कई बार डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ। एक साल की उम्र में बच्चे का सामान्य वजन लगभग 8-10 किलोग्राम होना चाहिए। हार्निया की समस्या के कारण उसकी हालत और भी दयनीय हो गई है।
मैहर में 2047 बच्चे कुपोषण के शिकंजे में
रेयांश अकेला ऐसा बच्चा नहीं, जो इस गंभीर समस्या से जूझ रहा। मैहर जिले की तीन परियोजनाओं अमरपाटन, रामनगर और मैहर में 2047 बच्चे कुपोषण के शिकंजे में हैं। आंकड़े दर्शाते हैं कि शहरी और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में कुपोषण एक विकराल समस्या बन चुका है। सरकारी स्तर पर पोषण योजनाएं और आंगनबाड़ी सेवाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन ये जमीनी स्तर पर उतनी प्रभावी नहीं हो पा रही हैं, जितनी होनी चाहिए। गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक सही पोषण और स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं पहुंच पा रही हैं। इसका खामियाजा मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।
सतना रेफर
रेयांश की बिगड़ती हालत देख पहले मैहर के पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया गया था। अब उसे सतना जिला अस्पताल के एनआरसी में रेफर कर दिया गया है।
मैहर में कुपोषण
परियोजना कुपोषित
अमरपाटन 613
मैहर 325
मैहर-2 904
रामनगर 205
मामला संज्ञान नहीं, आकर देखवता हूं
मैं भोपाल में वर्कशॉप में शामिल होने आया हूं। मुझे इस बच्चे के बारे में जानकारी नहीं है। वापस आकर दिखवाता हूं।
राजेन्द्र बागरे, प्रभारी डीपीओ मैहर
Published on:
04 Mar 2025 07:01 pm
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