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मिलकर करें उच्च रक्तचाप पर नियंत्रण, साइलेंट किलर’ के खिलाफ पहली रक्षा पंक्ति समाज

भारत के पास ज्ञान, साधन और एक मजबूत होती प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणाली है, जिससे उच्च रक्तचाप को नियंत्रित किया जा सकता है। विश्व उच्च रक्तचाप दिवस की इस वर्ष की थीम याद दिलाती है कि कोई भी सरकारी कार्यक्रम या एकांगी प्रयास काफी नहीं है। बल्कि हमें भरोसेमंद और निरंतर सहयोग की जरूरत है।

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भारत

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Rakhi Hajela

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प्रीति सूदन

May 15, 2026

Hypertension Day

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प्रीति सूदन
पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव एवं अध्यक्ष, संघ लोक सेवा आयोग


उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) के बारे में कोई भी बात करने से पहले हमें यह समझना होगा कि भारत में यह खतरा एक साथ बेहद आम और खास दोनों है। इसका होना जितना आम है, इसकी भयावहता इसे उतना ही खास बना देती है। यह खामोशी से आता है, लेकिन बेहद आसानी से पकड़ा जा सकता है और यूं ही छोड़ दिया जाए तो खामोशी के साथ सब कुछ तबाह करने की ताकत रखता है। इसका इलाज महंगा नहीं है। बल्कि इसके खिलाफ जंग तो मरीज के अस्पताल जाने से पहले ही जीती जा सकती है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि समाज यह समझे कि कुछ आसान तरीकों से इससे बचा जा सकता है और यदि यह हो जाए तो जीवनभर इलाज की जरूरत होती है।

भारत में 30 करोड़ से अधिक लोग उच्च रक्तचाप (120/80 से अधिक) के साथ जी रहे हैं, जैसा कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (2019-21) में सामने आया है। चूंकि इसके शुरुआती लक्षण नहीं दिखते, यह चुपचाप दिल, मस्तिष्क और गुर्दों को नुकसान पहुंचाता रहता है, जब तक कि यह दिल का दौरा या स्ट्रोक बनकर सामने न आए। इसकी पहचान कर लिया जाना काफी नहीं है, बल्कि इसे नियंत्रित रखने में कैसे मदद की जाए, यह सुनिश्चित करना जरूरी है। इस लिहाज से यह भी जरूरी है कि लोगों को यह सहायता उनके घर के पास ही मिल सके। नमक का अधिक सेवन, तंबाकू का उपयोग, तनाव और बढ़ता मोटापा- इन सबकी वजह से काफी संख्या में युवा भी उच्च रक्तचाप के शिकार हो रहे हैं। ये सभी कारक हमारे खान-पान और जीवनशैली से जुड़े हैं।
हमारी चुनौती अब समाधान खोजने की नहीं, बल्कि निरंतर देखभाल सुनिश्चित करने की है। जांच बढ़ी है, लेकिन कई लोग अब भी अनजान हैं और जो इलाज शुरू करते हैं, उनमें से कई लोग फॉलो-अप नहीं करते या दवाएं छोड़ देते हैं। नतीजतन, नियंत्रण दर अपेक्षित स्तर से काफी कम बनी हुई है। सिर्फ अस्पताल बढ़ाकर यह समस्या हल नहीं होगी। हमें लोगों तक उनके इलाके में, उनकी भाषा में और उन लोगों के माध्यम से पहुंचना होगा, जिन पर वे भरोसा करते हैं।
किसी स्वास्थ्य कार्यक्रम में समाज को भागीदार बनाने से कितने अच्छे परिणाम आते हैं, यह भारत ने पहले भी पोलियो उन्मूलन और टीबी जैसे कार्यक्रमों में देखा है। इसी तरह स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से भी व्यवहार परिवर्तन हुए हैं। ये प्रयास इसलिए सफल हुए क्योंकि स्थानीय नेतृत्व ने जिम्मेदारी ली, नियमित फॉलो-अप हुआ और सभी ने मिलकर काम किया।
आयुष्मान आरोग्य मंदिर (एएएम) और राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग (एनसीडी) कार्यक्रम के विस्तार के साथ भारत ने उच्च रक्तचाप की जांच बड़े पैमाने पर शुरू कर दी है। ये केंद्र स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के करीब लाते हैं।
इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए मानक उपचार प्रोटोकॉल को बढ़ावा देना, दवाओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना और मरीजों की निगरानी के लिए सरल प्रणाली विकसित करना जरूरी है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने विभिन्न राज्यों और अन्य संस्थानों के साथ मिलकर जो ‘इंडियन हाइपरटेंशन कंट्रोल इनिशिएटिव’ शुरू किया है, उसके तहत स्वास्थ्य कार्यकर्ता सैकड़ों जिलों में इस काम की रीढ़ बन चुके हैं। वे डॉक्टर नहीं हैं, लेकिन उन्हें डॉक्टर होने की जरूरत भी नहीं है। वे अपनी मौजूदगी से भरोसा और निरंतरता सुनिश्चित करते हैं।
रक्तचाप जांच को आसान बनाकर और दवाओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित कर इस प्रगति को और तेज किया जा सकता है। ‘समुदाय पहली रक्षा पंक्ति है’- यह सिर्फ नारा नहीं है। यह पूरी स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत कर सकता है। आशा कार्यकर्ता और सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता ही घरों तक सेवा पहुंचाते हैं और फॉलो-अप सुनिश्चित करते हैं। जन आरोग्य समितियां और स्वयं सहायता समूह स्थानीय स्तर पर चर्चा और जागरूकता बढ़ाते हैं।
रोकथाम के लिए जरूरी है कि तंबाकू उपयोग घटाने, कम नमक वाले आहार को बढ़ावा देने और दौडऩे-टहलने की जगह उपलब्ध करवाने जैसे उपाय समाज में हों। लोगों को यह समझना होगा कि अक्सर पैकेज्ड स्नैक्स, अचार, पापड़ और नमकीन हमारे भोजन में नमक की मात्रा बढ़ाते हैं।
‘पहली रक्षा पंक्ति’ को प्रभावी बनाना है। इसके लिए प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा में बीपी मापने की सुविधा, दवाओं की उपलब्धता और स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट सुनिश्चित करना होगा। वरना सिर्फ सामुदायिक प्रयास सफल नहीं होंगे।
भारत के पास ज्ञान, साधन और एक मजबूत होती प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणाली है, जिससे उच्च रक्तचाप को नियंत्रित किया जा सकता है। विश्व उच्च रक्तचाप दिवस की इस वर्ष की थीम याद दिलाती है कि कोई भी सरकारी कार्यक्रम या एकांगी प्रयास काफी नहीं है। बल्कि हमें भरोसेमंद और निरंतर सहयोग की जरूरत है। हम उच्च रक्तचाप को नियंत्रित कर सकते हैं, यदि हमारी पहली अग्रिम रक्षा पंक्ति मजबूत हो, समाज इस जोखिम को रोकना सीखे, जल्दी जांच और पहचान हो और हम लोगों को जीवनभर इसके नियंत्रण के लिए मदद उपलब्ध करवा सकें।
प्रीति सूदन
पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव एवं अध्यक्ष, संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी)