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Video : आमा तालाब में दो दिन से तड़प-तड़पकर मर रही हजारों मछलियां

बड़ी संख्या में जुनवानी रोड वार्ड-7 आमा तालाब में प्रतिमा विसर्जन की वजह से पानी का मैलापन बढ़ गई है।

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भिलाई

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Dakshi Sahu

Sep 11, 2017

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भिलाई. निस्तारी तालाब में प्रतिमा विसर्जन मछलियों के लिए आफत साबित हो रही है। बड़ी संख्या में जुनवानी रोड वार्ड-7 आमा तालाब में प्रतिमा विसर्जन की वजह से पानी का मैलापन बढ़ गई है। पानी के उपर केमिकल की परत भी जम गई है। इस वजह से मछलियां तड़प कर मरने लगी हैं।

मरी हुई मछलियों को बाहर निकाला
पिछले तीन दिन में बड़ी संख्या में मछलियों की मौत भी हो चुकी है। सोमवार को भी छत्तीसगढ़ निषाद मतस्य उद्योग सहकारी समिति मर्यादित कोहका के सदस्यों ने प्रतिमाओं के अपशिष्ट के साथ मरी हुई मछलियों को बाहर निकालने में जुटा हुआ है।

चार दिन तक नहीं थी शिकायत
छत्तीसगढ़ निषाद मतस्य उद्योग सहकारी समिति मर्यादित कोहका की अध्यक्ष दुलेश्वरी निषाद का कहना हैकि मंगलवार तक दिन तक मछली मरने की कोई शिकायत नहीं थी।

पानी से आ रही थी बदबू
गणेश की प्रतिमा विसर्जन होने के बाद शनिवार की दोपहर को अचानक मछलियां उपर आ गई। मछली मुंह उठाकर सांस लेने लगीथी। शाम को तेज हवा के साथ बारिश हुई तो मछलियां नीचे चली गई। सुबह घाट के पास जाकर देखा, तो मरी हुई मछलियां पानी में तैर रही थी। पानी के ऊपर लाल रंग की तैलीय परत भी दिखाई दे रही थी। पानी से बदबू भी आ रही है।

5 हजार से अधिक प्रतिमा विसर्जित
महादेव निषाद का कहना है कि लगभग पांच एकड़ क्षेत्रफल वाले आमा तालाब में छोटी बड़ी ५ हजार से अधिक प्रतिमाएं विसर्जित हुई है। बड़ी संख्या में प्रतिमा विसर्जन की वजह से यह नौबत आई है। विसर्जन के बाद मिट्टी पानी में घुलकर नीचे बैठ गई। रंगने के लिए इस्तेमाल की गई केमिकल उपर आ गई।

प्रतिमा विसर्जन की व्यवस्था
पानी के उपर लाल रंग की परत जम गई। इस वजह से मछलियां मर रही है। उनका यह भी कहना हैकि पिछले साल भी निगम ने प्रतिमा विसर्जन के लिए आमा तालाब को चिन्हित कियाथा। इसके अलावा दर्री तालाब, दाउ बाड़ा, भेलवा तालाब और राधिका नगर तालाब में प्रतिमा विसर्जन की व्यवस्था की गई थी। इस तरह की समस्या भी नहीं आई थी।







2016 में लिया है लीज पर
समति ने २०१६ में आमा तालाब को लीज पर लिया है। अगस्त में रोहू, कतला, मिरकाल सहित अन्य मछलियों का बीज डाली है। सालभर में यह मछलियोंं का साइज एक से दो किलोग्राम वजन की हो गई है। समिति के लोगों का कहना है कि प्रजनन का समय होने की वजह से जाल नहीं डाला है।

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