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ललित लीला

त्रेता युग में रामलीला, द्वापर में कृष्ण लीला हुई तो कलियुग में अब 'ललित लीलाÓ चल रही है। डिजिटल दौर में लंदन में बैठा शख्स दस-बीस शब्द ट्विट करता है और भारत में भूचाल आ जाता है। जमी हिलने लगती है। सिंहासन डोलने लगते हैं।

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afjal khan

Jul 04, 2015

त्रेता युग में रामलीला, द्वापर में कृष्ण लीला हुई तो कलियुग में अब 'ललित लीलाÓ चल रही है। डिजिटल दौर में लंदन में बैठा शख्स दस-बीस शब्द ट्विट करता है और भारत में भूचाल आ जाता है। जमी हिलने लगती है। सिंहासन डोलने लगते हैं।

मीडिया में हलचल मच जाती है और विश्लेषक उन शब्दों पर मंथन करने लग जाते हैं। नाट्यकला में धीरोदात्त नायक की कल्पना की गई है लेकिन इस कुटिल समय में तो एक भगोड़ा राजनीति का नायक बना हुआ है। उस मोदी के सामने लोग इस मोदी को भूल गए।

इस बार वे दूर की कोड़ी ले आए। लिखा कि वरुण गांधी ने अपने दोस्त के साथ उससे सम्पर्क साधा और कहा कि तीन सौ तिरानवे करोड़ रुपया दे दो मैं अपनी ताई से कह कर सारे मामले सुलटवा दूंगा। बेचारा वरुण अब सफाई देता फिर रहा है।

ताईÓ के सिपहसालार कह देंगे कि ताई तो अपने भतीजे के ब्याह तक में नहीं गई । ताई का भतीजे से सम्पर्क ही नहीं है। लेकिन भतीजा क्या कर? एक तो भाजपा में उसकी गति वैसी ही है जैसे दुर्योधन के भाई युयुत्सु की पांडवों के खेमे में थी।

पूरे कौरवों में सिर्फ युयुत्सु ऐसा धृतराष्ट्र पुत्र था जो अपने कोखभाइयों को छोड़ पांडवों के पक्ष में लड़ा। पांडव जीत गए लेकिन उन्होंने युयुत्सु की ऐसी दुर्गति की कि बेचारे को आत्महत्या करनी पड़ी। यानी अंत में सत्य का साथ देने वाले की भी 'सत्ताÓ दुर्गति कर देती है।

अब भाजपा कह रही है कि वह वरुण की तरफ से नहीं लड़ेगी। यानी उसे स्वयं ही अपना बचाव करना पड़ेगा। यही ललित लीला है। बेचारी भाजपा भी क्या करे? कल तक ललित मोदी उनका चहेता था। महारानी सराहती रही कि उसने चुनावों में खूब मदद की।

ललित नायक ने किस-किस को मौज नहीं कराई। आज भी मरुधराा में एक आध नहीं, ललित नायक से उपकृत सैकड़ों मिल जाएंगे। कई तो अभी तक ललित चालीसा गाते नजर आते हैं। बहरहाल ललित लीला चालम है।

हरेक नेता जो कभी ललित से मिला था आज डरा हुआ है। न जाने कब उसकी फोटू कम्प्यूटर पर आ जाए। न जाने उसका सुनाया कौन सा चुटकुला ललित ने रिकार्ड कर रखा हो। न जाने कब कह दिया जाए कि फलाना सिंह ढिकानेलाल के साथ मुझसे अमुक होटल में मिला था और हमने मिल कर कैबरा देखा था। चलिए अपनी बला से।

हम छाती ठोक कर कह सकते हैं कि कभी उस बदमिजाज से नहीं मिले। हालांकि उस वक्त एक अजीज आईपीएल में बड़े सूचना अधिकारी थे उन्होंने कई बार कहा कि आओ तुम्हें 'प्रेसीडेन्ट स्यूटÓ में मैच दिखलाते हैं।

कोल्ड ड्रिंक, बीयर लो, मैच के बाद पार्टी में चलो पर न जाने क्यों हमारा मन नहीं किया। चले भी जाते तो हमारा क्या बिगड़ना था ज्यादा से ज्यादा 'जमीरÓ और आज के जमाने में बेचारे धरम-ईमानÓ को पूछता कौन है? वैसे ललित लीला जारी है। अभी तो ट्रेलर ही दिखा है क्लाइमैक्स तो बाकी है दोस्तो। - राही

न जाने कब कह दे फलाना सिंह ढिकाने के साथ मुझसे अमुक होटल में मिला था और हमने मिल कर कैबरा देखा।