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देश में अब गैर सरकारी मुद्रा बनता जा रहा सोना

अब निवेशक सरकारी बॉन्ड पर कम भरोसा कर रहे हैं और सोने को एक गैर-सरकारी मुद्रा के रूप में देख रहे हैं। यह सरकार द्वारा मूल्यवर्धित नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसकी कीमत बाजार की स्थिति, भू-राजनीतिक हालात, अर्थव्यवस्था की स्थिति आदि पर निर्भर करती है।

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जयपुर

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Opinion Desk

Mar 24, 2026

सतीश सिंह, आर्थिक विषयों के जानकार,

अब सोना केवल आभूषण नहीं है, बल्कि इसे एक गैर-सरकारी मुद्रा के रूप में भी देखा जा रहा है। 21 मार्च को स्पॉट स्वर्ण की कीमत 5,027.13 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई, जबकि दिल्ली में 21 मार्च को 24 कैरेट 10 ग्राम सोने का भाव 1.49 लाख रुपए से ऊपर था, जो पहले 1.59 लाख रुपए था। फिलहाल, ईरान और अमरीका के बीच चल रहे युद्ध के कारण रुपए का मूल्य गिर रहा है और महंगाई बढ़ रही है। आमतौर पर महंगाई बढऩे पर सोने की कीमत में कमी आती है, क्योंकि सोने में निवेश करने पर ब्याज नहीं मिलता है, लेकिन महंगाई बढऩे पर बैंक जमा दरों में अमूमन बढ़ोतरी करते हैं। सोने में तेजी का मुख्य कारण इसमें बढ़ता निवेश है, जिसमें पारंपरिक निवेशक भी शामिल हैं। अब कीमतें हर उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद लगभग 8 से 9 महीनों तक स्थिर रहती हैं, जो संभावित रूप से संरचनात्मक बदलाव का संकेत है।

पिछले दो वर्षों में सोने में निवेश अधिक आकर्षक हो गया है। सितंबर 2024 में पहली बार सोना 75,000 रुपए से ऊपर चला गया और इसके बाद मामूली गिरावट के बावजूद, इसकी कीमत में लगातार बढ़ोतरी होती रही है। परंपरागत रूप से, जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सोने की कीमतें घटती हैं क्योंकि सोने में निवेश पर ब्याज नहीं मिलता। 2023 से 2025 के बीच इस परिदृश्य में बदलाव आया है। ब्याज दरें ऊंची होने के बावजूद सोने की कीमतें बढ़ रही हैं, जो एक बड़े परिवर्तन का संकेत है। अब निवेशक सरकारी बॉन्ड पर कम भरोसा कर रहे हैं और सोने को एक गैर-सरकारी मुद्रा के रूप में देख रहे हैं। यह सरकार द्वारा मूल्यवर्धित नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसकी कीमत बाजार की स्थिति, भू-राजनीतिक हालात, अर्थव्यवस्था की स्थिति आदि पर निर्भर करती है। अभी रुपए की कमजोरी के कारण सोना अधिक आकर्षक हो गया है, जिससे गोल्ड ईटीएफ में निवेश में तेजी आई है।

सेबी ने हाल में एक्टिव इक्विटी स्कीम को सोना व चांदी में निवेश की अनुमति दी है। पहले यह स्कीम, जिसमें 20-35% डेट बॉन्ड और गैर-इक्विटी इंस्ट्रूमेंट शामिल थे, अब सोने और चांदी से जुड़े निवेश जैसे गोल्ड/सिल्वर ईटीएफ को भी शामिल कर लिया गया है। इसका उद्देश्य है कि जब शेयर बाजार में गिरावट आए, तो सोने और चांदी की संभावित बढ़त से नुकसान की पूर्ति हो सके। 2024 में सोने की कीमतें बढऩे के बावजूद, सोने में निवेश की मांग 29% बढ़ी है, जो 2013 के बाद से सबसे अधिक है। सोने की कीमत मामूली गिरावट के बावजूद लगातार बढ़ रही है और हर ऊंचाई पर पहुंचकर कुछ समय के लिए स्थिर हो रही है। यह अपनी आंतरिक मूल्य संरचना को भी बनाए रखता है। यह अभी तक सीधे लेनदेन के लिए आधिकारिक मुद्रा नहीं है, पर इसे विकल्प के रूप में स्वीकार किया जाने लगा है और लोग इसे गैर-सरकारी मुद्रा के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।