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संपादकीय: रेल प्रशासन व जनता की सजगता ही सुरक्षा की ढाल

पहलगाम आतंकी हमले की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) ने जो चार्जशीट दाखिल की है, उसमें भी इस बात का खुलासा है कि आतंकियों को पनाह देने के बजाय स्थानीय लोगों ने समय रहते उनकी जानकारी सुरक्षा बलों को दी होती तो निर्दोष लोगों की जान बच सकती थी। रेलवे सुरक्षा से जुड़ा मसला भी ऐसा ही है।

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सुरक्षा, संरक्षा और समय' के ध्येय वाक्य वाले भारतीय रेलवे में रेलों और इनमें सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े खतरे के जो संकेत मिले हैं वे चिंताजनक हैं। ये संकेत देश भर की ट्रेनों में आगजनी की कोशिशों के मामलों से जुड़ी घटनाओं के हैं। रेलवे की प्रारंभिक जांच में पता चला है कि इनमें से कुछ सामान्य दुर्घटनाएं नहीं थीं बल्कि सुनियोजित रूप से शरारती तत्वों ने इन्हें अंजाम दिया था। यह भी आशंका जताई गई कि यह किसी षड्यंत्र से जुड़ी आपराधिक वारदातें भी हो सकती हैं। ऐसी घटनाओं में आतंकी गतिविधियों से भी इनकार नहीं किया जा सकता। भारतीय रेलवे देश की जीवन रेखा भी इसीलिए मानी जाती है क्योंकि प्रतिदिन करोड़ों यात्री रेलों पर ही निर्भर हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा पर कोई खतरा मंडराता है तो चौकसी की जरूरत और बढ़ जाती है।

इसमें दो राय नहीं कि रेलवे कोच में आग लगने की घटनाओं पर अलार्मिंग सिस्टम से समय रहते काबू पाना काफी संभव हो गया है। चलती ट्रेन में आग की वजह ज्वलनशील पदार्थों की कोच में मौजूदगी अथवा शॉर्टसर्किट होना तो सामने आती रही है। लेकिन पश्चिम बंगाल में दो माह पहले रेलवे प्लेटफॉर्म पर खड़ी ट्रेन के कोच में आग लगी तब भी यह आशंका जताई गई थी कि आग कोच के भीतर से नहीं लगी बल्कि किसी ने जानबूझ कर बाहर से आग लगाई है। पिछले दिनों उत्तरप्रदेश में पुलिस ने एक राष्ट्रविरोधी साजिश से जुड़े एक गिरोह का पर्दाफाश किया था। यात्रियों के जीवन को खतरे में डालने के लिए ये सीमा पार बैठे अपने आकाओं के निर्देश पर रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में जुटे थे। आगजनी की ऐसी घटनाओं में आतंकी साजिश भी हो सकती है, इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। भारतीय रेलों में ज्वलनशील पदार्थ सफर में साथ ले जाने पर कानूनी प्रतिबंध है। लेकिन यह भी एक तथ्य है कि हमारे यहां रेल आम आदमी की सवारी है। कोई यात्री बीड़ी-सिगरेट व माचिस साथ ले जाए तो विमान सेवाओं की तरह इन पर प्रतिबंध को लागू करने की व्यवस्था को कड़ा करते हुए हर यात्री की सुरक्षा जांच करना मुश्किल भरी हो सकता है। पहलगाम आतंकी हमले की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) ने जो चार्जशीट दाखिल की है, उसमें भी इस बात का खुलासा है कि आतंकियों को पनाह देने के बजाय स्थानीय लोगों ने समय रहते उनकी जानकारी सुरक्षा बलों को दी होती तो निर्दोष लोगों की जान बच सकती थी। रेलवे सुरक्षा से जुड़ा मसला भी ऐसा ही है।

रेलवे के साथ-साथ नागरिकों की भी यह जिम्मेदारी है कि वे भी सजग रहें। सुरक्षा नियमों का पालन तो सफर के दौरान करें ही, कहीं कोई संदिग्ध गतिविधियां नजर आए तो सुरक्षा बलों को सूचित करें। सुरक्षा बलों को भी अपना व्यवहार ऐसा रखना होगा जिसमें उन तक आम आदमी की पहुंच बिना डर और संकोच के हो सके। आमतौर पर किसी आपदा में फंसने के डर से लोग सुरक्षा बलों को जानकारी देने में हिचकते हैं।