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‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’ का लाभ उठाने का रोडमैप

विश्व के विकसित देशों की तुलना में भारत की कुल जनसंख्या में युवाओं का प्रतिशत अधिक हैं। इस  युवा जनसंख्या को अगर सार्थक कार्यों में लगाया जाए तो देश का विकास बहुत तेज गति से होगा और देश जनसांख्यिकीय लाभांश (डेमोग्राफिक डिविडेंड) का फायदा उठा पाएगा।

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हरीश्वर दयाल प्रोफेसर, मानव विकास संस्थान (आइएचडी)
स मावेशी विकास किसी भी अर्थव्यवस्था की प्राथमिकता रहती है। केंद्र सरकार की नीतियों एवं कार्यों का उद्देश्य भी 'सबका साथ, सबका विकास' रहा है। वर्तमान बजट को इसी लक्ष्य को प्राप्त करने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है। बजट 2024-25 की प्राथमिकता वैसे वर्गों एवं वैसे क्षेत्रों का विकास है जो देश के औसत से कम विकसित हैं। इस बजट में चार वर्गों यथा- युवा, किसान, महिला एवं गरीबों के विकास के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
विश्व के विकसित देशों की तुलना में भारत की कुल जनसंख्या में युवाओं का प्रतिशत अधिक हैं। इस युवा जनसंख्या को अगर सार्थक कार्यों में लगाया जाए तो देश का विकास बहुत तेज गति से होगा और देश जनसांख्यिकीय लाभांश (डेमोग्राफिक डिविडेंड) का फायदा उठा पाएगा। इस तथ्य को ध्यान में रख कर इस बजट ने युवाओं के रोजगार के लिए अधिक अवसर सृजन करने का प्रयास किया गया है। इस बजट में एक तरफ युवाओं की रोजगार क्षमता को बढ़ाने के लिए शिक्षा एवं कौशल विकास के लिए प्रावधान किए गए हैं तो दूसरी तरफ संरचनात्मक विकास, उत्पादन के क्षेत्र में निवेश बढ़ा कर एवं रोजगारदाताओं को प्रोत्साहित कर के अतिरिक्त रोजगार के अवसरों का सृजन करने के लिए विशेष प्रावधान किए हैं। कृषि क्षेत्र के विकास एवं किसानों की आय को बढ़ाने के लिए भी इस बजट में कई प्रावधान किए गए हैं।
इस बजट ने कृषि के क्षेत्र में ऐसे शोध को बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है जिससे एक तरफ कृषि उत्पादकता में वृद्धि होगी और दूसरी तरफ जलवायु परिवर्तन प्रतिरोधी फसल विकसित होगी। 32 किस्म की फसलों की 109 ऐसी प्रजातियों को जारी किया गया है जो उच्च उत्पादक के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन अवरोधी भी हंै। किसानों को प्राकृतिक खेती से जोडऩे का प्रावधान भी किया गया है। साथ ही मत्स्य उत्पादन को भी प्रोत्साहित करने का प्रयास किया गया है। बालिकाओं एवं महिलाओं के विकास एवं सशक्तीकरण के लिए भी उचित प्रावधान किए गए हैं। बालिकाओं एवं महिलाओं को लाभ पहुंचाने वाली योजनाओं के लिए इस बजट ने तीन लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। महिलाओं की श्रम भागीदारी को बढ़ाने के लिए कामगार महिलाओं के लिए हॉस्टल एवं कामगार माताओं के लिए के्रच स्थापित करने का प्रावधान इस बजट में किया गया है। बजट का एक मुख्य उद्देश्य देश में गरीबी का उन्मूलन करना भी है। ऐसे समुदाय जिनमें गरीबी ज्यादा व्याप्त है, उनके उत्थान के लिए प्रावधान किए गए हंै।
अनुसूचित जनजाति उनमें से एक है। अनुसूचित जनजातियों के सामाजिक आर्थिक उत्थान के लिए प्रधानमंत्री जनजाति उन्नत ग्राम अभियान के तहत 63000 गांवों के करीब 5 करोड़ आदिवासियों को लाभ पहुंचाने का प्रावधान इस बजट में किया गया है । अल्प विकसित राज्यों एवं क्षेत्रों या विशेष आवश्यकता वाले राज्यों के लिए भी इस बजट में विशेष प्रावधान किया गया है। बिहार एवं असम के विकास के लिए एवं आंध्रप्रदेश की राजधानी के विकास के लिए किया गया आवंटन इसी श्रेणी में आता है। इसे इस सरकार की राजनितिक बाध्यता के रूप में भी देखा जा सकता है। लेकिन, पूर्वोत्तर राज्यों के विकास या पूर्वी क्षेत्र के उत्थान के लिए किए गए प्रावधान संतुलित क्षेत्रीय विकास की दिशा में सार्थक प्रयास है।