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आपकी बात : आर्थिक विषमता को कैसे कम किया जा सकता है?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रिया आईं। पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

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Patrika Desk

Apr 13, 2022

inequality

आपकी बात : आर्थिक विषमता को कैसे कम किया जा सकता है?

रोजगार के अवसरों का निरंतर सृजन

आर्थिक विषमता विकास में बाधक बनी है। आर्थिक विषमता को समाप्त करने के लिए हमें शिक्षा में निवेश बढ़ाते हुए रोजगारोन्मुखी एवं दक्षतापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देना चाहिए। गरीब वर्ग की मूलभूत वस्तुओं पर टैक्स छूट प्रदान कर और अमीर वर्ग पर टैक्स बढ़ाकर भी यह फासला कुछ कम किया जा सकता है। हमें रोजगार के अवसरों का निरंतर सृजन करते हुए चलना होगा। एक ओर देश में करोड़पतियों और अरबपतियों की संख्या में वृद्धि हो रही है और दूसरी तरफ समान मजदूरी के निर्धारण के अभाव में मजदूर वर्ग भूखे पेट सोने को मजबूर हैं । किसी देश के विकास के लिए आर्थिक विकास महत्त्वपूर्ण है। विश्व असमानता रिपोर्ट-2018 के अनुसार दुनिया में शीर्ष 0.1 प्रतिशत व्यक्तियों के पास विश्व की 13 प्रतिशत संपत्ति है जबकि भारत में शीर्ष 10 प्रतिशत व्यक्तियों के पास देश की 56 प्रतिशत सम्पत्ति है। आर्थिक विषमता को समाप्त करने के लिए हमें शिक्षा में निवेश बढ़ाते हुए रोजगारोन्मुखी एवं दक्षतापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देना चाहिए। आर्थिक असमानता कम करने के लिए जातीय आधार पर आरक्षण खत्म करके आरक्षण का आधार आर्थिक किया जाना चाहिए। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग में भी ओबीसी की तरह क्रीमीलेयर का प्रावधान किया जाना चाहिए। रोजगारपरक कौशल विकास, ऋण की सहज उपलब्धता और शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की गारंटी कुछ ऐसे प्रावधान हैं, जो भारत सरकार कर सकती है।

प्रदीप सिंह सोलंकी, कोटा, राजस्थान

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रोजगारोन्मुखी नीतियों का निर्माण

आर्थिक विषमता की चौड़ी होती खाई को कम करने के लिए सरकार रोजगारोन्मुखी नीतियों का निर्माण करे। जन कल्याणकारी योजनाओं की सफल क्रियान्विति, उनमें किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार न होने देने का सरकारी संकल्प तथा ग्रामीण विकास, कृषि व किसानों के जीवन स्तर को सुधारने का सरकारी संकल्प आर्थिक विषमता कम करने में मददगार बन सकेंगे।

शिवजी लाल मीना, जयपुर, राजस्थान

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कमजोर वर्ग के सशक्तिकरण के लिए अधिक प्रयास

भारत के अमीर और अमीर होते जा रहे हैं तथा गरीब और ज्यादा गरीब। इस बढ़ती असमानता से उपजी चिंताओं के बीच देश में अरबपतियों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। सरकार संवेदनशीलता दिखाते हुए गरीबों एवं अमीरों के बीच बढ़ती खाई को कम करने का कारगर उपाय करे। आर्थिक असमानता दूर करने के लिए कमजोर वर्ग के सशक्तिकरण के लिए अधिक प्रयास करने होंगे। इसके लिए जरूरी है, गरीबों के लिए बनी तमाम कल्याणकारी योजनाओं को कारगर तरीके से लागू किया जाए। विशेष नीतियां अमल में लानी होंगी।

- साजिद अली, चंदन नगर (इंदौर), मध्यप्रदेश

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शिक्षा रोजगार दिलाने वाली बने

आर्थिक विषमता दूर करने का सबसे कारगर उपाय है, प्रत्येक नागरिक को रोजगार मिले। रोजगार बढ़ाने के लिए सरकारें शिक्षा को रोजगारोन्मुखी बनाएं। शिक्षा व चिकित्सा देश में निशुल्क और आवश्यक होनी चाहिए। आरक्षण आर्थिक स्थिति को देखकर दिया जाए।

- प्रहलाद यादव, कोदरिया (महू), मध्यप्रदेश

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छोटे व्यापारियों को मिले प्रोत्साहन

देश के विभिन्न वर्गों के बीच असंतुलन ही आर्थिक विषमता को दर्शाता है। इसके लिए सरकार को चाहिए कि टैक्स प्रणाली सबके लिए एक समान ना हो, जिस प्रकार मंत्रियों के वेतन और भत्ते होते हैं, उसी प्रकार छोटे रोजगार के लोगों के लिए भी नीतियां बनाई जानी चाहिए। जात-पांत से ऊपर उठकर योग्यता को प्राथमिकता दी जाए। शिक्षा को कौशल के साथ जोड़ा जाए।

- रजनी वर्मा, श्रीगंगानगर, राजस्थान

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रोजगार के अवसर देें

आर्थिक विषमता दूर करनी है तो सबको रोजगार देना होगा। हमारे देश की जनसंख्या अत्यधिक है और इसलिए बेरोजगार भी ज्यादा हैं। छोटे-छोटे घरेलू व कुटीर उद्योग लगाकर युवाओं को रोजगार दिया जाए। स्किल इण्डिया के तहत तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाए तो युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं और आर्थिक विषमता दूर हो सकती है।

- लता अग्रवाल, चित्तौडग़ढ़, राजस्थान

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शिक्षा में निवेश बढ़ाना होगा

आर्थिक विषमता को समाप्त करने के लिए हमें शिक्षा में निवेश बढ़ाते हुए रोजगारोन्मुखी एवं दक्षतापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देना चाहिए। विषमता के लिए आरक्षण भी काफी हद तक जिम्मेदार है क्योंकि इसे पाकर कुछ तबके और अमीर होते जा रहे हंै, वहीं गरीब जागरुकता के अभाव में इसका फायदा ही नहीं ले पा रहा। आरक्षण को वर्गों के अनुसार न बांट कर आर्थिक स्थिति को देखकर देना ज्यादा उचित होगा।

- संजना प्रजापत

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स्वयं से करें शुरुआत

आर्थिक विषमताओं को कम करने के सरकारी प्रयास तो विफल हो चुके। क्यों न इसकी शुरुआत के छोटे-छोटे कदम उठाकर हम स्वयं ही अपने परिवार से करें और फिर इसे समाज में लेकर आएं? एक आंकड़े के अनुसार उच्चतम 1त्न लोगों के पास कुल आय का 22त्न है। उसके लिए गांधीजी का ट्रस्टीशिप सिद्धांत कारगर हो सकता है। अमीरों का हृदय परिवर्तन हो। साथ ही, टैक्स चोरी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। हमें समझना चाहिए कि जो कुछ कमाया है, इसी समाज से कमाया है। हमें आर्थिक सुधारों की रूपरेखा इस प्रकार से निर्धारित करनी होगी कि इन्हें अधिक से अधिक सार्वजनिक समर्थन प्राप्त हो।

- एकता शर्मा, गरियाबंद, छत्तीसगढ़

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भ्रष्टाचार में कमी से सुधार

देश की लगभग 70त्न आबादी आर्थिक रूप से पिछड़ी है। आमजन के दैनिक उपभोग की वस्तु को सस्ती, भ्रष्टाचार मुक्त कार्य और कम टैक्स के जरिए आर्थिक विषमता को सुधारा जा सकता है।

- मनकेश्वर कुमार, दरभंगा, बिहार

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सरकार उठाए भरण-पोषण का दायित्व

भारत सरकार आर्थिक विषमता को दूर करने के लिए भारत में जन्म लेते ही उसका भरण-पोषण का दायित्व स्वयं उठाये और सभी को उनकी आयु और सामथ्र्य के अनुसार उनको कार्य देकर उसके अनुसार वेतन भुगतान करे। आरक्षण को पूर्णत: बन्द करें और लघु तथा घरेलू उद्योगों को बढ़ावा दें। लार्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति के साथ-साथ स्वरोजगार की शिक्षा भी दी जाए। जनाधिक्य का रोना न रोकर लोगों को कृषि और खनन क्षेत्र की ओर भी रुझान करवाना चाहिए।

कैलाश चन्द्र मोदी, सादुलपुर (चूरू), राजस्थान