पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।
आयुर्वेद को अपनाएं, स्वस्थ रहें
आयुर्वेद में बताए गए नियमों के आधार पर स्वस्थ रहा जा सकता है। आयुर्वेद में बताए गए योग, प्राणायाम का नित्य प्रयोग, स्वस्थ अवस्था में जड़ी-बूटियों का प्रयोग, ऋतु के अनुसार भोजन का परिवर्तन, सीमित मात्रा में भोजन का सेवन, तनाव रहित जीवन और अध्यात्म का समावेश जरूरी है। मन में मानवता का भाव, प्रात: काल सूर्य का दर्शन, रात्रि में जल्दी सोना, शरीर के लिए हानिकारक पदार्थों का सेवन नहीं करना, लगातार 8 घंटे की नींद लेना, नशा कारक पदार्थों का सेवन नहीं करना, अपने शरीर की क्षमता के आधार पर व्यायाम करना आदि के द्वारा अपने शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है।
-डॉ अखलेश भार्गव, इंदौर
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जीवनशैली के प्रति सजगता जरूरी
भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों को स्वास्थ्य के प्रति अधिक सजग रहने की जरूरत है। स्वस्थ जीवनशैली नहीं अपनाने का ही नतीजा है कि लोग अब ज्यादा बीमार पड़ रहे हैं। जीवन में सुख-सुविधाएं बढ़ती गईं, लेकिन लोग स्वास्थ्य के महत्व को भूलने लगे। स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही सही नहीं है। लोगों को सजग रहने की जरूरत है। दिनचर्या सुनिश्चित करेंगे तो तनाव घटेगा और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होगा। योग और व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। अनियमित और असमय भोजन करने की आदत छोड़ें। पर्याप्त नींद जरूरी है। इसलिए हर रोज सोने और उठने का समय तय करना चाहिए।
-अजिता शर्मा, उदयपुर
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सम्मिलित प्रयास जरूरी
लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए राजस्थान सरकार ने खेलों के आधार पर 'ग्रामीण ओलम्पिकÓ का आयोजन करवाया। अब शहरी ओलम्पिक की तैयारियां। चल रही हंै। इसी के साथ प्रमुख मीडिया हाउस स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रम करवा सकता है। जैसे पत्रिका समूह 'हमराहÓ जैसे कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। हर निजी व सरकारी स्कूल, कॉलेज,कोचिंग सेंटर में सप्ताह में एक बार इस तरह के कार्यक्रम करवाए। स्थानीय प्रशासन निकाय जैसे ग्राम पंचायत, नगर पालिका, नगर परिषद, नगर निगम आदि की सक्रियता जरूरी है। विभिन्न गैर सरकारी संगठन, एनजीओ, नेहरू युवा केन्द्र, एनसीसी, स्काउट एण्ड गाइड, विभिन्न समाजों के नवयुवक मण्डल, महिला मोर्चा महिला मण्डल, आदि भी जिम्मेदारी के साथ शामिल हों। योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, ध्यान, प्रकृति-पर्यावरण, जैवविविधता , पेड़-पौधों, देसी खान पान, प्रदूषण मुक्त जीवनशैली पर काम कर रहे व्यक्तियों की मदद ली जा सकती है।
-दिनेश सिंह भाटी, शाहपुरा, भीलवाड़ा
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खानपान सही रखें
सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर लोगों के मन मे शंका है और निजी अस्पतालों का खर्च सहन करना आसान नहीं है। ऐसे में लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना बहुत जरूरी हो गया है। साथ ही स्वास्थ्य बीमा करवाने पर भी ध्यान देना चाहिए। दूसरा हमें खुद भी सतर्क होना पड़ेगा। एक अच्छी खानपान शैली अपनानी होगी। सर्दी का बहाना लेकर अधिक मिर्च मसाले, तेल घी आदि का इस्तेमाल करना उचित नहीं है। पिज़्जा बर्गर हो या जलेबी, मिठाई, कुछ तो अंकुश लगाना ही होगा। नियमित व्यायाम, टहलना, योग आदि को अपनी नियमित आदत बना कर ही हम स्वस्थ रह पाएंगे।
-रश्मि सिन्हा, ग्रेटर नोएडा
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कम रखें तनाव
तनाव हमारे दैनिक जीवन का एक अभिन्न अंग है। कम मात्रा में तनाव स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होता है, लेकिन तनाव का लगातार और लंबे समय तक बना रहना खतरनाक है। इसलिए तनाव कम करने पर ध्यान देना चाहिए।
-रोहित शर्मा पलसाना, सीकर
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जरूरी है संतुलित आहार
स्वस्थ जीवनशैली के लिए संतुलित आहार जरूरी है। साथ ही स्वच्छता पर भी ध्यान देना चाहिए। ग्राम पंचायतों, आंगनवाड़ी केंद्रों और स्कूलों के माध्यम से लोगों को जागरूक करना जरूरी है।
-विष्णु मंडा लूणिया, श्रीगंगानगर
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योग का समझें महत्त्व
आज के इस आधुनिक युग में प्रत्येक व्यक्ति तनाव से जूझ रहा है। योग और ध्यान के माध्यम से वह इन रोगों से छुटकारा पा सकता है। अगर हम योग का अभ्यास करें तो हम एक निरोगी रह सकते है। योग से हमें सभी प्रकार के रोगों से लडऩे की क्षमता मिल जाती है।
-नेहा तिवाड़ी,नापासर, बीकानेर
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जागरूकता अभियान की जरूरत
डिजिटल युग में लोगों की जीवन शैली अनियमित हो गई है। लोग सोशल मीडिया के मकडज़ाल में फंस चुके हैं। लोगों को स्वस्थ जीवनशैली के लिए योग एवं प्राणायाम तथा जल्दी सोने और जल्दी सुबह उठने की आदत डालनी चाहिए। अपने आहार पर नियंत्रण रखना चाहिए। योग शिविर एवं जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जा सकता है।
-सतीश उपाध्याय, मनेंद्रगढ़, छत्तीसगढ़