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Expert Comment on Budget 2022: विकास दर तेज करने की ईमानदार कोशिश

Expert Comment on Budget 2022: कुल मिलाकर इस बजट में आधारभूत ढांचे पर बड़े निवेश के माध्यम से अर्थव्यवस्था में तेजी लाने, जन सुविधाओं के विस्तार और रोजगार सृजित करने की दूरदृष्टि नजर आती है, पर यदि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मौद्रिक नीतियों का संतुलित ढंग से क्रियान्वयन नहीं किया गया तो मुद्रास्फीति और महंगाई बढ़ेगी, जिसका बुरा असर आम आदमी पर पड़ेगा।

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Expert Comment on Budget 2022: Sincere effort to accelerate growth

Expert Comment on Budget 2022: Sincere effort to accelerate growth

वेद माथुर
(पंजाब नेशनल बैंक के पूर्व महाप्रबंधक तथा चर्चित पुस्तक 'बैंक ऑफ पोलमपुर' के लेखक)

Expert Comment on Budget 2022: जिस देश में बजट का बड़ा हिस्सा सरकार को अपना कर्ज व ब्याज चुकाने, वेतन, पेंशन और रक्षा तथा मनरेगा जैसी लोक लुभावन योजनाओं पर खर्च करना पड़ता हो, वहां मध्यमवर्ग को टैक्स से राहत देने तथा लोक कल्याण और सार्वजनिक निवेश के लिए खजाने का मुंह खोलने के बहुत अधिक विकल्प नहीं होते हैं। इसके बावजूद वित्त मंत्री ने बजट में पूंजीगत व्यय में भारी बढ़ोतरी करके आर्थिक विकास की रफ्तार तेज करने का प्रयास पूरी ईमानदारी से किया है। सरकार ने वित्त वर्ष 2022-23 में पूंजीगत व्यय में 35 फीसदी की भारी वृद्धि की है। इससे निजी क्षेत्र में भी निवेश बढ़ेगा। हालांकि निजी क्षेत्र में प्रत्यक्ष निवेश के लिए भी निवेशकों को प्रोत्साहित करने के ठोस उपाय किए जाने चाहिए थे। बजट के अनुसार वर्ष 2022 में 1.5 लाख डाकघरों में कोर बैंकिंग सिस्टम शत-प्रतिशत किया जाएगा।

हमारे देश में बैंकिंग सेवाओं का पर्याप्त विस्तार हुआ है और वित्त मंत्री के इस कदम से निसंदेह बैंकिंग सेवाएं गांवों में अंतिम व्यक्ति तक भी पहुंचेंगी, लेकिन आम आदमी बिचौलियों के बिना त्वरित, पर्याप्त व सुगम ऋण के लिए अपने कंप्यूटर, मोबाइल या ई-मित्र के माध्यम से आवेदन कर स्वीकृति पा सके, ऐसी व्यवस्था करनी होगी। बैंकों के निजीकरण की पूर्व में की गई घोषणाओं से बैंकिंग सेक्टर में अनिश्चितता व्याप्त है, पर वित्तमंत्री ने इस विषय को नहीं छुआ। जीवन बीमा निगम के सार्वजनिक निर्गम को जल्दी लाने की घोषणा की गई है।

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ऐसे भीमकाय संस्थान एवं अन्य विनिवेश से सरकार का 'तंग हाथ' खुलेगा लेकिन इस भारी-भरकम रकम का सदुपयोग होता हुआ भी जनता को नजर आना चाहिए। वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि वर्चुअल डिजिटल ऐसेट से हुई आय पर 30 फीसदी टैक्स लगेगा। लंबे समय से क्रिप्टोकरेंसी निवेशक सरकार से 'वर्चुअल डिजिटल ऐसेट्स' पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं और लोगों को अभी भी इस मुद्दे पर ऐसे स्पष्ट कानून की प्रतीक्षा है जिसमें निवेशकों की सुरक्षा का प्रावधान हो।

पिछले कुछ सालों में फाइनेंशियल मार्केट में क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के प्रति भारी रुझान देखा गया है। इसका सबसे बड़ा कारण कम समय में बड़ा लाभ मिलना है। वहीं एलन मस्क भी क्रिप्टोकरेंसी में निवेश का समर्थन करते दिखे हैं। आजकल रिटेल इन्वेस्टर्स भी इसमें बढ़-चढ़कर निवेश कर रहे हैं। ऐसे में क्रिप्टोकरेंसी व निजी क्रिप्टो कॉइन से संबंधित स्पष्ट सरकारी नीति जरूरी है।

कुल मिलाकर इस बजट में आधारभूत ढांचे पर बड़े निवेश के माध्यम से अर्थव्यवस्था में तेजी लाने, जन सुविधाओं के विस्तार और रोजगार सृजित करने की दूरदृष्टि नजर आती है, पर यदि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मौद्रिक नीतियों का संतुलित ढंग से क्रियान्वयन नहीं किया गया तो मुद्रास्फीति और महंगाई बढ़ेगी, जिसका बुरा असर आम आदमी पर पड़ेगा।

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