
गोवा में नजर आए बेताल, ग्रामीण मानते हैं रक्षक देव
शिवा यादव
अनसुनी कहानियां चुनता और बुनता स्टोरीटेलर
ज ब भी कोई गोवा के बारे में सोचता है तो सबसे पहली चीज जो दिमाग में आती है, वह है समुद्र तट और पार्टियां। लेकिन, आज मैं आपको गोवा का एक ऐसा पहलू दिखाऊंगा जो बहुत कम लोग जानते हैं। आपने बचपन में विक्रम और बेताल की कहानियां तो सुनी होंगी ना? क्या होगा अगर मैं आपको बताऊं कि मैं बेताल से गोवा में मिला था!
हां, गोवा के हर गांव और महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ तटीय हिस्सों में भी बेताल मंदिर हैं, जो एक रक्षक देवता के रूप में हैं। माना जाता है कि वे गांव को किसी भी प्रकार की आपदाओं या समस्याओं से बचाते हैं। गांव के बुजुर्गों ने मुझे बताया कि बेताल रात के समय गांव में घूमते हैं और गांव पर नजर रखते हैं। वे ऐसी घटनाएं भी सुनाते हैं, जब एक व्यक्ति जंगल में खो गया था तो बेताल ने उसकी मदद की और उस व्यक्ति को उसके घर तक छोडऩे गया। यही कारण है कि ग्रामीण अपने स्थानीय बेताल को अपना मानते हैं और उसे उसकी पसंद की चीजें देते हैं। जैसे- चप्पल, बीड़ी, स्थानीय शराब और भोजन। ग्रामीणों का मानना है कि समय के साथ चप्पलें घिसने लगती हैं, क्योंकि बेताल रात में उनका इस्तेमाल करता है।
इतने सारे बेतालों में से एक बेहद दिलचस्प बेताल है 'नाग्रो' बेताल या नग्न बेताल, जिसकी मूर्ति कैनकोना तालुका के लोलीम गांव में खुले में रखी हुई है। इस बेताल की मूर्ति देखने में विशाल और डरावनी है और उसके विशाल कंधे उर्वरता और समृद्धि का प्रतीक माने जाते हैं। हालांकि यह बेताल वह नहीं हैं जो हमने अपनी कहानियों में पढ़ा है, लेकिन दोनों के बीच सामान्य पहलू उनका नाम है और यह कि वे दोनों ऊर्जा रूप माने जाते हैं। इन सभी बेतालों की पूजा गोवा के आदिवासी समुदायों द्वारा की जाती है। अगर आप बारीकी से देखेंगे, तो इनमें आपको भगवान भैरव, जो एक शिवगण हैं, के साथ कई समानताएं मिलेंगी। गोवा के लगभग हर गांव, जिनमें सबसे लोकप्रिय कैलंगुट बीच, पालोलेम बीच आदि शामिल हैं, के अपने-अपने बेताल मंदिर हंै। बेताल उस गांव का रक्षक देवता है, लेकिन बाहर के ज्यादातर लोगों को इस बारे में जानकारी नहीं है।
बाहरी लोगों की रुचि केवल समुद्र तटों और पार्टियों में रहती है, लेकिन वे भारत की ऐसी खूबसूरत छिपी संस्कृतियों को देखना भूल जाते हैं। मुझे आशा है कि हम सभी इन छिपी हुई संस्कृतियों को देखने और खोजने के लिए थोड़ा प्रयास करेंगे और अपने दोस्तों और परिवार के साथ साझा करेंगे। जल्द ही भारत की अद्भुत और विविध संस्कृतियां विश्व मानचित्र पर फिर से चमकेंगी। मैं अपना यह संकल्प तब तक जारी रखूंगा। बेताल हम सबको आशीर्वाद दें! अगली कहानी तक.. खुशियां, ऑलवेज !
Published on:
22 Aug 2023 08:43 pm
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