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आपकी बात, क्या मतदाता उम्मीदवार की धर्म और जाति पर भी ध्यान देते हैं?

पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं। पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

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Gyan Chand Patni

Nov 09, 2023

आपकी बात, क्या मतदाता उम्मीदवार की धर्म और जाति पर भी ध्यान देते हैं?

आपकी बात, क्या मतदाता उम्मीदवार की धर्म और जाति पर भी ध्यान देते हैं?

गांवों में जाति प्रभावी

मतदाता को कई मुद्दे प्रभावित करते हैं। प्रत्याशी की जाति, धर्म के साथ पैसा, भाषा और पार्टी से भी वह प्रभावित होता है। खासकर ग्रामीण भारत में मतदाता यह जरूर देखता है कि उसका वोट किस जाति के उम्मीदवार को जा रहा है। अगर प्रत्याशी उसकी जाति का होता है, तो ज्यादा संभावना रहती है कि वह उसको वोट दे।

-डॉ.अजिता शर्मा, उदयपुर

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जातिवाद को बढ़ावा

मतदाताओं में अपनी जाति और धर्म की उम्मीदवार को वोट देने की प्रवृत्ति होती है। यह उचित नहीं है। इससे भ्रष्टाचार, बेईमानी और जातिवाद को बढ़ावा मिलता है। -महेश आचार्य, नागौर

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छवि पर नजर

मतदाताओं का ध्यान जहां राजनीतिक दल की कार्यप्रणाली पर रहता है, वहीं उम्मीदवार की छवि पर भी नजर होती है। उम्मीदवार की धर्म और जाति पर ध्यान कम, मगर क्षेत्र में उसकी साख, व्यवहार, शिक्षा और चरित्र से मतदाता प्रभावित होता है।

-शिवजी लाल मीना, जयपुर

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जाति और धर्म प्रभावी

वर्तमान समय में जाति एवं धर्म ही राजनीति का आधार है क्योंकि जब टिकट का बंटवारा होता है तब धर्म और जाति को सबसे ऊपर रखा जाता है। मतदाता भी अपनी जाति के उम्मीदवार को ही तवज्जो देते हैं।

-डॉ.भरत जोशी, सलूंबर

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पार्टी को देखते हैं मतदाता

कहीं-कहीं मतदाता जाति और धर्म से प्रभावित होकर मतदान करते हैं। ज्यादातर लोग पार्टी और उम्मीदवार को देख कर वोट करते हैं।

-बाबूलाल प्रजापत, निंबाहेड़ा, चित्तौडग़ढ़

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गहरी हैं जाति की जड़ें

भारतीय समाज में जाति की जड़ें गहरी हैं। खासकर ग्रामीण भारत में वोटर यह जरूर देखता है कि उसका वोट किस जाति के उम्मीदवार को जा रहा है। अगर वोटर उसकी जाति का होता है तो ज्यादा संभावना रहती है कि वह उसको वोट दे। बेशक कानूनी बाधाओं के चलते देश में सियासी पार्टियां धर्म और जाति के नाम पर वोट नहीं मांगतीं लेकिन सांकेतिक तौर पर वे इनका खूब सहारा लेती हैं।

-नरपत सिंह चौहान, जैतारण, पाली

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चुनाव जीतने के हथकंडे

चुनाव जीतने के लिए नेता कुछ भी करने के लिए तैयार रहते हैं। इसीलिए धर्म और जाति के मुद्दे उठाए जाते हैं। इन बातों से प्रभावित हो मतदाता उम्मीदवार का धर्म और जाति देख अपने मत का प्रयोग करने लगा है। इस कारण प्रत्याशियों की योग्यता पर ध्यान ही नहीं जाता।

-नरेश कानूनगो, देवास, मध्यप्रदेश