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Travelogue: बाकू जहां आज भी महकते हैं भारतीय विरासत के प्रतीक

अजरबैजान का एक उपनाम ‘आग की भूमि’ भी है। बाकू से एक घंटे की दूरी पर एक अग्नि मंदिर है जिसे स्थानीय लोग ‘आतेशगाह’ कहते हैं। यह मंदिर अजरबैजान में भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। आतेशगाह उत्तर-पश्चिमी भारतीय उपमहाद्वीप के उन लोगों के लिए एक प्रमुख धार्मिक-दार्शनिक केंद्र था, जो ‘ग्रैंड ट्रंक रोड’ के रास्ते कैस्पियन सागर क्षेत्र के साथ व्यापार में शामिल थे।

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Nitin Kumar

Sep 12, 2023

रहस्यमयी से लगने वाले शहर बाकू में सार्वजनिक स्थल पर शतरंज खेलते लोग।

रहस्यमयी से लगने वाले शहर बाकू में सार्वजनिक स्थल पर शतरंज खेलते लोग।

विनय कौड़ा
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ
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अजरबैजान की राजधानी बाकू में एक अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में भाग लेने का अवसर मुझे पिछले महीने मिला, जिसमें चुनिंदा विशेषज्ञों द्वारा मध्य एशिया और कैस्पियन सागर क्षेत्र की भू-राजनीति पर अफगानिस्तान में तालिबान के शासन की वापसी और रूस-यूक्रेन युद्ध के प्रभाव पर चर्चा की गई। कभी पूर्व सोवियत संघ का भाग रहा अजरबैजान एक मुस्लिम बाहुल्य गणराज्य और धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है। कैस्पियन सागर के किनारे स्थित बाकू एक अविस्मरणीय शहर है। रहस्यमयी-सा लगने वाला बाकू सोवियतकालीन विशाल इमारतों, 21वीं सदी की सोच से प्रेरित वास्तुशिल्प और करीब एक शताब्दी पुराने बुटीक, कॉफी शॉप और लुभावने रेस्तरां से लबरेज है।

किसी दौर में बाकू में दुनिया के लगभग आधे पेट्रोलियम पदार्थों का उत्पादन होता था। रातोंरात करोड़पति बने लोगों ने तब शानदार हवेलियों, आवासों तथा सार्वजनिक भवनों की एक शृंखला का निर्माण कराया। इनमें से कई तो बाकू के प्रख्यात इस्तिग्लिय्यत मार्ग के किनारे स्थित हैं, जो कि उत्तरी शहर की मजबूत दीवार के समानांतर है। यूनेस्को-सूचीबद्ध शहर का पुराना हिस्सा, जिसे ‘इचेरी शहर’ के नाम से भी जाना जाता है, में एक बहुत ही अलग बाकू का नजारा मिलता है। इस जीवंत इलाके में प्राचीन मस्जिदों, कला-दीर्घाओं, मिनी-रेस्तरां और कई बुटीक होटलों से युक्त मध्ययुगीन गलियों का एक जादुई जाल बिछा हुआ है। पुराने शहर की कारवां सराय और कालीनों की दुकानें मैदान टॉवर के बगल में मिलती हैं। सबसे ज्यादा नजर आने वाली 30 मंजिला गगनचुंबी इमारतों की एक तिकड़ी है, जिन्हें ‘फ्लेम टावर्स’ के नाम से जाना जाता है।

अजरबैजान का एक उपनाम ‘आग की भूमि’ भी है। बाकू से एक घंटे की दूरी पर एक अग्नि मंदिर है जिसे स्थानीय लोग ‘आतेशगाह’ कहते हैं। यह मंदिर अजरबैजान में भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है क्योंकि शिलालेखों के आधार पर यह सिद्ध हो चुका है कि आतेशगाह का उपयोग हिंदू, सिख और संभवत: पारसी पूजा स्थल के रूप में किया जाता था। आतेशगाह उत्तर-पश्चिमी भारतीय उपमहाद्वीप के उन लोगों के लिए एक प्रमुख धार्मिक-दार्शनिक केंद्र था, जो ‘ग्रैंड ट्रंक रोड’ के रास्ते कैस्पियन सागर क्षेत्र के साथ व्यापार में शामिल थे। यह पंचकोणीय परिसर, जिसमें भिक्षुओं के लिए कक्षों से घिरा एक आंगन और बीच में एक चतुष्कोणीय-वेदी है, 17वीं और 18वीं शताब्दी के दौरान बनाया गया था। मंदिर द्वार की कई शिलापट्टियों पर देवनागरी और गुरुमुखी में ‘श्री गणेशाय नम:’ एवं ‘ज्वाला जी‘ स्पष्ट रूप से अंकित है। इलाके में पेट्रोलियम संसाधनों के लम्बे दोहन के बाद प्राकृतिक रूप से जलने वाली शाश्वत लौ 1969 में बुझ गई थी। हालांकि अब यह शहर से पाइप द्वारा लाई जाने वाली गैस से जलती है।

इस बात का उल्लेख प्रासंगिक है कि मध्य एशिया एवं कैस्पियन क्षेत्र के लोगों से भारत की भू-सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संपर्कों की एक लंबी परंपरा रही है जिसमें पाकिस्तान के जन्म के बाद एक दरार आ गई है। बाकू हवाई अड्डे से ‘हेदर अलीयेव सेंटर’ आसानी से देखा जा सकता है जो विश्वविख्यात वास्तुकार जाहा हदीद की सबसे प्रसिद्ध कृति है। इसका नाम अजरबैजान के पूर्व राष्ट्रपति हेदर अलीयेव के नाम पर रखा गया है, जिनके बेटे वर्तमान राष्ट्रपति हैं। इसके अंदर दिलचस्प संग्रहालयों, प्रदर्शनी स्थलों और शानदार ध्वनिकी के साथ एक कॉन्सर्ट हॉल है। निस्संदेह वर्तमान राष्ट्रपति और उनके दिवंगत पिता ने देश के वर्तमान इतिहास को जबरदस्त आकार दिया है।