
प्रो. हिमांशु राय
निदेशक, आइआइएम इंदौर
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कार्यस्थल की आध्यात्मिकता अर्थ, उद्देश्य और जुड़ाव की भावना को संदर्भित करती है जो कर्मचारी अपने काम में अनुभव करते हैं, यह पिछले आलेख में आपने पढ़ा। हालांकि मैं मानता हूं कि यह कई रूप ले सकता है - जैसे साझा मूल्यों की भावना, समुदाय की भावना, या स्वयं से अधिक किसी चीज से जुड़ाव की भावना। लोकप्रिय धारणा के विपरीत, कार्यस्थल की आध्यात्मिकता विभिन्न तरीकों से प्रकट हो सकती है, जैसे कि एक समुदाय से संबंधित होने की भावना, एक उच्च शक्ति से संबंध, या दुनिया पर सकारात्मक प्रभाव डालने की भावना। कार्यस्थल के मूल्य जितना अधिक सहयोगी और समग्र होने की ओर बढ़ते हैं, लाभ का दायरा उतना ही बढ़ता जाता है।
शोधकर्ता रॉबर्ट गियाकालोन और कैरोल जर्किविज ने कार्यस्थल की आध्यात्मिकता को ‘संगठनात्मक मूल्यों के ढांचे के रूप में परिभाषित किया है, जो एक ऐसी संस्कृति में सन्निहित है जो कार्य प्रक्रिया के माध्यम से कर्मचारियों के अनुभवों को बढ़ावा देती है, दूसरों के साथ जुड़े रहने की उनकी भावना को सुगम बनाती है, जो पूर्णता और आनंद की भावना प्रदान करती है।’ हालांकि कार्यस्थल आध्यात्मिकता एक अपेक्षाकृत नई सोच है, काम के विभिन्न पहलुओं पर इसके प्रभाव की खोज करने वाले पहले से ही कई अध्ययन उपस्थित हैं। जो कर्मचारी अपने काम को आध्यात्मिक विकास के साधन के रूप में देखते हैं, वे उन लोगों की तुलना में अधिक प्रयास करने की संभावना रखते हैं जो इसे केवल लाभ पाने के तरीके के रूप में देखते हैं।
मिसाब हसन इत्यादि द्वारा शोध (2016) में कार्यस्थल की आध्यात्मिकता और नौकरी से संतुष्टि के बीच एक सकारात्मक संबंध पाया गया, जिसमें विश्वास महत्त्वपूर्ण करक है। अध्ययनों में पाया गया है कि व्यक्तिगत विकास और पूर्ति के अलावा, कार्यस्थल की आध्यात्मिकता भी सहयोग की भावना को बढ़ावा देती है, और मनोवैज्ञानिक सुरक्षा में योगदान करती है। कार्यस्थल की आध्यात्मिकता की अवधारणा आज के कारोबारी माहौल में तेजी से प्रासंगिक होती जा रही है। इससे संगठन के समग्र सकारात्मक वातावरण और संस्कृति पर गहरा असर पड़ सकता है। काम पर आध्यात्मिकता से कर्मचारियों की व्यस्तता में वृद्धि हो सकती है, प्रदर्शन में सुधार हो सकता है, और इसमें शामिल सभी लोगों के लिए पूर्ति की भावना बढ़ सकती है। एक अन्य महत्त्वपूर्ण लाभ यह है कि कर्मचारियों की संतुष्टि और पूर्ति में वृद्धि हो सकती है। जब कर्मचारी अपने काम को आध्यात्मिक विकास के साधन के रूप में देखते हैं, तो काम में अर्थ व उद्देश्य की भावना मिलने की अधिक संभावना होती है। आध्यात्मिक विकास को प्राथमिकता देने से कर्मचारियों के बीच एकता, साझा उद्देश्य और समुदाय की भावना का भी विकास होता है।
Updated on:
06 Feb 2023 10:02 pm
Published on:
05 Feb 2023 07:18 pm
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