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मन के लड्डू

आपने मोतीचूर के, गोंद के, बेसन के, मूंग के, सूजी के लड्डू तो खाये ही होंगे लेकिन क्या कभी मन के लड्डू खाये हैं?

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Mukesh Kumar Sharma

Mar 16, 2016

Agriculture

Agriculture

आपने मोतीचूर के, गोंद के, बेसन के, मूंग के, सूजी के लड्डू तो खाये ही होंगे लेकिन क्या कभी मन के लड्डू खाये हैं? नहीं खाये। आप भाग्यशाली हैं यहां तो ससुर बचपन से ही मन के लड्डू खाने की आदत पड़ चुकी है। समझ गए न आप कि मन के लड्डू कैसे खाये जाते हैं। मान लीजिए आपकी जेब में धेला नहीं है और सामने दुकान पर ताजा-ताजा बनते लड्डू थाली में जमे हैं। अब हलवाई आपके फूफाजी तो हैं नहीं जो आपको दोना भरके लड्डू थमा कर कहेंगे- ले बेटा।


जी भर के खा। तब आपको अपने मन में ही सोचना पड़ेगा कि आपके हाथ में लड्डू है और आप स्वाद ले लेकर उन्हें खा रहे हैं। आदमी मजबूरी में ही मन के लड्डू खाता है लेकिन हमारे शिक्षा जगत के गुरुओं को देखो। उन्होंने एक परीक्षा में आदिवासी बच्चों से 'सूजी के लड्डूÓ कैसे बनते हैं विषय पर एक निबन्ध लिखवा लिया। यह तो ऐसे ही है जैसे कोई हमसे कहे कि कटरीना कैफ के साथ स्पेन के समुद्र तट पर बितायी छुट्टी पर एक लेख लिखो। अब इस सवाल का जवाब हम कैसे लिखेंगे? पता नहीं हमारे बुद्धिजीवी हमेशा एक खामख्याली में ही कैसे जीते हैं? एक ग्रामीण बच्चा जिसे बचपन से लेकर किशोरावस्था तक कभी भरपूर पोषणयुक्त भोजन तक नहीं मिला, जिसने कभी अपनी मां को सूजी के तो छोड़ो, बेसन के लड्डू तक बनाते नहीं देखा उससे आप पूछ रहे हैं कि बादाम, काजू, किशमिश, पिस्ता डले हुए देसी घी के लड्डू कैसे बनेंगे? एक किस्सा सुनाएं।


जब हमने लिखना शुरू किया था तो एक बड़े समाचार पत्र से हमारे पास एक पत्र आया कि आप अपने प्रदेश के ऊंटों के बारे में एक लेख लिख दें। हमने उनसे कहा कि साहब। हम प्रदेश के जिस हिस्से में रहते हैं वहां ऊंटों का नामोनिशान नहीं है अलबत्ता बकरियां खूब हैं। आप चाहे तो हम बकरियों पर एक जोरदार लेख लिख सकते हैं। उनका कोई उत्तर नहीं आया पर कुछ दिनों बाद हमारे ही एक मित्र ने ऊंटों पर ऐसा जोरदार लेख लिखा मानो वे पैदाइशी रैबारी हो। अपने देश में यही हो रहा है।


जिस अधिकारी को पता ही नहीं कि खेती कैसे की जाती है वह प्रदेश का कृषि सचिव बना दिया जाता है। जिसे संस्कृति का ज्ञान होता है उसे भेड़ ऊन विभाग में पदस्थापित कर दिया जाता है। नेताओं की योग्यताओं के बारे में तो कहना ही क्या? बहरहाल आप एक निबन्ध लिखें, विषय है- आप अपने और फिल्म तारिका मिस वसु के दाम्पत्य जीवन का दो पृष्ठों में वर्णन करें? फूट रहे हैं न मन में लड्डू। -राही