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कृषि को बाजार और डिजिटल तकनीक से जोड़ने की जरूरत

ब्रिक्स प्लस में शामिल देश ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ-साथ मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया दुनिया की बड़ी आबादी, विशाल कृषि भूमि और खाद्य उत्पादन क्षमता का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए कृषि, व्यापार और जलवायु से जुड़े इनके फैसलों का सीधा असर समूची वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर पड़ता है।

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भारत

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Rakhi Hajela

Jun 12, 2026

BRICKS

BRICKS

डॉ. एम.एल. जाट, महानिदेशक आइसीएआर एवं
डॉ. नवीन पी. सिंह, सहायक महानिदेशक आइसीएआर

दुनिया की कृषि आज कठिन दौर से गुजर रही है। जलवायु परिवर्तन, जल संकट, बढ़ती लागत, बाजार के उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव ने खाद्य सुरक्षा के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। दूसरी ओर, बढ़ती आबादी के लिए पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना, किसानों की आय बढ़ाना और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना भी उतना ही आवश्यक है। ऐसे समय में ब्रिक्स प्लस देशों का समूह वैश्विक कृषि और खाद्य सुरक्षा को नई दिशा देने की क्षमता रखता है। ब्रिक्स प्लस में शामिल देश ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ-साथ मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया दुनिया की बड़ी आबादी, विशाल कृषि भूमि और खाद्य उत्पादन क्षमता का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए कृषि, व्यापार और जलवायु से जुड़े इनके फैसलों का सीधा असर समूची वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर पड़ता है।

खेती संस्कृति और जीवनशैली का हिस्सा
इन देशों में खेती सिर्फ एक धंधा नहीं, बल्कि वहां की संस्कृति और जीवनशैली का हिस्सा है। भारत में सदियों से फसल विविधता और सामुदायिक खेती की समृद्ध परंपरा रही है। ब्राजील ने उष्णकटिबंधीय कृषि में सफलता हासिल की है, रूस वैश्विक खाद्यान्न आपूर्ति का महत्त्वपूर्ण आधार है, जबकि चीन कृषि आधुनिकीकरण और डिजिटल तकनीकों में तेजी से आगे बढ़ा है। दक्षिण अफ्रीका तथा अन्य साझेदार देशों के पास शुष्क खेती और जल प्रबंधन का महत्त्वपूर्ण अनुभव है। यही विविधता ब्रिक्स प्लस की सबसे बड़ी ताकत है। इसके दम पर यह समूह नमी वाले इलाकों से लेकर ठंडे मैदानों, सूखे इलाकों, पहाड़ों, तटीय क्षेत्रों और छोटे किसानों की जरूरतों के हिसाब से समाधान तैयार कर सकता है।

साझा लक्ष्य स्पष्ट
इन देशों का साझा लक्ष्य भी स्पष्ट है- खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना, किसानों की आय बढ़ाना, ग्रामीण रोजगार सृजित करना, कृषि व्यापार को मजबूत करना, नवाचार को बढ़ावा देना, महिलाओं और युवाओं को सशक्त बनाना और जमीन, पानी व जैव-विविधता का संरक्षण करना । इसके लिए कृषि को केवल उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि एक ऐसी समग्र खाद्य प्रणाली के रूप में देखना होगा जो पोषण, बाजार और डिजिटल तकनीक से जुड़ी और जलवायु अनुकूल व पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार हो।

लगातार बढ़ रही भारत की भूमिका
भारत आज इस परिवर्तन का एक महत्त्वपूर्ण उदाहरण है। देश न केवल खाद्यान्न, दुग्ध, फल, सब्जियों और दलहनों के उत्पादन में अग्रणी है, बल्कि कृषि अनुसंधान, डिजिटल सेवाओं और नवाचार के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। विश्व की सबसे बड़ी सार्वजनिक खाद्य सुरक्षा प्रणाली के संचालन के अलावा कृषि निर्यात में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है। छोटे किसानों और सीमित संसाधनों वाली परिस्थितियों में हासिल की गई यह सफलता विकासशील देशों के लिए प्रेरक मॉडल बन सकती है।

पहली प्राथमिकता खाद्य और पोषण सुरक्षा
ब्रिक्स प्लस के सामने पहली प्राथमिकता खाद्य और पोषण सुरक्षा होनी चाहिए। यद्यपि कई सदस्य देशों ने उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हासिल की है, फिर भी कुपोषण, असंतुलित आहार और खाद्य कीमतों में उतार-चढ़ाव की चुनौतियां बनी हुई हैं। भारत के सार्वजनिक वितरण तंत्र और डिजिटल प्लेटफॉर्म का अनुभव भी इस दिशा में उपयोगी हो सकता है। दूसरी बड़ी चुनौती जलवायु परिवर्तन है। सूखा, बाढ़, हीटवेव और जल संकट खेती को प्रभावित कर रहे हैं। संरक्षण कृषि, सूक्ष्म सिंचाई, कृषि वानिकी और जलवायु-अनुकूल तकनीकों के प्रसार में ब्रिक्स प्लस महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। तीसरी प्राथमिकता कृषि व्यापार और आपूर्ति शृंखला की मजबूती है। यदि सदस्य देश गुणवत्ता मानकों, प्रमाणन व्यवस्था, भंडारण और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाएं तो आपसी व्यापार कहीं अधिक सुगम और सुरक्षित बन सकता है। चौथी प्राथमिकता नवाचार है। भविष्य की कृषि नवाचारों से तय होगी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जीनोम एडिटिंग, ड्रोन, सेंसर और डिजिटल सलाह प्रणालियां खेती का स्वरूप बदल रही हैं। भारत में पहले ही 7,000 से अधिक कृषि एवं संबद्ध स्टार्टअप पंजीकृत हैं। ऐसे में ब्रिक्स प्लस वैज्ञानिकों, उद्यमियों, निवेशकों, इनक्यूबेटरों और किसान संगठनों को जोड़ कर कृषि नवाचारों के लाभ करोड़ों किसानों तक पहुंचा सकता हैं। पांचवीं प्राथमिकता ग्रामीण परिवर्तन है। ग्रामीण विकास को कृषि से अलग नहीं किया जा सकता। सडक़, बिजली, इंटरनेट, प्रसंस्करण इकाइयां, महिला उद्यमिता और युवाओं के लिए नए अवसर ही कृषि को भविष्य की पीढिय़ों के लिए आकर्षक बनाएंगे।

ब्रिक्स की असली शक्ति सामूहिक अनुभव और संसाधनों को साझा करने में
भारत की ताकत यह है कि हमारे पास प्रयोगशाला में अर्जित ज्ञान को सीधे किसान के खेत तक पहुंचाने का बेहतरीन ढांचा है। भारत इस मंच के जरिए डिजिटल कृषि ढांचा, बीज बैंक और मौसम की सटीक चेतावनी देने वाला एक साझा डेटा प्लेटफॉर्म बना सकता है। ब्रिक्स प्लस की वास्तविक शक्ति किसी एक देश की सफलता में नहीं, बल्कि सामूहिक अनुभव और संसाधनों को साझा करने में है। विज्ञान, बाजार और नीति को एक साथ जोडक़र यह समूह भूख, कुपोषण और जलवायु संकट जैसी वैश्विक चुनौतियों का प्रभावी समाधान प्रस्तुत कर सकता है। वैश्विक कृषि का भविष्य केवल अधिक उत्पादन में नहीं, बल्कि टिकाऊ संसाधनों, पोषण-सुरक्षा, सशक्त किसानों और न्यायपूर्ण बाजार व्यवस्था में निहित है। ब्रिक्स प्लस के पास इस दिशा में नेतृत्व करने का अवसर भी है और क्षमता भी। भारत का संदेश स्पष्ट है-कृषि को सीमाओं से ऊपर उठाकर साझा ज्ञान, साझा समृद्धि और साझा सुरक्षा का आधार बनाना होगा। भारत के नेतृत्व और ब्रिक्स प्लस सहयोग के माध्यम से कृषि केवल खाद्य उत्पादन का स्रोत ही नहीं, बल्कि लचीलेपन, समृद्धि और वैश्विक विश्वास की मजबूत नींव भी बन सकती है।