
pm modi
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन देशों की यात्रा द्विपक्षीय संबंधों और रणनीतिक साझेदारी से जुड़े बदलते वैश्विक समीकरणों का संकेत है। इंडोनेशिया से रक्षा, तकनीक और व्यापारिक सहयोग समझौतों को इसी रूप में देखा जा सकता है। समझौते के तहत इंडोनेशिया, भारत से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और अस्त्र एयर टू एयर मिसाइल खरीदेगा। इसके अलावा स्वास्थ्य, अंतरिक्ष अनुसंधान, कृषि व खनन क्षेत्रों में भी दोनों देशों में द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने पर सहमति हुई है। पीएम की आगामी दिनों में ऑस्ट्रेलिया की यात्रा को लेकर भी यह कहा जा सकता है कि भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध अब क्रिकेट और कॉमनवेल्थ की परिधि से निकलकर भारतीय की विदेश नीति के अहम रणनीतिक स्तंभों में शामिल हो चुके हैं।
पीएम का जकार्ता में हुआ असाधारण स्वागत और रक्षा सहयोग की संभावनाएं बताती हैं कि भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति व्यावहारिक कूटनीति बन चुकी है। वहीं ऑस्ट्रेलिया इस नीति का सबसे महत्त्वपूर्ण पड़ाव बनकर उभरा है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सक्रियता, सुरक्षित समुद्री मार्गों की जरूरत और भरोसेमंद आपूर्ति शृंखला की तलाश ने भारत और ऑस्ट्रेलिया को पहले से कहीं अधिक करीब ला दिया है। ऑस्ट्रेलिया के पास लिथियम और अन्य क्रिटिकल मिनरल्स का विशाल भंडार है, जिन पर इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी और सेमीकंडक्टर उद्योग का भविष्य टिका है। इसलिए उम्मीद की जानी चाहिए कि इस यात्रा में रक्षा, हरित ऊर्जा, व्यापार और तकनीक पर होने वाली बातचीत आने वाले दशक की आर्थिक और सामरिक दिशा तय करने वाली साबित होगी। इस यात्रा का सबसे मानवीय पक्ष उन भारतीय छात्रों से जुड़ा है, जिनके लिए ऑस्ट्रेलिया अब सबसे पसंदीदा शिक्षा गंतव्य बन चुका है।
वहां एक लाख से अधिक भारतीय छात्र अध्ययन कर रहे हैं और मध्यप्रदेश-राजस्थान सहित देश के हजारों परिवार अपने बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए ऑस्ट्रेलिया को चुन रहे हैं। इसलिए मेलबर्न में होने वाला प्रवासी भारतीयों का विशाल आयोजन जितना राजनीतिक महत्त्व रखता है, उससे कहीं अधिक महत्व उन चर्चाओं का है, जिनसे वीजा प्रक्रिया सरल हो, पढ़ाई के बाद रोजगार के अवसर बढ़ें और भारतीय युवाओं के लिए वैश्विक कॅरियर के नए रास्ते खुलें। इस यात्रा से भारतीय छात्रों और कुशल पेशेवरों के लिए अवसर बढ़ते हैं, तो यह केवल कूटनीतिक उपलब्धि नहीं होगी, बल्कि लाखों भारतीय परिवारों की आकांक्षाओं को उड़ान देने वाला कदम भी होगा। आज विदेश नीति का अर्थ केवल सीमाओं की सुरक्षा नहीं, बल्कि अवसरों की सुरक्षा भी है। दुनिया तेजी से बदल रही है और देशों के बीच प्रतिस्पर्धा अब केवल सैन्य शक्ति की नहीं, बल्कि तकनीक, प्रतिभा, ऊर्जा, संसाधनों और भरोसेमंद साझेदारियों की भी है। यह कहा जा सकता है कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी कूटनीति को इसी नई सोच के अनुरूप ढाला है।
Updated on:
08 Jul 2026 03:28 pm
Published on:
08 Jul 2026 03:28 pm
