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संपादकीय: कानून की पालना में सख्ती से ही थमेंगे सड़क हादसे

परिवहन मंत्रालय ने मोटर व्हीकल कानून में बदलाव की तैयारी कर ली है। इन बदलावों में सख्ती इस कदर की जाएगी कि यदि किसी वाहन चालक के ज्यादा चालान होते हैं तो उसके चालक लाइसेंस को स्थायी रूप से रद्द किया जा सकता है।

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देशभर में सड़कों का जाल जिस रफ्तार से बढ़ा है उससे आवागमन सुगम तो हुआ ही है समय की बचत भी होने लगी है। लेकिन यह भी सच है कि सड़कों के विस्तार के साथ-साथ वाहनों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। आंकड़े बताते हैं कि कानून-कायदों की सख्ती के बावजूद सड़क हादसों में अपेक्षाकृत कमी नहीं आ पाई है। और तो और, यातायात नियमों का उल्लंघन करने के मामले भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं। जाहिर है जुर्माना और सजा जैसे प्रावधान लागू भले ही हो गए हों लेकिन इनको लेकर सख्ती कहीं नजर नहीं आ रही। शायद यही वजह है कि लापरवाही और नियमों का उल्लंघन कर वाहन चलाने पर अब और सख्ती करने की जरूरत महसूस की जा रही है।

परिवहन मंत्रालय ने मोटर व्हीकल कानून में बदलाव की तैयारी कर ली है। इन बदलावों में सख्ती इस कदर की जाएगी कि यदि किसी वाहन चालक के ज्यादा चालान होते हैं तो उसके चालक लाइसेंस को स्थायी रूप से रद्द किया जा सकता है। इतना ही नही, सड़क सुरक्षा नियमों के उल्लंघन और निर्धारित जुर्माना नहीं चुकाने पर संबंधित वाहन का पंजीकरण भी निलम्बित कर दिया जाएगा। ज्यादा चालान से गाड़ी का बीमा प्रीमियम भी बढ़ाया जाएगा। सबसे बड़ी बात यह भी कि कोई भी वाहन बिना बीमा के सड़क पर दौड़ता पाया गया तो उसे जब्त कर लिया जाएगा। कानून बनाने के बावजूद उनकी पालना में ढिलाई होने लगे तो इनके प्रावधानों को और सख्त किया जाना जरूरी हो जाता है। ऐसा इसलिए भी कि सड़क सुरक्षा को लेकर बने कानून का उल्लंघन करने की आदत सामाजिक बुराई की तरह हो गई है। यातायात संकेतकों की अनदेखी करना, शराब पीकर वाहन चलाना और बिना सीट बैल्ट और हेलमेट के वाहन चलाना ऐसी ही आदतों में शुमार है। सड़क हादसों के कारण यों तो और भी हैं लेकिन यह भी देखने में आता है कि तेज रफ्तार वाहन हादसों की बड़ी वजह बनते हैं। हिट एंड रन के बढ़ते मामले भी चिंता पैदा करने वाले हैं।

देखने-सुनने में तो लगता है कि मोटर वाहन कानून में प्रस्तावित संशोधन के ये तमाम प्रावधान हादसों की रोकथाम में कारगर साबित हो सकते हैं। पर सच यह भी है कि कानून सख्त करना ही काफी नहीं है, बल्कि उसके अनुरूप सजा में सख्ती भी दिखाना जरूरी है। सड़क सुरक्षा के लिए केवल सजा ही काफी नहीं, बल्कि जनता में जागरूकता लाना भी जरूरी है। यातायात नियमों की पालना को लेकर संस्कारित किए बिना जागरूकता संभव नहीं है। ये संस्कार भी स्कूली शिक्षा के स्तर पर ही दिए जाने चाहिए। यह समझना भी जरूरी है कि सड़क हादसों से मरने वाले और घायल होने वालों के महज आंकड़े ही नहीं बढ़ते, बल्कि हर उस परिवार के लिए त्रासदी बनकर आते हैं जो इस पीड़ा से गुजरते हैं। कानून कठोर बनाने के साथ-साथ लोगों को भी यातायात नियमों की पालना का आत्मअनुशासन रखना होगा।