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प्रसंगवश: बस्तर रेजिमेंट के लिए पहल स्वागतयोग्य

वामपंथी उग्रवाद और नक्सलवाद के खिलाफ मोर्चा लेने वाले बस्तर की मिट्टी में रचे-बसे इस साहस व युद्ध कौशल को अब एक और नई दिशा व पहचान देने की जरूरत है।
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रायपुर

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Anupam Rajiv Rajvaidya

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Updated: 31 Jul 2026, 2:03 AM IST

Bastar Regiment

बस्तर के लोगों और युवाओं के साहस से पूरा देश वाकिफ है। वामपंथी उग्रवाद और नक्सल हिंसा से करीब चार दशक तक पूरा बस्तर अंचल पीड़ित रहा है। इन चार दशकों में वहां के लोगों ने विषम परिस्थितियों का पूरे साहस के साथ सामना किया। वामपंथी उग्रवाद और नक्सलवाद के खिलाफ वहां के युवा मोर्चा लेते रहे। आज अगर बस्तर नक्सल मुक्त हुआ है तो नक्सलमुक्ति की इस लड़ाई में जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) और बस्तर बटालियन का बहुत बड़ा योगदान है। इन्होंने सुरक्षाबलों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इतिहास में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज करा दिया है। बस्तर की मिट्टी में रचे-बसे इस साहस व युद्ध कौशल को अब एक और नई दिशा व पहचान देने की जरूरत है। ऐसा नहीं है कि बस्तर के युवा अभी सेना में अपनी सेवाएं नहीं दे रहे, वे अग्निवीर सहित विभिन्न सैन्य इकाइयों के माध्यम से देश की सेवा कर रहे हैं। अगर उनके अनुभव और युद्ध कौशल को बस्तर रेजिमेंट के रूप में पहचान मिल जाए तो नक्सल मुक्त बस्तर नया अध्याय लिख सकता है।

छत्तीसगढ़ सरकार ने इसके लिए पहल भी कर दी है। प्रदेश के गृहमंत्री ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है कि भारतीय सेना में बस्तर रेजिमेंट का गठन किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री के मुताबिक राज्य सरकार की इस आधिकारिक मांग पर रक्षामंत्री की ओर से सकारात्मक संकेत आया है कि केंद्र सरकार इस दिशा में पहल कर रही है। केंद्र सरकार अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी दे देती है तो यह मध्य भारत के किसी आदिवासी बहुल क्षेत्र के लिए सेना की पहली विशेष रेजीमेंट होगी बस्तर रेजिमेंट। इससे न केवल बस्तर के युवाओं को सैन्य सेवाओं में अधिक अवसर मिलेंगे, बल्कि क्षेत्र की वीर परंपरा को भी राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। बस्तर के युवा भी राजपूत रेजिमेंट, गढ़वाल राइफल्स, डोगरा रेजिमेंट सहित कई अन्य सैन्य इकाइयों के अदम्य साहस और गौरवगाथा की तरह एक नया इतिहास लिखेंगे।-अनुपम राजीव राजवैद्य anupam.rajiv@in.patrika.com